
धार के खुशियों के शहर मांडू में किले और महलों में पत्नी संग घूमते नजर आए श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रॉनिल विक्रमसिंघे.
MP News: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रॉनिल विक्रमसिंघे शनिवार को खुशियों के शहर मांडू पहुंचे। वह यहां की खूबसूरती के ऐसे मुरीद हुए कि उन्होंने मांडू की जमकर तारीफ की। रॉनिल विक्रमसिंघे ने कहा कि मांडू बहुत खूबसूरत है और यहां कि जल संरचनाएं भी अदभुत हैं। पूर्व राष्ट्रपति दोपहर 12 बजे मांडू के खुरासानी विला पहुंचे। यहां प्राचीन इमली के पेड़ को देखकर भी वे हैरान रह गए।
इसके बाद जहाज महल में दिलचस्पी से रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम गाथा सुनते रहे। पूर्व राष्ट्रपति ने भ्रमण के लिए आए स्कूल के बच्चों के साथ सेल्फी भी ली।
मांडव में भ्रमण के दौरान श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने वहां घूमने आए स्टूडेंट्स से कहा कि, भारत और श्रीलंका के बीच प्राचीन काल से ही जुड़ाव रहा है। दोनों ही देशों के बीच शुरू से ही आदान-प्रदान होता आया है। श्रीलंका में श्रीराम और रामायण को लेकर कई प्रमाण भी मिले हैं। दोनों देशों के भोजन, पौराणिक कथाएं विशेष रूप से रामायण, बौद्ध धर्म और तमिल भाषा में बहुत सी समानताएं हैं।
विक्रमसिंघे ने इस दौरान कहा कि श्रीलंका और दक्षिण भारत दोनों में तमिल भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। तमिल भाषा एक पुल है जो श्रीलंका और भारत के लोगों को जोड़ने का काम करता है। यह साझा पहचान को बढ़ावा देने में सहायक है। एक राजनेता के रूप में उन्होंने अपने अनुभवों और श्रीलंका के भविष्य और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका पर विचार भी साझा किए। शुक्रवार सुबह इंदौर आए विक्रमसिंघे ने राजवाड़ा का भ्रमण भी किया।
बता दें कि विक्रमसिंघे पत्नी मैत्री विक्रमसिंघे के साथ शहर आए और श्री सत्यसाईं विद्यालय भी पहुंचे। यहां उन्होंने स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का उद्घाटन भी किया। शाम को विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विक्रमसिंघे ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि, मैं 18 वर्ष बाद दोबारा इंदौर आया हूं। यहां काफी कुछ बदल गया है। दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुझे बताया था कि इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। यहां आकर यह देख भी लिया।
इस दौरान विक्रमसिंघे को श्रीलंका का आर्थिक संकट भी याद आ गया। उस दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक संकट के दो कठिन वर्ष थे, उस दौर में भारत ने उनकी काफी मदद की।
विक्रमसिंघे ने स्कूलों में खेल सुविधाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि खेल भविष्य की पीढ़ी के दिमाग और शरीर को आकार देते हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विक्रमसिंघे से चर्चा भी की और उनसे कई सवाल किए, जिनके विक्रमसिंघे ने मुस्कुराते हुए जवाब भी दिए। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की ओर से प्रबंधन समिति के चेयरमैन डा. रमेश बाहेती ने विक्रमसिंघे को स्मृति चिह्न भेंट किया।
Updated on:
24 Nov 2024 11:06 am
Published on:
24 Nov 2024 11:01 am
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