
मनचाहे वरदान की इच्छा हैं तो, जप करे इन 5 मंत्रों का
अगर आप किसी समस्या में है और आपकी समस्या दूर नही हो रही तो पूर्णिमा, गुरुवार या अन्य किसी शुभ पर्व त्यौहार के दिन ब्राह्म मुहूर्त में स्नान करके गुरू के रूप में भगवान बृहस्पति के इन पांच विशिष्ठ मंत्रों का जप तुलसी की माला से ग्यारह ग्यारह सौ सभी मंत्रों का जप ऊन के सफेद आसन पर बैठक कर, अपनी मनोकामनां पूर्ति का स्मरण करते हुए करें । श्री गुरूदेव बृहस्पति भगवान की कृपा से सभी इच्छायें पूरी होगी ।
गुरू बृहस्पति
खासकर पूर्णिमा और गुरुवार के दिन गुरू की पूजा का विशेष विधान हैं, जिनकों सभी तैतिस कोटि देवी देवताओं के गुरु की पदवी प्राप्त हैं ऐसे चार हाथों वाले गुरू बृहस्पति जी स्वर्ण मुकुट तथा गले में सुंदर माला धारण करने वाले और पीले वस्त्र पहने हुए कमल आसन पर आसीन रहते हैं । इनके चार हाथों में स्वर्ण से बने दण्ड, रुद्राक्ष की माला, पात्र और वरदमुद्रा शोभा पाती है । ऋग्वेद में बताया गया है कि बृहस्पति बहुत सुंदर हैं । ये सोने से बने महल में निवास करते है । इनका वाहन स्वर्ण निर्मित रथ है, जो सूर्य के समान दीप्तिमान है जो सभी सुख सुविधाओं से युक्त हैं, औऱ उस रथ में वायु वेग वाले पीतवर्णी आठ घोड़े सदैव सेवा में तत्पर रहते हैं ।
देव गुरु बृहस्पति पवित्र मंत्र
असुरों ने जब जब ऋषियों और देवताओं के यज्ञों में विघ्न डालकर देवताओं को हराने का प्रयास किया हैं, तब तब उनकी रक्षा के लिए देवगुरु बृहस्पति ने विशेष रक्षोघ्र मंत्रों का प्रयोग कर असुरों का संहार किया है और सदैव करते रहते हैं । ज्ञान के सागर गुरू बृहस्पति देवताओं का पोषण एवं रक्षण हमेशा करते हैं । ऐसे गुरु बृहस्पति की विधि विधान से पूजा करने के बाद उनके इन दिव्य 5 मंत्रों का जप करें । साधक की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं ।
इन 5 मंत्रों का करें जप
1- ऊँ देवानां च ऋषीणां च गुरुं का चनसन्निभम ।
2- ऊँ बुद्धि भूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पितम ।
3- ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम: ।
4- ऊँ बृं बृहस्पतये नम: ।
5- ऊँ अंशगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीव: प्रचोदयात्।
Published on:
07 Jun 2018 05:50 pm
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