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ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण से निखर पड़ा मांडू का सौन्दर्य, बोल उठा इतिहास

आठवीं से लेकर 16 वीं शताब्दी की है प्राचीन इमारतें, केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन ६१ धरोहर, एक दशक में ३५ का रिनोवेशन, हर साल लाखों पर्यटक पहुंच रहे मांडव

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धार

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rishi jaiswal

Nov 25, 2023

ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण से निखर पड़ा मांडू का सौन्दर्य, बोल उठा इतिहास

ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण से निखर पड़ा मांडू का सौन्दर्य, बोल उठा इतिहास

मांडू. किसी भी शहर का इतिहास उसका आइना होता है। विश्व के पटल पर इतिहास के आइने में अपनी एक मजबूत छाप रखने वाली पर्यटन नगरी मांडू की खूबसूरती निखर आई है। इतिहास भी बेजान पत्थरों से बोल उठा है। मांडू में आठवीं से १६ वीं शताब्दी के बीच कई प्राचीन इमारतें बनी है। जिनका संरक्षण का काम केंद्रीय और राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से किया जा रहा है।

मांडू में 61 संरक्षित इमारतें हैं। इनमें से 35 इमारतों का रिनोवेशन विभाग कर चुका है। संवरने के बाद इमारतें पर्यटकों को अपने इतिहास से रूबरू कर रही है या यूं कहे कि इनका सौंदर्य निखर आया है। हर साल लाखों की संख्या में देशी -विदेशी पर्यटक इन इमारतों को निहारने पहुंचते हैं। कोरोना काल के दो साल छोड़ दें तो हर साल मांडू पहुंचने वाले देशी सैलानियों की संख्या चार लाख से अधिक है। वहीं विदेशी पर्यटक भी प्रतिवर्ष तीन हजार आए। ऐतिहासिक इमारत की दशा को दर्शाती यह रिपोर्ट!

रानी रूपमती का महल
मांडू की शान ङ्क्षवध्याचल पर्वत श्रृंखला के आखिरी छोर पर बस रानी रूपमती का महल पर्यटकों के लिए काफी आकर्षक का केंद्र है। बाजबहादुर और रानी रूपमती के अमर प्रेम की निशानी यह इमारत जर्जर होने लगी थीं। जो संवरने के बाद खूबसूरत दिखने लगी है। पुरातन पद्धति से किए रिनोवेशन में इन इमारत की उम्र को बढ़ा दिया है।

सोनगढ़ का किला
तारापुर घाट से चढऩे पर मिलने वाला पहला किला सोनगढ़ का पड़ता है। इसकी दीवार मांडू के चारों ओर फैली है। सोंगरगढ़ गेट के नजदीक दीवार का मलबा जगह-जगह से गिरने लगा था। पुरातत्व विभाग द्वारा इसकी रिपेयङ्क्षरग कर इसे अपने मूल स्वरूप में लाकर खड़ा कर दिया। पुरातन ऐतिहासिक यह दीवार 30 से 40 फीट ऊंची है। जो विहंगम दिखाई देती है।

आलमगीर दरवाजा
धार-इंदौर की ओर से मांडू प्रवेश करते ही ऐतिहासिक दरवाजे पर्यटकों का स्वागत करते हैं। आलमगीर दरवाजे के बाद आने वाला दूसरा दरवाजा अपने मूल स्वरूप में आ चुका है। पुरानी पत्थर की एरन से इसे नीचे से लेकर ऊपर तक जोड़ा है। यह दरवाजा पर्यटकों को प्रवेश करते ही मांडू की ऐतिहासिक वैभवता का एहसास कराता है।

दरिया खां का मकबरा
बाजार से कुछ ही दूरी पर स्थित दरिया खां का मकबरा रमणीय स्थल है। जल से भरे कुंड के आसपास बने महलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। गेट से लेकर महल तक मोटे पत्थरों का पहुंच मार्ग बनाया है। इससे पर्यटक आसानी से इमारत का दीदार करने पहुंचते हैं।

35 इमारत का रेनोवेशन, 26 का होगा शुरू
केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षक सहायक प्रशांत पाटणकर ने बताया कि आठवीं से 16 वीं शताब्दी की इन इमारतों रखरखाव विभाग द्वारा किया जाता है। मांडू नगर में 61 सरक्षित इमारतें हैं। जिसमें से 35 इमारत का रिनोवेशन कार्य पूरा हो चुका है। आगे बची हुई इमारत का भी रिनोवेशन किया जाएगा।

मलिक मुगिस की मस्जिद
ङ्क्षहडोला महल के पीछे बना ऐतिहासिक मलिक मुगिस की मस्जिद मुगलकालीन इमारत है। इसके बीचोंबीच स्विङ्क्षमग पूल बना था। इसका रेनोवेशन करके उसे तैयार किया है। जो इस महल की शोभा बढ़ा रहा है।