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Narmada Jayanti 2025: कब है नर्मदा जयंती, जानिए महात्म्य और पूजा विधि

Narmada Jayanti 2025: नर्मदा जयंती पर मां नर्मदा की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर होता है।

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जयपुर

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Sachin Kumar

Feb 03, 2025

Narmada Jayanti 2025

नर्मदा जयंती 2025

Narmada Jayanti 2025: नर्मदा नदी भारत की सात प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है। हिंदू धर्म में गंगा के समान पवित्र माना जाता है। इसका उद्गम मध्यप्रदेश के अमरकण्टक से हुआ है।

नर्मदा के प्राकट्य होने के बाद से हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष नर्मदा जयंती 4 फरवरी 2025 मंगलवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इसका महत्व और पूजा विधि

नर्मदा का धार्मिक महत्व

हिंदू ग्रंथों के अनुसार नर्मदा भगवान शिव के आशीर्वाद से जन्मी है। स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।

गंगा के समान पवित्र

मान्यता है कि जो पुण्य गंगा में स्नान से प्राप्त होता है, वही केवल नर्मदा दर्शन से ही मिल जाता है। इसलिए इसे देखनें मात्र से पावन करने वाली नदी कहा जाता है।

ओंकारेश्वर और महेश्वर के समीप बहती है

नर्मदा नदी के किनारे कई प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जिनमें ओंकारेश्वर, महेश्वर, अमरकंटक और होशंगाबाद प्रमुख हैं। ये स्थान शिव भक्ति के केंद्र हैं।

नर्मदा परिक्रमा

नर्मदा की परिक्रमा करना एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान है। बहुत से श्रद्धालु मां नर्मदा की पद यात्रा करते हैं, जो कई महीनों में पूरी होती है। इसे करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग

नर्मदा के तट से प्राप्त शिवलिंगों को नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। मान्यता है कि ये स्वयं प्रकट होते हैं और बिना किसी विशेष प्रक्रिया के पूजनीय होते हैं।

नर्मदा पूजा विधि

  • नर्मदा जल लेकर भगवान शिव या किसी देवी-देवता पर अर्पण करें।
  • स्नान करते समय "ॐ नमः शिवाय" या "नर्मदे हर" मंत्र का जाप करें।

नर्मदा जल का प्रयोग

    • नर्मदा का जल घर में रखना शुभ माना जाता है।
    • इसका उपयोग अभिषेक, हवन और अन्य धार्मिक कार्यों में किया जाता है।

    दीप दान

      • संध्या के समय नर्मदा तट पर दीपदान करना शुभ होता है।
      • इससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पितरों को शांति मिलती है।

      नर्मदा अष्टक या नर्मदा स्तोत्र का पाठ

        • विशेष रूप से नर्मदा अष्टक और नर्मदा चालीसा का पाठ करने से सुख-समृद्धि मिलती है।

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        डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियां पूर्णतया सत्य हैं या सटीक हैं, इसका www.patrika.com दावा नहीं करता है। इन्हें अपनाने या इसको लेकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।