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मप्र ने बदले नियम, फर्जी शिकायतों पर जाना होगा जेल

मप्र सरकार ने सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायतों के लिए नियम बदल दिए हैं. ऐसी शिकायतों पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

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धार

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harinath dwivedi

Jan 23, 2022

CM Helpline

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इंदौर. मप्र सरकार ने सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी शिकायतों के लिए नियम बदल दिए हैं. ऐसी शिकायतों पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है. धार, खरगोन, इंदौर और झाबुआ जिले में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के जरिए ब्लैकमेलिंग करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ी है.

आम लोगों की मदद के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन सेवा कुछ लोगों के लिए ब्लैकमेलिंग का जरिया बन गई है. शिकायतकर्ता अधिकारियों को कार्रवाई के नाम पर धमकाकर पैसे वसूल रहे थे. ऐसे ही मामले सामने आने के बाद सरकार ने सख्ती शुरू की और ब्लैकमेलर्स को पकड़कर जेल भेजना शुरू किया. अब तक कम से कम छह लोगों को जेल भेजा जा चुका है. उनके गैंग से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश हो रही है.

अवैध खनन, रोड निर्माण में गुणवत्ता, पीडीएस, जलशक्ति मिशन के साथ ग्रामीण विकास विभाग की शिकायतों पर सबसे ज्यादा वसूली हो रही है। झाबुआ जिले के ग्राम पंचायत कचराखदान, अलस्याखेडी, काजबी, गोदरिया, बेडदा, महुडीपाड़ा के सचिवों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई गईं। शिकायत निराकृत करने के लिए जब फोन किया गया तो उससे 2500 हजार रुपए की मांग की गई। इंदौर निवासी रंजीत कुमार ने एक ही मोबाइल से पेटलावद जनपद पंचायत की कुल 06 ग्राम पंचायतों में 09 अलग-अलग शिकायतें की गई थी। शिकायत को बंद करने के लिए अमन वर्मा के खाते में रुपए जमा करवाए। इस मामले में पुलिस ने रंजीत से जुड़े तीन अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया। अमन वर्मा अपने दोस्त राहुल, मनीष व रंजीत के साथ मिलकर सीएम हेल्पलाइन पोटल पर शिकायतें कर ब्लैक मेलिंग कर रहा था। धार जिले में ब्लैकमेलिंग पर राजोद थाने में अंबरीश शर्मा ओर पीथमपुर थाने में हरिकेश द्विवेदी पर प्रकरण दर्ज किया दोनों को जेल भेजा गया।

ऐसे दर्ज कर सकते हैं शिकायत
किसी भी विभाग से जुड़े मामले में यदि कार्रवाई नहीं हो रही है तो आप सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. वाट्सएप के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसकी मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय से होती है, इसलिए इसका त्वरित निराकरण होता है.

इसलिए हो रही ब्लैमेलिंग
दरअसल शिकायतों को बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बंद करने पर प्रशासनिक कार्रवाई होती है। शिकायतें बंद करने के लिए संबंधित को फोन करना होता है। इसमें उसकी संतुष्टि/सहमति आवश्यक होती है। शिकायतों को बिना सहमति संतुष्टि के बंद करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की आशंका रहती है।

ऐसी भी कार्रवाई
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को बगैर निराकरण के जबर्दस्ती बंद करने के मामले में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के निर्देश पर इसी सप्ताह खरगोन जिले में जनजाति विभाग के सहायक आयुक्त जेएस डामोर को निलंबित कर दिया गया। डामोर ने पीएम आवास की किस्त की भुगतान संबंधी शिकायत को फोर्स क्लोज किया था।