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प्लास्टर के बाद हाथ में आई सूजन, एक गलती के कारण काटना पड़ा हाथ

negligence in plaster- 15 वर्षीय बालक को इलाज में लापरवाही के कारण गंवाना पड़ा हाथ, 13 नवंबर को सड़क दुर्घटना के बाद जिला अस्पताल में करवाया था भर्ती...>

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धार

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Manish Geete

Nov 18, 2022

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धार। एक किशोर को जरा सी लापरवाही भारी पड़ गई। सड़क दुर्घटना के बाद इस किशोर के हाथ में फेक्चर हो गया था। आपरेशन से पहले ही प्लास्टर चढ़ा दिया। इसके बाद युवक के हाथ में सूजन आ गई और बदबू आने गी। जब दोबारा अस्पताल पहुंचे तो डाक्टरों ने हाथ काट दिया।

जिला अस्पताल में इलाज करवाने के लिए भर्ती हुए एक युवक को अपना हाथ गंवाना पड़ गया है। दरअसल सडक़ दुर्घटना के बाद युवक को धामनोद से धार रेफर किया था। धार में युवक को ऑपरेशन से पहले प्लास्टर चढ़ाया। प्लास्टर चढ़ाने के कुछ घंटे बाद युवक के हाथ में सूजन आ गई और बदबू आने लगी। अस्पताल में ध्यान नहीं देने के कारण जब परिजन प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचे। तब तक काफी देर हो गई हो गई थी। प्राइवेट हॉस्पिटल में युवक का हाथ ही काटना पड़ गया।

यह घटना 15 वर्षीय प्रदीप पिता भावसिंह गिरवाल निवासी रामगढ़-सुरानी उमरबन के साथ हुई है। जानकारी के अनुसार 13 नवंबर को तारापुर घाट में बाइक की टक्कर में प्रदीप के हाथ की हड्डी टूट गई थी। प्रदीप के बड़े भाई कुलदीप गिरवाल ने बताया कि कंधे और कोहनी के नीचे की हड्डी टूट गई थी। रात 10 बजे प्रदीप को धामनोद लेकर पहुंचे थे। वहां से रात में ही 12 बजे रेफर कर धार जिला अस्पताल भेज दिया।

मंडलेश्वर में काटना पड़ा हाथ
धार के प्राइवेट हॉस्पिटल में जब युवक प्रदीप को लेकर पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी। परिजन को रेफर होने की सलाह दी। कुलदीप ने बताया इसके बाद हम मंडलेश्वर गए, जहां पर भाई प्रदीप का हाथ काटना पड़ा है। कुलदीप ने बताया धार जिला अस्पताल में डॉ. छत्रपालसिंह चौहान ने प्रदीप का उपचार किया था। प्लास्टर के बाद हाथ में सूजन और सडऩ लग गई। इसके बाद हमसे लिखवा लिया कि इलाज के दौरान कुछ भी होता है तो जिम्मेदारी हमारी रहेगी।

दूसरे दिन मिला उपचार

कुलदीप ने बताया दूसरे दिन जिला अस्पताल में प्रदीप का इलाज शुरू हुआ। ऑपरेशन करवाने की बात डॉक्टर कह रहे थे। लेकिन आयुष्मान कार्ड नहीं था। आयुष्मान कार्ड बनाने में दो दिन लग गए। इस बीच 14 नवंबर 4.30 बजे प्रदीप के हाथ की ड्रेसिंग कर प्लास्टर चढ़ाया। इसके कुछ घंटे बीतने के बाद 15 नवंबर सुबह करीब 8 बजे हाथ में सूजन बढ़ने के बाद बदबू भी आने लगी थी। हम डर गए और इलाज नहीं होने के कारण प्रदीप को प्राइवेट हॉस्पिटल लेकर दौड़े।

इनका कहना

हाथ काम नहीं कर रहा था। मैंने इंदौर जाने की सलाह दी थी। फिर परिजन यहां से बिना बताए कहां ले गए और क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है। आयुष्मान के लिए भी मैंने कोई दबाव नहीं बनाया।

-डॉ. छत्रपाल चौहान, हड्डी रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, धार

मुझे इस मामले की जानकारी आपसे मिली है। इसमें यदि डॉक्टर की लापरवाही है तो जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव शासन को भेजेंगे।

-डॉ. एमएल मालवीय, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, धार