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खेत पर सोयाबीन देखने जा रहे किसान को कुएं से बच्चे की आवाज आई, देखा तो चिटियों के बीच तड़प रहा था नवजात

गांव के लोगों को इकट्ठा कर कुए से निकाला, डायल 100 से जिला अस्पताल के एसएनसीयू में किया भर्ती, डॉक्टरों का कहना, 72 घंटे हैं महत्वपूर्ण

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धार

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atul porwal

Jun 30, 2019

Dhar

Dhar

ऐसे रहा घटनाक्रम
- शनिवार सुबह 7.14 पर बच्चे के रोने की आवाज सुनी।
- 7.20 तक उसे खाली पड़े कुएं से निकाला।
- 8.20 पर एसे धार जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया।
- कुएं की गहराई 10 से 12 फीट के लगभग।
- घटना स्थल अमझेरा थाने के गल्लोडा गांव।
- जन्म देते ही अनचाहे बच्चे से से पीछा छुड़ा गई मां।
- करीब 60 घर और लगभग 250 की आबादी वाला है गल्लोडा गांव।
- पिछले वर्ष एसएनसीयू में 4 अनचाहे बच्चे आए, जो सभी स्वस्थ होकर आश्रम पहुंचे।
- इस वर्ष अब तक दो बच्चे एसएनसीयू पहुंचे, जिनमें से एक की मौत, एक गंभीर हालत में।

ये है एसएनसीयू के हाल
- जिला अस्पताल के एसएनसीयू की क्षमता 20 बच्चों की।
- वर्तमान में यहां 30 बच्चे भर्ती।
- एसएनसीयू में प्रभारी डॉ. मुकुंद बर्मन, डॉ. राजेश जमरा व डॉ. अमित अग्रवाल पदस्थ है।
- 20 का नर्सिंग स्टाफ।

ये है एसएनसीयू में भर्ती का प्रावधान
- एक से 28 दिन तक के वनजात को जरूरत पडऩे पर एसएनसीयू में किया जाता है भर्ती।
- समय से पहले आने(प्री मेच्योअर) वाले बच्चे को करना पड़ता है भर्ती।
- मां के पेट से निमोनिया या सांस लेने में तकलीफ वाले बच्चों के लिए है एसएनसीयू।
- जन्म के समय जो बच्चा रोता नहीं उसे एसएनसीयू में भर्ती कर उपचार देना जरूरी।

धार.
जिले के गल्लोडा गांव में शनिवार तडक़े कोई मां अपने अनचाहे बच्चे को जन्म के तुरंत बाद कुएं में फेंक गई। सुबह जब किसान अपने खेत में बोई सोयाबीन देखने जा रहा था तो उसे रास्ते के एक कुएं से किसी बच्चे के रोने की अवाज आई। देखा तो एक नवजात चिटियों के बीच तड़पता नजर आया। बच्चे की तड़प देखी ना गई तो किसान ने गांव के ही लोगों को इकट्ठा किया और जैसे तैसे बच्चे को कुएं से निकाला। इस दरमियान किसी ने डायल 100 को फोन कर दिया था, जो उसे धार के जिला अस्पताल लाई और यहां एसएनसीयू में उसका उपचार जारी है। एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. मुकुंद बर्मन का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का दूध मिलना जरूरी है। बच्चा जिस हालत में लाया गया, लगा नहीं कि उसे जन्म के बाद दूध मिला होगा। हालांकि बच्चे का उपचार जारी है, लेकिन डॉ. बर्मन के अनुसार अभी 72 घंटे बच्चे के लिए गंभीर हैं।

यह कहते हैं मौके के लोग
गांव के ही पर्वत सिंह के अनुसार यह पता नहीं कि किसने उसे जन्म देकर कुए में फेंका, लेकिन हथलीबदला गांव का किसान गोपाल सुबह अपने खेत जा रहा था कि रास्ते में एक कुएं से उसे बच्चा रोने की आवाज आई। खेत दसई गांव के किसी पाटीदार का बताया जा रहा है, जिस पर यह कुआ बना है।

ये ले कर आए बच्चे
खबर मिलते ही गांव के पर्वत सिंह, कालू सिंहविजय डायल 100 के बारक्षक तुफान सिंह के साथ नवजात को जिला अस्पताल लाए।

क्या कहते हैं डॉक्टर
एसएनसीयू के प्रभारी डॉक्टर मुकुंद बर्मन का कहना है कि जन्म के बाद दो घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध नहीं मिलता है तो उसे हाइपेा ग्लाइसिनीया होा जाता है। साथ ही बच्चा हाइपोथर्मिया की चपेट में आ जाता है। ऐसा ही इस नवजात के साथ लग रहा है, जिसके लिए अगले 72 घंटे गंभीर हैं।