
नई दिल्ली। सारे संसार का ज्ञान एक तरफ और मां की सीख एक तरफ। आपको ज्ञात होगा हनुमंत अपनी माता अंजनी को बहुत मानते थे। वे उनकी हर आज्ञा को पूरा करते और उनके मार्गदर्शन से ही हर कार्य किया करते थे। चरित्रवान हनुमान के चरित्र निर्माण में अंजनी माता का बहुत बड़ा योगदान था। माना जाता है कि बचपन में हनुमान ने माता से एक सवाल पूछा कि मां मैं बड़ा होकर क्या बनूंगा? तब मां अंजनी ने उत्तर देते हुए कहा तुम्हें संसार में अवश्य ही किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए भेजा गया है। इसपर हनुमान ने पुछा के वह क्या कार्य है? तब माता उत्तर देती हैं कि वो तो समय आने पर पाता चलेगा लेकिन अगर तुम इन 4 बातों को दिमाग में बैठा लोगे तो तुम अपने उद्देश्य में अवश्य सफल होगे।
रामायण से सिर्फ हमें धर्म का ज्ञान ही नहीं मिलता बल्कि उसमें कई सीख वर्णित हैं जिसे अपनाने से सफलता हमारे पक्ष में रहेगी। कुछ सीख ऐसी हैं जिसे अगर हम अपना लें तो जीवन में सफलता और खुशियां हमारे कदम चूमेंगी। जानिए अंजना माता के सिखाई हुई वे चार बातें...
माता का हनुमान को पहला ज्ञान, अपने लक्ष्य को कभी मत बिसराना...
माता अंजनी ने हनुमान को बताया कि पुत्र कभी भी अपने लक्ष्य को मत भूलना। यह एक वचन अगर हम अपने जीवन में अपना लें, तो कई तरह की दुविधाओं से बच सकते हैं। अगर हमारा ध्यान पूरी तरह से लक्ष्य पर रहेगा तो किसी भी बड़े संकट से हम लड़कर आगे बढ़ सकते हैं।
दूसरी सीख, समय का सदुपयोग
अक्सर हम अपने समय का दुरुपयोग करते हैं और अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। जैसे काम के समय में कई बार काम को छोड़कर दूसरे प्रलोभन में लग जाना। जो के कदाचित ठीक हैं है। अपने समय का सदुपयोग करें नहीं तो बाद का जीवन कष्टकारी होगा।
तीसरी शिक्षा, सेवा का अवसर
मां अंजनी ने हनुमान को जो चौथा ज्ञान दिया जो है सेवा करना। आज के संदर्भ में हम इसे किसी की सहायता करने से जोड़ सकते हैं। जहां मां अंजनी ने हनुमान सिखाया था कि सेवा का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहिए, वहीं आज के संदर्भ में हम इसे इस प्रकार कह सकते हैं कि अगर किसी को मदद की आवश्यकता ही तो ज़रूर उसकी सहायता करनी चाहिए मन प्रसन्न रहता है।
अंजनी माता की चौथी और आखरी सीख, हमुमंत... "ऊर्जा का दुरुपयोग मत करना"
यह गलती आज हर कोई करता है। आप, मैं और कई सारे लोग ऐसी जगह अपनी उर्जा लगा देते हैं जहां कोई आवश्यकता ही नहीं है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपको ऊर्जा का सही उपयोग कहाँ करना है। बेकार की बातों या कामों में अपनी सारी उर्जा ख़राब ना करें और ना दूसरों की करें।
Published on:
12 Dec 2017 10:38 am
बड़ी खबरें
View Allधर्म-कर्म
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
