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भगवान परशुराम ने क्षत्रिय कुल का नहीं, इस वंश का किया था सर्वनाश

भगवान परशुराम ने क्षत्रिय कुल का नहीं, इस वंश का किया था समूल सर्वनाश

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भोपाल

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Pawan Tiwari

May 07, 2019

parshuram

भगवान परशुराम ने क्षत्रिय कुल का नहीं, इस वंश का किया था सर्वनाश

हर साल अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती मनाई जाती है। आज अक्षय तृतीया है। पूरा देश भगवान परशुराम का जयंती मना रहा है। कहा जाता है कि भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार परशुराम ने क्रोध में आकर भगवान गणेश का दांत तोड़ दिया था। इसके अलावे और भी कई कथाएं हैं जिनमें परशुराम के क्रोध की कहानियों का जिक्र है। कहा तो ये भी जाता है कि भगवान परशुराम के डर से देवी-देवता भी थर-थर कांपते थे।

कहा जाता है कि पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम का जन्म छह उच्च ग्रहों के योग में हुआ था। यही कारण है कि वे तेजस्वी, ओजस्वी और वर्चस्वी महापुरुष बने। यही नहीं, माता-पिता भक्त भगवान परशुराम ने पिता के आदेश पर माता का गला काट दिया था और फिर पिता से वरदान मांगकर माता को जीवित भी करवा दिया था। कहा जाता है कि भगवान परशुराम के इशारे पर नदियों की दिशा बदल जाती थी। उन्होंने अपने बल पर आर्यों के शत्रुओं का नाश किया था।

अन्यायी राजतंत्र के खिलाफ बड़ा जनसंघर्ष

भगवान परशुराम ने अन्यायी राजतंत्र के खिलाफ एक बड़ा जनसंघर्ष किया था। इस जनसंघर्ष में कई राजाओं का भी सहयोग मिला था। उन्होंने अन्यायी राजतंत्र से त्रस्त ब्राह्मणों, वनवासियों और किसानों को मिलाकर एक संगठन खड़ा किया। इसमें अयोध्या, मिथिला, काशी, कान्यकुब्ज, कनेर बिंग के साथ मगध और वैशाली भी महासंघ में शामिल थे, जिसका नेतृत्व भगवान परशुराम ने किया।

क्षत्रिय कुल का नहीं, इस वंश का किया समूल सर्वनाश

कहा जाता है भगवान परशुराम ने 21 बार क्षत्रिय कुल का सर्वनाथ किया था लेकिन यह पूरी तरह सत्य नहीं है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने क्षत्रियों के कुल के हैहय वंश का समूल विनाश किया था। दरअसल, हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने बल और घमंड के कारण लगातार ब्राह्राणों और ऋषियों पर अत्याचार कर रहा था।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी सेना के साथ भगवान परशुराम के पिता जमदग्रि मुनि के आश्रम में पहुंचा। जमदग्रि मुनि ने सहस्त्रार्जुन और उसकी सेना का स्वागत किया और खाने-पीने का व्यवस्था अपने आश्रम में ही की। जमदग्रि मुनि ने चमत्कारी कामधेनु गाय के दूध से समस्त सैनिकों की भूख शांत की।

कथा के अनुसार, कामधेनु गाय के चमत्कार से प्रभावित होकर उसके मन में लालच पैदा हो गई। इसके बाद जमदग्रि मुनि से कामधेनु गाय को उसने बलपूर्वक छीन लिया। जब इस बात की जानकारी भगवान परशुराम को चली तो उन्होंने सहस्त्रार्जुन का वध कर दिया।

कहा जाता है कि सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने अपने पिता का बदला लेने के लिए परशुराम के पिता का वध कर दिया। पति के वियोग में भगवान परशुराम की माता सती हो गयीं। कहा जाता है कि पिता के शरीर पर 21 घाव को देखकर परशुराम ने उसी वक्त शपथ ली कि वह इस धरती से इस वंश का समूल विनाश करेंगे। कहा जाता है कि उन्होंने 21 बार इस वंश का विनाश किया।


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