30 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

1 अप्रैल से महंगाई की मार, बढ़ेंगे दूध के दाम, उत्पादक संघ की बैठक में फैसला

Milk Prices Increase: दूध के मूल्य बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर रविवार को शहर के लालबाग उद्यान में दुग्ध उत्पादक संघ और विक्रेता संघ की बैठक हुई।

2 min read
Google source verification

धार

image

Akash Dewani

Mar 30, 2026

Milk Prices Set to Rise after 1st april 2026 Inflation MP news

Milk Prices Set to Rise after 1st april 2026 (फोटो-Freepik)

MP news: महंगाई का असर अब दूध के दामों (Milk Prices) पर भी पड़ने वाला है। करीब तीन साल बाद दूध के दामों में बढ़ोतरी होने वाली है। इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। 60 रुपए लीटर मिलने वाला दूध 1 अप्रैल से करीब 64 रुपए लीटर के दाम से आम उपभोक्ता को मिलेगा। दुग्ध उत्पादक संघ और दुग्ध विक्रेता संघ की बैठक में इस बात को लेकर विमर्श हुआ है।

दरअसल, लंबे समय बाद उत्पादक संघ की बैठक हुई है, जिसमें चार रुपए प्रति लीटर दाम 200 ग्राम मावे वाले दूध पर बढ़ाए गए है। जो दूध 54 रुपए लीटर दिया जाता था अब वह विक्रेता संघ को 58 रुपए लीटर मिलेगा। वहीं प्रति फैट 10 रुपए दूध विक्रय का दाम तय किया गया है। इन स्थितियों में चार रुपए उत्पादक संघ ने बढ़ाए है। यही चार रुपए आम उपभोक्ता से लिए जाएंगे। उत्पादक संघ और विक्रेता संघ के जेब और मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

विक्रेता संघ ने भी माना दाम बढ़ाना जायज

दूध के मूल्य बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर रविवार को धार शहर के लालबाग उद्यान में दुग्ध उत्पादक संघ और विक्रेता संघ की बैठक हुई। इसमें मुख्य रूप से उत्पादक संघ के वरिष्ठ लोग मौजूद थे। उत्पादक संघ ने दाम बढ़ाने के पीछे की वजह विक्रेता संघ के समक्ष रखी। माना जा रहा था कि सीधे 4 रुपए लीटर बढ़ाने को लेकर सहमति नहीं बनेगी, लेकिन विक्रेता संघ ने भी माना कि तीन साल से उत्पादक संघ ने दाम बढ़ाकर नहीं मांगे है। वहीं खर्च भी बढ़े हैं। ऐसी स्थिति में उन्होंने 58 रुपए लीटर का दाम देने पर सहर्ष सहमति दे दी है। हालांकि, तय मानको के अनुसार दूध होगा तभी पूर्ण दाम मिल पाएगा। यदि मावा कम बैठता है या फैट कम आता है तो उत्पादक संघ को उस अनुपात में ही दाम मिलेंगे।

उत्पादक संघ बोला- खर्च बढ़े, उचित मूल्य जरूरी

यूं तो हर क्षेत्र में खान-पान की वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। इनसे दुग्ध उत्पादक क्षेत्र भी अछूता नहीं है। तीन साल में भले ही उत्पादकों ने वाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन अब दाम बढ़ाने का मुख्य कारण पशुपालन के दौरान खर्च बढ़ना बताया जा रहा है। दुग्ध उत्पादक संघ से जुड़े महेश पाटीदार तिरला का कहना है कि बीते तीन सालों में पशु आहार के दाम और परिवहन महंगा हुआ है। पशुओं की देखभाल में भी खर्च बढ़े हैं। कोविड काल के बाद से उत्पादक संघ ने बाजारी परिस्थितियों को देखते हुए मूल्य वृद्धि को कोई कदम नहीं उठाया था। वर्तमान में बढ़ते खर्च के मद्देनजर दुग्ध उत्पादकों को वाम बढ़ाना जरूरी हो गया है।

यह होगा बाजार पर असर

दूध के दाम बढ़ने का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ता पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया। वर्तमान में चाय 5 रुपए कट दी जाती है। वाम बढ़ने का सबसे बड़ा असर यहीं दिखेगा। चाय की सैकड़ों गुमटियां हजारों-लाखों रुपए का वार्षिक कारोबार है। ऐसी स्थिति में यह वजन भी आम आदमी की जेब पर ही पड़ेगा। इसके अतिरिक्त मावे सहित मिष्ठान एवं अन्य दुग्ध पदार्थों के दाम भी बढ़ेंगे।

4 रुपए प्रति लीटर बढ़े

धार दुग्ध विक्रेता संघ अध्यक्ष कृष्णकांत सोमानी ने बताया कि दुग्ध उत्पादक संघ के साथ रविवार को विक्रेता संघ की बैठक हुई है। कई सालों बाव उनके द्वारा मूल्यवृद्धि करने का प्रस्ताव रखा गया था और उसके जायज कारण भी बताए गए। विक्रेता संघ द्वारा इसे स्वीकार कर लिया गया है। आगामी दिनों में दूध के मूल्य की चार रुपए प्रति लीटर वृद्धि होगी। (MP news)