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Deepavali 2018 : धनतेरस, दीपावली 2018, सटीक शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं उपाय

धनतेरस, दीपावली 2018, सटीक शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं उपाय

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भोपाल

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Shyam Kishor

Oct 16, 2018

deepavali 2018

धनतेरस, दीपावली 2018, सटीक शुभ मुहूर्त

स्वच्छ, सुन्दर, सुसज्जित घर आंगन, पर्यावरण एवं प्रकाश का प्रेरक महापर्व दीपावली कार्तिक अमावस्या 7 नवंबर दिन बुधवार 2018 को सूर्योदय से रात्रि 9 बजकर 31 मिनट तक हैं । सुख शांति और श्री समृद्धि प्रदान करने वाली भगवती महालक्ष्मी पवित्रता में ही स्थाई वास कर कर्तव्यनिष्ठ उद्यमी को यश, कीर्ति और वैभव प्रदान करती हैं । वास्तु एवं ज्योतिष सलाहकार महेष खजांची ने पत्रिका डॉ़ट कॉम को धनतेरस, रूप चौदस एवं दीपावली पर्व की पूजा विधि व सटीक शुभ मुहूर्त के बारे में बताया ।

शुभ मुहूर्त
1- दीपवाली पूर्व पुष्य नक्षत्र-
बुधवार 31 अक्टूबर को सूर्योदय से लेकर देर रात्रि तक खरीदी हेतू विशेष - खाता, बही, कलम, कम्प्यूटर, मोबाईल, कपड़े, बर्तन, आभूषण, सोना चांदी,स वाहन, भवन, भूमि, प्लाट एवं व्यापारादि शुभारंभ हेतू । इस दिन कर्ज मुक्ति एवं श्री समृद्धि के लिए ये विशेष उपाय अवश्य करें ।
- बेल वृक्ष या पीपल पेड़ के नीचे गाय के घी का दीपक अवश्य जलायें ।
- दीपक जलाने के बाद वहीं बैठकर श्री सुक्त का पाठ अवश्य करें ।
- मेवा मिष्ठान का चुरमा बनाकर भोग लगायें, एवं वृक्ष की जड़ों में चीटियों के लिए बिखरा दें ।
- अपना कार्य में इमानदारी पूर्वक कार्य करने का संकल्प लेकर सफलता की कामना करें ।

2- धनतेरस
- नवंबर को सूर्योदय से लेकर रात्रि 11 बजकर 45 मिनट तक, सोम प्रदोष मास शिवरात्रि के वार्षिक शुभ मुहूर्त में उपरोक्त सभी प्रकार की खरीदी कर सकते हैं ।
- इस दिन दोपहर में 12 से 1 बजकर 30 मिनट तक राहु काल में यात्रा ना करें ।
- सूर्यास्त से लेकर रात 8 बजे तक भगवान धनवंतरी के साथ कलश का भी पूजन करें ।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भगवान यमराज का भी पूजन करें ।

3- रूप चतुर्दशी ( नरक चौदस )


- सूर्योदय से पूर्व दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर उबटन लगायें ।
- गंगाजल मिश्रित जल में पूर्व दिशा की ओर मुख करके अनामिका अंगुली से ऊँ बनाकर प्रणाम करके उसी जल से स्नान करें ।
- स्नान के बाद सुंगधित तेल, इत्र आदि लगाकर अपने मुख का दर्शन दर्पण में करते हुए आत्मदेवका को प्रणाम करे ।

4- मुख्य पर्व दीपावली


7 नवंबर 2018 बुधवार- पूजन का शुभ मुहूर्त,


- स्थिर लग्न कुम्भ अपरान्ह 1 बजकर 11 मिनट से 2 बजकर 44 मिनट के बीच ।
- स्थिर लग्न वृष सायंकाल 5 बजकर 58 मिनट से रात्रि 7 बजकर 58 मिनट के बीच प्रदोष कालिक मुहूर्त में पूजन करना अतिउत्तम रहेगा ।
- पूजन के बाद हल्दी, कामया सिंदूर और गाय का घी मिश्रित घोल से मुख्य द्वार, आलमारी, तिजोरी आदि पर शुभता का प्रतीक स्वास्तिक का चिन्ह बनायें ।
- मकान दुकान आदि के मुख्य द्वार पर पूजा की हुई लोहे की कील ठोक दे ।
- लाल कपड़ें में बनाई गई कुबेर की पोटली को स्वास्तिक बनाकर धन रखने के स्थान पर स्थापित करें ।
- सभी कार्यों की सफलता के लिए लाल कपड़े में गोमती चक्र सिक्के के साथ घर एवं व्यापार स्थल दुकान आदि के भीतरी तरफ मुख्य प्रवेश द्वार पर बांध दे ।

5- निशीथकालीन पूजन


- रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट के बीच करें ।
- इस बीच सिद्धि कुंजिका स्त्रोत. दत्तात्रेय वज्र कवच. शिव अमोघ कवच, या हनुमान बाहूक आदि का पाठ करना चाहिए ।

6- स्थिर लग्न सिंह- रात्रि 12 बजकर 56 मिनट से 2 बजकर 35 मिनट के बीच सुविधा अनुसार पाठ या पूजन करें ।

7- अति विशिष्ठ महालक्ष्मी के भ्रमणकाल का शुभ मुहूर्त


- रात्रि 1 बजकर 55 मिनट से 2 बजकर 15 मिनट के बीच मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओऱ गाय के घी के दीपक जलायें ।
- मंगल ध्वनी करें, शंख, गरूड़ घंटी बजायें और श्री सुक्त, ललिता सहत्रनाम, कनक धारा स्त्रोत, लक्ष्मी चालीसा आदि का श्रद्धा पूर्वक पाठ करें ।


- ऊँ श्रीं श्रियै नमः मंत्र का पाठ करें ।
- उपरोक्त विधि से माता लक्ष्मी का पूजन करने पर माता प्रसन्न हो जाती हैं ।