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पत्नी हो या प्रेमिका दोनों की नाराजगी दूर कर देगा यह छोटा सा उपाय

पत्नी हो या प्रेमिका दोनों की नाराजगी दूर कर देगा यह छोटा सा उपाय
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भोपाल

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Shyam Kishor

Nov 24, 2018

how to get love

पत्नी हो या प्रेमिका दोनों की नाराजगी दूर कर देगा यह छोटा सा उपाय

कहा जाता है कि पति-पत्नी हो या प्रेमी-प्रेमिका के बीच लड़ाई झगड़ा, रूठना या नाराज होना आम बात होती है लेकिन कभी कभी ये इस हद तक बढ़ की इनके कारण रिश्तों में हमेशा के लिए दरारे पढ़ने की स्थिति बन जाती है । पति पत्नी में तो तलाक तक की नौबत आ जाती है । प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे का साथ जीवन भर निभाने की कसमें खाने के बाद भी किसी एक की जरा सी गलती के कारण सदैव के लिए दूर हो जाते है । अगर किसी की नाराज या रूठी हुई पत्नी या प्रेमिका से लाख कोशिशों के बावजूद भी रिस्ते ठीक नहीं हो पा रहे हो तो एक बार इस छोटे से उपाय को आजमाकर जरूर देखें । ज्योतिष की माने तो इस उपाय से सप्ताह भर में बिखरे रिस्ते फिर से मधुर एवं एक हो जाते है ।


किसी भी प्रकार के सुख सुविधा, धन, प्यार, सम्मान का अभाव न होते हुए, फिर भी बिना कारण के छोटी-छोटी बातों में अगर पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका के संबंध में मन मुटाव या बिखराव की स्थिति बन रही हो तो बिना देर किये आज ही नीचे दिये इस विशेष मंत्र का जप दोनों में से कोई एक जो रिस्ते को टूटने से बचाना चाहता हो जरूर करें, इसका चमत्कार इतना जबरदस्त होता है कि एक सप्ताह में ही सब कुछ अपने आप ठी होने लगता हैं । पत्नी या प्रेमिका सारे लड़ाई झगड़े भूलकर हमेशा के लिए प्यार व शांति पूर्वक जीवन व्यतित करते हैं ।

इस उपाय को किसी भी दिन किया जा सकता हैं-
जिस दिन इसे करना हो उस दिन सुबह 4 बजे स्नान करके घर के पूजा स्थल में सिंदूरी रंग के आसन पर बैठकर, सबसे पहले घी की एक दीपक दो बत्ती का जलायें, माँ दूर्गा के चित्र पर लाल फुलों की माला अर्पित करें, उनके चरणों में भी लाल फूल छोड़े, चंदन की सुंगधित धुप के भी जलाकर मां दुर्गा का आवाहन कर पंचोपचार पूजन करें । अब पूजन के बाद स्फटिक की माला से रोज 5 दिन तक 108 बार मंत्र प्रतिदिन जप करें । ऐसा करने से सिर्फ सप्ताह में ही लाभ दिखने लगेगा ।

इस मंत्र का जप करें

।। धं धिं धुम धुर्जते पत्नी वां वीं बूम वाग्धिश्वरि ।।
।। क्रं क्रीं क्रूं कालिका देवी शं षीम शूं में शुभम कुरु ॥


प्रतिदिन 5 दिन तक उस माला से जप करने के बाद किसी पवित्र बहती हुई नदी के जल में प्रवाहित कर दें ।
ध्यान रहे जप करते समय पूर्णतः मौन रहे ।