
घर में संस्कार दोगे तो अंतिम संस्कार होगा
कोद. शिवमहापुराण की कथा कहती है केवल शिव को पाने की पुण्यायी है। जिसके भीतर भगवान को पाने की ललक , इच्छा, चरण पाने की इच्छा बढ जाती है। परमात्मा को चढाए जाने वाले जल में छल नहीं होना चाहिए। ह्रदय, दिल, भाव, मन से भगवान को समर्पित करना चाहिए।
यह बात कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने अति प्राचीन कोटेश्वर महादेव धाम में शिवकुमारसिंह सिसौदिया एवं ओमप्रकाश पांडे की स्मृति में शरदसिंह सिसौदिया परिवार द्वारा आयोजित की जा रही पंचपुष्प शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन रविवार को कही। उन्होंने कहा कि शंकर भगवान पर गंगाजल चढाए तो क्या भगवान प्रसन्न अधिक होते शिवमहापुराण कथा कहती है एक लौटा जल महादेव को चढा रहे है यदि वह शिवलिंग से छू गया तो अपने आप ही गंगाजल बन जाता है।
जैसा आप शुद्ध खाते है वैसा ही भगवान को शुद्ध और सच्चे मन से अर्पण करे। चाहे एक चावल का दाना चढाना तो वह भी जो आप खाते है वैसा ही शंकरजी को चढाते हो तो वे प्रसन्न हो जाएंगे। केमिकल युक्त व अशुद्ध वस्तु अर्पण करने से भगवान को भी कष्ट होता है। कर्मो की संपदा होती है करोडों की नही। परमात्मा ने पेट दिया है तो भरने की व्यवस्था भी की हैं।
मनुष्य को नेत्र दर्शन के लिए, कान श्रवण करने, चरण मदिर जाने, शीश झुकाने एवं हाथ दिए है । दान करने के लिए। मदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हो बाहर से मुस्कुरा देना ये भी नहीं कर सकते है तो जहंा खडे हो वहीं से शिखर दर्शन कर लेना।
सिसौदिया परिवार धन्यवाद का पात्र है
कथावाचक मिश्रा ने कहा कि आयोजक शरदसिंह सिसौदिया को धन्यवाद देना चाहता हू जिनके कारण लाखों लोग शिवमहापुराण कथा सुन पा रहे है।
शमी जिसमें कांटे लगे है उसको लोग खेजडी भी कहते है। शमी का जो फूल होता है वह गुलाबी कलर का होता है। शमी के वृक्ष को प्रणाम कर भगवान राम ने लंका पर चढाई कर विजय प्राप्त की थी। स्वर्ण की कीमत से पूर्ण हो एक शमी का पत्ता होता है। विजयादशमी के दिन शमी का पत्ता लोगों को दिया जाता है। इस दिन शमी के पत्ते के साथ शस्त्रों की पंूजा करने से संपदा की कमी नहीं होतीे। पंचपुष्प कथा के तीसरे दिन शमी का पुष्प् का वर्णन सुनाया। प्रथम पारिजात, द्वितीय कनेर तथा तीसरा शमी का पुष्प है।
कथा के बाद राज्यमंत्री राजेश अग्रवाल, पूर्व विधायक बालमुकुंदसिंह गौतम, मनोजसिंह गौतम, कमलसिंह पटेल, अमित जैन ने आरती में लाभ लिया। इससे पूर्व शनिवार को तहसील के विभिन्न मंदिरों के पुजारियों का सम्मान किया गया।
तीसरे दिन बढाए टेंट
दो दिन की कथा के पश्चात तीसरे दिन रविवार को 12 हजार वर्ग फीट का पांडाल अतिरिक्त रूप से बढाया गया। किंतु यह पांडाल भी रविवार को छोटा पड गया और कई श्रद्धालुओं ने तपती धूप में खडे रहकर कथा का रसपान किया।
Published on:
26 Mar 2023 08:03 pm
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