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Amavasya Ekadashi Bhajan : अमावस्या और एकादशी पर कौनसे भजन सुनने चाहिए?

Amavasya Ekadashi Bhajan : अमावस्या और एकादशी के दिन कौन से भजन सुनना सही रहता है? लोग अक्सर ये सवाल पूछते हैं, तो चलिए, इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jan 15, 2026

Amavasya Ekadashi Bhajan

Amavasya Ekadashi Bhajan : अमावस्या और एकादशी के पावन भजन | विष्णु शिव भजन | पितृ शांति भजन (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Amavasya Ekadashi Bhajan : अमावस्या और एकादशी के पावन भजन | विष्णु शिव भजन | पितृ शांति भजन : अमावस्या की सुबह भगवान विष्णु का भजन सुनना अच्छा माना जाता है। कहते हैं, अगर मन से सुनो तो दुख–संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं। इस दिन पितरों को समर्पित भजन भी ज़रूर सुनें। जैसे "छोटी छोटी सी लड़ियां हीरा स जड़ी, पूर्वज आप आओ तो आनंद की घड़ी", या "तांबे की हांडी में ताता सा पानी, पूर्वज आप न्हाओ तो आनंद की घड़ी"। इन भजनों में अपने पूर्वजों के लिए प्यार और सम्मान झलकता है। साथ ही, भगवान शिव या विष्णु के भजन जैसे "रोम रोम तेरा खिल जाएगा, शिव शंकर जब मिल जाएगा" भी सुने जाते हैं। सोमवती अमावस्या पर खास तौर पर शिव भजन ज़्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि इस दिन शिव की पूजा और पितरों की शांति के लिए तर्पण किया जाता है।

अगर अमावस्या के भजन सुनने का मतलब समझना चाहें तो—

पहली बात, इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद जीवन में आता है।
दूसरी बात, ये भजन सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, खासकर अमावस्या जैसे दिन जब माहौल थोड़ा भारी-सा लगता है।
तीसरी बात, शिव भजन सुनने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसती है।

अब बात करते हैं एकादशी की

एकादशी के दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के भजन सुनते हैं। जैसे "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", "विष्णु सहस्त्रनाम", "लक्ष्मी चालीसा", "हरे कृष्णा हरे रामा", "जग में सुन्दर है दो नाम" वगैरह। इन भजनों को सुनने से मन शांत होता है, ऊर्जा मिलती है और एकादशी व्रत का फल भी मिलता है।

कुछ खास भजनों के उदाहरण:

  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" — ये विष्णु जी का मंत्र है, एकादशी पर इसका जाप बहुत फलदायी माना जाता है।
  • "विष्णु सहस्त्रनाम" — इसमें विष्णु के हजार नाम हैं, सुनो या पढ़ो, दोनों से पुण्य मिलता है।
  • "लक्ष्मी चालीसा" — माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए।
  • "जग में सुन्दर है दो नाम, हरि नाम, राम नाम…" — ये सुनते ही मन हल्का हो जाता है।

अगर आपको भजन खोजने हैं, तो YouTube या इंटरनेट पर "एकादशी भजन", "विष्णु भजन" या "ग्यारस माता भजन" टाइप कर सकते हैं। आपको कई अच्छे भजन, व्रत कथाएं और लिरिक्स मिल जाएंगे।

ग्यारस यानी एकादशी के दिन कुछ चलन में रहने वाले भजनों के बोल भी सुनने को मिलते हैं, जैसे -

"ग्यारस मैया तो लगावे बेड़ा पार व्रत बड़ा ग्यारस का",
"मनै ग्यास का कीर्तन कराया सखियों",
"भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरी ग्यारस है",
"तेरे पे रखा सच्चा ध्यान मेरी ग्यारस माता" वगैरह।

इन भजनों को गाकर या सुनकर लोग ग्यारस माता को खुश करते हैं, उनसे आशीर्वाद मांगते हैं और अपने व्रत को सफल मानते हैं। कुल मिलाकर, अमावस्या और एकादशी दोनों ही दिन भजन के लिए खास हैं। भजन सुनो, मन लगाओ और अपने जीवन में शांति, सकारात्मकता और पितरों का आशीर्वाद पाओ।