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राजस्थान के राजाओं की सोने की गिन्नियां मध्यप्रदेश में मिली, जांच में जुटी एएसआई

दिल्ली से आई एएसआइ की चार सदस्यीय टीम ने किया गिन्नियों का सर्वे, जयपुर के शासकों द्वारा इस्तेमाल की जाती थी खुदाई में मिली सोने की गिन्नियां

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धार

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Manish Geete

Sep 13, 2022

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धार। शहर के चिटनिस चौक में मकान की खुदाई मे मिली सोने की गिन्नियों (gold coin) की जांच करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम दिल्ली से धार पहुंची। चार सदस्यीय दल ने खुदाई में मिली सोने की गिन्नियों की फोटोग्राफी करवाई ताकि अरबी भाषा लिखी इन गिन्नियों से जुड़ा इतिहास सामने आ सके। अरबी भाषा के विशेषज्ञों से इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। ताकि सही तथ्य सामने आ सके। टीम के सदस्य उस मकान पर भी पहुंचे, जहां से यह गिन्नियां मिली थी।

गौरतलब है कि चिटनिस चौक स्थित शिवनारायण राठौड़ के निर्माणाधीन मकान से खुदाई के दौरान सोने की गिन्नियां मिली थी। इस दौरान काम कर रहे मजदूरों ने सोने की गिन्नियों की बंदरबांट कर ली। लेकिन जब पुलिस को इसकी भनक लगी तो सख्ती से हुई पूछताछ के बाद 86 गिन्नियां जब्त की गई। इसमें से एक गिन्नी हाल ही में सराफा व्यापारी साकेत अग्रवाल ने भी सरेंडर की है। एक गिन्नी मजदूर ने व्यापारी को बेच दी थी। इस मामले में राज्य पुरातत्व विभाग अपनी जांच कर चुका है। जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी इस मामले में अब जांच शुरू की है।

टीम ने मकान का किया मुआयना

एएसआइ (Archaeological Survey of India) के सहायक अधीक्षक एसएन यादव, सहायक पुरातत्विदहेमंत सिंह, संग्राहध्यक्षकमांडू प्रशांत पाटनकर व फोटोग्राफर केआर मालवी ने सोमवार को धार पहुंचकर जांच की। जिस मकान की खुदाई से गिन्नियां मिली थी, टीम वहां भी पहुंची और मुआयना किया। इसके बाद कोतवाली में गिन्नियों के फोटोग्राफ लिए गए हैं।

शुरुआत से लेकर अब तक पुलिस और प्रशासन सोने की गिन्नियों के मामले में कई विशेषज्ञों की राय व रिपोर्ट ले चुका है। इसमें जो तथ्य सामने आए हैं, वह लगभग एक जैसे हैं। सभी रिपोर्टस में इन गिन्नियों का ताल्लुक जयपुर घराने से जुड़ा पाया गया है। जयपुर केशासकों द्वारा राज्य की मुद्रा के रूप में इन्हें 18 व 19वीं शताब्दी में इस्तेमाल में लिया जाता है। राज्य पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में भी इसी बात का जिक्रकिया गया है।

इनका कहना

गिन्नियों पर अरबी भाषा में लिखावट है। इस कारण अरबी भाषा के विशेषज्ञों से इसमें राय ली जाएगी। इसके बाद भी वास्तुस्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
-एसएन यादव, सहायक अधीक्षक, एएसआइ