धनबाद। स्थानीय लोग कहते हैं कि उनकी एक आवाज पर पूरा शहर एक साथ खड़ा हो जाया करता था। पूरे कोयला मजदूर उनके साथ खड़े नजर आते थे। लेकिन आज उस व्यक्ति की यह स्थिति है कि वो बगैर सहारे के आज खड़े भी नहीं हो सकते हैं।
हम बात कर रहे हैं इसी लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद रह चुके वयोवृद्ध वामपंथी चिंतक एके राय की। ऐसीं स्थिति में उनकी लाठी बनी हैं ललिता। 81 वर्षीय राय दा की पांच साल से एक बच्चे की तरह सेवा कर रही हैं। राय दा के पास कोई संपत्ति नहीं है।
उन्होंने पूर्व सांसद और पूर्व विधायक को मिलने वाले पेंशन और सुविधाएं लेने से मना कर दिया है। ऐसे में ललिता ने ही उनको संभाला है। एके राय तीन बार धनबाद लोक सभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। सिंदरी के विधायक भी रहे हैं। अपने दम पर उन्होंने मार्क्सवादी समन्वय समिति नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई, जो आज भी अस्तित्व में है। उन्होंने सरकारी सुविधाओं से दूरी बनाए रखी है।
ललिता धनबाद जिले के नुनूडीह की रहने वाली हैं। शादी होने के बाद मायके नुनूडीह में ही पति के साथ रह गईं। पति निताई हाड़ी माडा में काम करते हैं। चार बेटियों की मां होने के बावजूद ललिता राय दा की सेवा को अपना परम कर्तव्य समझती हैं। ललिता की दो बेटियों की शादी हो चुकी हैं।