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गणगौर पर्व पर रोज हो रहे है आयोजन

क्षेत्र के कई ग्रामों में गणगौर माता के रात्रि विश्राम कार्यक्रमों का आयोजन भी हो रहा है

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धार

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Amit Mandloi

Apr 05, 2022

गणगौर पर्व पर रोज हो रहे है आयोजन

गणगौर पर्व पर रोज हो रहे है आयोजन

मनावर.

गणगौर पर्व पर अंचल एवं नगर में सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रमों की बयार चल पड़ी है। खासकर महिलाएं देर रात्रि तक गणगौर माता की आराधना में नाच गाने व भाव गीतों की प्रस्तुतियां दे रही है । क्षेत्र के कई ग्रामों में गणगौर माता के रात्रि विश्राम कार्यक्रमों का आयोजन भी हो रहा है । 9 अप्रैल तक माता का विसर्जन होगा क्योंकि ग्रामों में श्रद्धालु लोग जो अपनी ली हुई मन्नतें उतारने के लिए गणगौर माता के रात्रि विश्राम कार्यक्रमों का आयोजन रख रहे हैं। स्वर्णकार समाज द्वारा गणगौर पर्व पर विशेष धार्मिक पूजा अर्चना के कार्यक्रम किए जा रहे हैं तथा प्रतिदिन गणगौर माताजी के लिए पाती लाई जा रही है । महिलाएं ढोल बाजे के साथ नगर के पनघट कुएं पर पाती लेने के लिए जाती है। जिसमें महिलाएं दूल्हा एवं दुल्हन बनकर शोभायात्रा के साथ निकलती है । मंगलवार को स्वर्णकार समाज की महिलाएं मंजू जौहरी को दूल्हा एवं वंदना जौहरी को दुल्हन बनाकर पाती लेने नगर के प्रमुख मार्ग से शोभा यात्रा के साथ निकली । मीना चौधरी ,सुनीता जौहरी ,रानी जौहरी, रुपाली जौहरी, भाग्यश्री जौहरी , राजनंदिनी जौहरी , लाली सोनी , नेहा जौहरी उपस्थित थी।

निमाड के प्रसिद्ध लोकपर्व गणगौर का आगाज हो गया

बाग . नगर सहित क्षेत्र में सोमवार से निमाड के प्रसिद्ध लोकपर्व गणगौर का आगाज हो गया। गणगौर का त्यौहार तीन दिनों तक मनाया जाता है। परंतु इस वर्ष यह पर्व चार दिनों तक रहेगा। तीसरे दिन जब गणगौर की विदाई होना है इस दिन बुधवार है। गणगौर की पूजा बहन. बेटी के रूप में की जाती रही है।

मान्यता है कि बहन. बेटियों को बुधवार को मायके से नहीं भेजा जाता है। इसलिए गणगौर त्यौहार 7 अप्रेल तक मनाया जाएगा। सोमवार को हाट बाजार व अत्यधिक गर्मी के बीच भी महिलाएं लोक पर्व गणगौर के उल्लास में डूबी हुई नजर आई। महिलाओं ने जवारों का पूजन कर अखंड सुहाग और इच्छित वर की कामना की। गणगौर पूजन के बाद महिलाएं ने गणगौर को पानी पिलाने की रस्म निभाई। इस दौरान सुंदर निमाडी लोक गीत गाए।

गणगौर माता और ईश्वर जी की मूर्तियों को लेकर देर तक नचाते है

गणगौर पर्व नगर में सकल हिन्दू समाज जन मिल जुलकर मनाते है। क्षत्रिय सिर्वी समाज का मुख्य पर्व होने से इसका अत्यधिक महत्व होता है। सिर्वी समाज के रामेश्वर गहलोत ने बताया कि इस पर्व के लिए समाजजनों का उत्साह और उमंग देखते ही बनता हैं। पर्व के पहले सभी अपने घरों को साफ कर रंग रोगन करवाते है। तथा इस पर्व के दौरान पूरे मोहल्ले को दुल्हन की तरह सजाते है।पूरे समय माता का पूजन अर्चन किया जाता है। शाम को सभी सिर्वी समाज सहित अन्य समाज के लोग ईश्वर जी व गोरा माता की प्रतिमा को लेकर देर रात तक नृत्य करते है जिसे देखने के लिए पूरे नगर के लोग बडी संख्या में आते है।