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युवक ने 13 साल में 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर 2000 पौधे रोपे

पुनर्वास स्थल निसरपुर में सितारा बाबा मंदिर पहाड़ी को एक युवक के जुनून ने 13 साल में हरा-भरा बना दिया।

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धार

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sarvagya purohit

Jun 05, 2020

युवक ने 13 साल में 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर 2000 पौधे रोपे

युवक ने 13 साल में 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर 2000 पौधे रोपे

युवक ने 13 साल में 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर 2000 पौधे रोपे
- रोज देखरेख कर पानी दिया तो बंजर पहाड़ी दिखने लगी हरी-भरी
पत्रिका सरोकार
निसरपुर.
पुनर्वास स्थल निसरपुर में सितारा बाबा मंदिर पहाड़ी को एक युवक के जुनून ने 13 साल में हरा-भरा बना दिया। पहले तक कभी बंजर दिखने वाली इस पहाड़ी पर अब चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है। यहां रोपे गए पौधे बड़े-बड़े पेड़ों का आकार ले चुके हैं। निसरपुर पुनर्वास स्थल में बीचों-बीच स्थित यह टेकरी चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है यहां 13 साल पहले हरियाली नाम मात्र की भी नहीं हुआ करती थी। जहां चारों और सिर्फ चट्टानी पहाड़ी दिखाई देती थी। लेकिन यहां रोजाना दर्शन के लिए पहुंचने वाले युवक कमल भार्गव ने इस पहाड़ी पर पौधे रोप कर पूरे पहाड़ को हरा भरा बनाने के लिए एक जुनून के तहत काम शुरू किया।
२ हजार पौधे रोपे गए
यह देवस्थान दर्शनार्थियों के लिए रमणीय स्थल बन जाए इसके लिए युवक ने पहाड़ी पर गड्ढे किए और करीब 2 हजार पौधे रोपे तभी से वे हर साल ही इस पहाड़ी पर बारिश के पूर्व पौधा रोपण करते हैं। साथ ही रोजाना सुबह व शाम को दोनों वक्त उस पहाड़ी पर रोपे गए पौधों में पानी सीचकर उन्हें हरा-भरा बना रहे हैं। युवक की मेहनत का नतीजा यह रहा कि आज चारों और पहाड़ी पर हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है।

इन प्रजातियों के पौधे अब बन चुके हैं पेड़
युवक की मेहनत और जुनून से अब पहाड़ी पर पूर्व में रोपे गए नीम, बादाम, आंवला, पीपल, गुलाब सहित कई प्रजाति के पौधे फल-फूल देने लगे हैं। पहाड़ी भी चारों तरफ से हरी-भरी नजर आने लगी है। यही वजह है कि यह स्थान पर दर्शनार्थियों के लिए रमणीय स्थल होने से प्रेरणा से कम दिखाई नहीं देता। सरकार और प्रशासन पुनर्वास को आदर्श पुनर्वास बनाने की ओर अग्रसर है, लेकिन पर्यावरण की ओर भी अगर ध्यान दिया जाए तो आने वाले दिनों में ऐसे दर्शनीय स्थल रमणीय स्थल भी बन सकते हैं।
पर्यावरण प्रेमी युवक कमल भार्गव के साथ ही सितारा बाबा सेवा समिति के सदस्य संदीप मंडवाडडीया, कैलाश पखावदीया, सुरेश प्रधान, अंबाराम पाटीदार, मुकेश सिपाही, जगदीश बयड़ी वाला का भी सराहनीय योगदान है।