
ma mahakali
दस महाविद्याओं में प्रथम मां महाकाली की जयंती इस बार 24 अगस्त को मनाई जाएगी। इनका जन्म मधु और कैटभ के नाश के लिए हुआ था। तांत्रिक मतानुसार आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन ‘काली जयंती’ बताई गई है। परन्तु श्रद्धालुजन जन्माष्टमी की रात को ही आद्या महाकाली जयंती मनाते हैं।
दस महाविद्याओं में प्रथमा है महाकाली
दस महाविद्याओं में सर्वप्रथम एवं समस्त देवताओं द्वारा पूजनीय भगवती महाकाली अनंत सिद्धियों को प्रदान करने वाली है। यूं तो इन्हें आद्या तथा साक्षात प्रकृति ही कहा जाता है परन्तु कालिकापुराण में महाकाली से जुड़ी एक कथा के अनुसार महामाया को ही मां काली बताया गया है।
कथा कुछ इस प्रकार है कि एक बार हिमालय पर मतंग मुनि के आश्रम में जाकर देवों ने महामाया की स्तुति की। स्तुति से प्रसन्न होकर मतंग-वनिता के रूप में भगवती ने देवताओं को दर्शन दिए और पूछा, “तुम लोग किसकी स्तुति कर रहे हो?” उसी समय देवी के शरीर से काले पर्वत के समान वर्ण वाली एक और दिव्य नारी का प्राकट्य हुआ। उस महातेजस्विनी ने स्वयं ही देवों की ओर से उत्तर दिया,”ये लोग मेरा ही स्तवन कर रहे हैं।” वे काजल के समान कृष्णा थीं, इसीलिए उनका नाम काली पड़ा।
ऐसा है मां काली का स्वरूप
मां काली के चार हाथ हैं। एक हाथ में तलवार, एक हाथ में राक्षस का सिर। बाकी दो हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए है। मां के पास कान की बाली के लिए दो मृत सिर हैं। गर्दन में 52 खोपड़ी का एक हार, और दानव के हाथों से बना वस्त्र है। उनकी जीभ मुंह से बाहर रहती है, उनकी आंखे लाल रहती हैं। उनके चेहरे और स्तनों पर खून लगा रहता है।
मां महाकाली का ध्यान मंत्र इस प्रकार है-
खड्गं चक्रगदेषुचाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिरः शङ्खं संदधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वाङ्ग-भूषावृताम्।
नीलाश्मद्युतिमास्य-पाददशकां सेवे महाकालिकां यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्॥
अर्थात् भगवान् विष्णु के सो जाने पर मधु-कैटभ को मारने के लिये कमलजन्मा ब्रह्माजी ने जिनका स्तवन किया था, उन महाकाली देवी का मैं सेवन (स्मरण) करता हूँ। वे अपने दस हाथों में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डि, मस्तक और शंख धारण करती हैं। उनके तीन नेत्र हैं। वे समस्त अंगों में दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं। उनके शरीर की कान्ति नीलमणि के समान है और वे दस मुख एवं दस पैरों से युक्त हैं।
काली जयंती पर इन मंत्रों से करें मां का पूजन
शिव की ही भांति मां काली भी सरल ह्रदय वाली है और जल्दी ही अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाती है। इनकी प्रसन्नता पाने के लिए कई मंत्र बताए गए हैं। उन मंत्रों में तंत्र-मंत्र का पूरा विधि-विधान करना होता है, साथ ही गुरु की देखरेख में करना आवश्यक होता है। परन्तु शास्त्रों में कुछ ऐसे भी मंत्र हैं जिनमें किसी भारी-भरकम विधान की आवश्यकता नहीं है, केवल उन मंत्रों के जाप से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है। मंत्र इस प्रकार हैः
काली काली महाकाली कालिके परमेश्वरी सर्वानन्द प्रदे देवि नारायणि नमोस्तुते
इसके अतिरिक्त आप काली गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। यह निम्न प्रकार है-
कालिकायै च विद्महे श्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो अघोरा प्रचोदयात्


Published on:
23 Aug 2016 01:27 pm
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