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Kamala Ekadashi 2026: कमला एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

Kamala Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व है। जानिए साल 2026 में इस व्रत की सही तारीख, नारायण को प्रसन्न करने के नियम और महत्व।

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भारत

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Manoj Vashisth

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ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा

May 24, 2026

kamala ekadashi 2026 shubh muhurat

Kamala Ekadashi 2026: 27 मई को कमला एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ संयोग (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Kamala Ekadashi 2026: सनातन धर्म में अधिक मास या मलमास में आने वाली एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, जिसे कमला एकादशी या पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026) के नाम से जाना जाता है । इस साल ज्येष्ठ अधिक मास (Jyeshtha Adhik Maas) में यह अत्यंत दुर्लभ और फलदायी व्रत 27 मई 2026 को रखा जाएगा । भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित यह तिथि दरिद्रता को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और मंत्र जाप करने से सालभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और व्यक्ति के बुरे दिन भी अच्छे दिनों में बदल जाते हैं । आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा से इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कमला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह के स्वामी स्वयं श्रीहरि विष्णु हैं। पंचांग की गणना के अनुसार, अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 27 मई को सुबह 06:22 बजे होगा। यह तिथि अगले दिन 28 मई को सुबह 07:22 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के नियमों का पालन करते हुए कमला एकादशी का व्रत 27 मई 2026 को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है।

पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। व्रती को इस दिन यथासंभव निर्जल व्रत रखकर विष्णु पुराण का पाठ करना चाहिए या श्रवण करना चाहिए। एकादशी की रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना बेहद शुभ माना जाता है। रात के प्रति पहर में भगवान विष्णु और शिव जी की संयुक्त पूजा करें। अगले दिन यानी द्वादशी को सुबह पुनः पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा दें और फिर अपने व्रत का पारण करें। माना जाता है कि इस व्रत का पालन करने वाला वैकुंठ धाम को जाता है।

पद्म पुराण के अनुसार मंत्र जाप का फल

पद्म पुराण के अनुसार, कमला एकादशी का व्रत करने वाले स्त्री और पुरुष को कई गुना फल की प्राप्ति होती है। कमला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी अच्छी होती है। इन दिन भगवान विष्णु के मंत्र जप करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सुबह जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठे और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।

पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन घर पर भगवान विष्णु का जप करने से एक गुना फल प्राप्त होता है। जबकि नदी के तट पर दूना, गौशाला में जप करने पर सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृह में एक हजार एक सौ गुना, शिवजी के मंदिर में , तीर्थ में, तुलसी के समीप लाख गुना फल की प्राप्ति होती है। वहीं, भगवान विष्णु के मंदिर में जप करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है।

कमला एकादशी पौराणिक व्रत कथा

त्रेता युग में एक पराक्रमी राजा कीतृवीर्य था। इस राजा की कई रानियां थी परंतु किसी भी रानी से राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। संतानहीन होने के कारण राजा और उनकी रानियां तमाम सुख सुविधाओं के बावजूद दु:खी रहते थे। संतान प्राप्ति की कामना से तब राजा अपनी रानियों के साथ तपस्या करने चल पड़े। हज़ारों वर्ष तक तपस्या करते हुए राजा की सिर्फ हड्डियां ही शेष रह गयी परंतु उनकी तपस्या सफल न हो सकी। रानी ने तब देवी अनुसूया से उपाय पूछा।

देवी ने उन्हें मल मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। अनुसूया ने रानी को व्रत का विधान भी बताया। रानी ने तब देवी अनुसूया के बताये विधान के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा। व्रत की समाप्ति पर भगवान प्रकट हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने भगवान से कहा प्रभु आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे बदले मेरे पति को वरदान दीजिए। भगवान ने तब राजा से वरदान मांगने के लिए कहा।

राजा ने भगवान से प्रार्थना की कि आप मुझे ऐसा पुत्र प्रदान करें जो सर्वगुण सम्पन्न हो जो तीनों लोकों में आदरणीय हो और आपके अतिरिक्त किसी से पराजित न हो। भगवान तथास्तु कह कर विदा हो गये। कुछ समय पश्चात रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया जो कार्तवीर्य अर्जुन के नाम से जाना गया। कालान्तर में यह बालक अत्यंत पराक्रमी राजा हुआ जिसने रावण को भी बंदी बना लिया था। ऐसा कहते हैं कि सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को पुरुषोत्तमी एकादशी के व्रत की कथा सुनाकर इसके माहात्म्य से अवगत करवाया था।