
Gangrel Dam: धमतरी पत्रिका के धान म्यूजियम, फिश एक्वेरियम सुझाव की कलेक्टर नम्रता गांधी ने भी सराहना करते हुए इस पर आगे प्रयास करने की बात कही है।
जिले में स्थित रविशंकर जलाशय (गंगरेल बांध) में 45 प्रकार की मछलियां पाई जाती है। संरक्षण नहीं होने से दो मछलियों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। इनमें अच्छे बाजार मूल्य वाली चीतल (नोटोपटेरस) व कुबड़ी (माइसटसआर) प्रजाति की मछलियां 2003 से दिखाई ही नहीं दे रही। (CG Tourism) वर्तमान में यहां कतला, मृगाल, रोहरा, बाटा, कुरसा, कालपोश, बोरई, चिलघटी, कोतरा, कोतरी, रागी, सरागी, जरहीकोतरी, डरई, सिंघार, टेंगना, बॉम्बी, पढ़ीना आदि शामिल हैं। यदि प्रशासन गंगरेल बांध एडवेंचर क्षेत्र में ही फिश एक्वेरियम स्थापित करे तो निश्चित रूप से इसका रिस्पांस मिलेगा। (CG Gangrel Dam) गंगरेल बांध में पाई जाने वाली मछलियां सहित रंगीन मछलियों को यहां रखा जा सकता है। लोग आकर्षित होंगे।
मछलियों की प्रजाति
1. विश्व में 21723 प्रजाति की मछलियां पाई जाती है। इनमें से 8411 मीठे और शेष समुद्री मछलियां होती है।
2. भारत में 2500 प्रकार की मछलियां पाई जाती है।
3. छत्तीसगढ़ में 107 प्रजाति की मछलियां है।
4. गंगरेल में 45 प्रकार की मछलियां पाई जाती है।
धान की प्रजाति
1. छत्तीसगढ़ में धान की कुल 3600 वैरायटी है।
2. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के संग्रहालय में इसे देख सकते हैं।
3. कृषि विज्ञान केन्द्र संबलपुर धमतरी के अनुसार धमतरी में 150 किस्म की धान है।
4. मगरलोड के नकछेड़ाराम के पास धान की 325 प्रजाति है।
पर्यटकों की संख्या बढ़ी तो- आय होगी बिजनेस बढ़ेगा, रोजगार मिलेगा
विशाखापट्टनम के फिश एक्वेरियम में फिंगर साइज से लेकर 10 किग्रा तक की मछलियां रखी गई है। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां मछलियां देखने पहुंचते हैं। 30 रूपए प्रति पर्यटक शुल्क भी लिया जाता है। धमतरी में भी फिश व धान एक्वेरियम की शुरूवात हो तो पर्यटक आकर्षित होंगे। (CG Tourism) स्थानीय मछलियों के अलावा तरह-तरह के रंगीन मछली देखने मिलेगा। साथ ही धान के कटोरे के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले हजारों किस्मों के धान से हम छत्तीसगढ़वासियों सहित आने वाले आगंतुकों को भी धान की वैरायटी दिखाएंगे। लोग धमतरी सहित नगरी क्षेत्र में पाए जाने वाले सुगंधित धान से भी रूबरू होंगे।
Published on:
23 Feb 2024 05:03 pm
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