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भौतिक सुखों पर विजय पाने वाले ही विजेता-आचार्य वर्धमान सागर

11 मुमुक्षु सांसारिक से बने मुनिसंपन्न हुआ दीक्षा महोत्सव

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भौतिक सुखों पर विजय पाने वाले ही विजेता-आचार्य वर्धमान सागर

भौतिक सुखों पर विजय पाने वाले ही विजेता-आचार्य वर्धमान सागर

बेेंगलूरु. श्रावक के तीन मनोरथों में संसार त्यागकर संयम को अपनाना अति महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि उस मनोरथ के पूर्ण होने पर ही आत्मोत्थान का मार्ग खुलता है। परंतु जब एक साथ 11 मुमुक्षुओं को अपनी नजरों के सामने और स्वयं की उपस्थिति में संयम के मार्ग को अपनाते हुए देखते हैं तो मन हर्ष और उल्लास से कुलांचे मारने लगता है। कुछ ऐसा ही घटित हुआ बेंगलूरु के बुल टेंपल रोड स्थित उदया ग्राउंड में, जहां सुबह 7 बजे से उत्साहित लोगों ने संयम अपनाने जा रहे भाग्यशालियों के उन पलों को आत्मसात किया। संपूर्ण पांडाल स्थल जयकारों से गुंजायमान हो उठा जब आचार्य वर्धमानसागर एवं दीक्षा प्रदाता आचार्य नररत्न सूरीश्वर ने सभी मुमुक्षुओं को रजोहरण प्रदान कर दीक्षा अंगीकार करवाई।

ऋषभ सिद्धि दीक्षा समिति के प्रवीण चौहान ने बताया कि यह बेंगलूरु समाज का पुण्योदय है कि यहां पर प्रथम बार एक साथ 11 दीक्षा देखने का मौका मिला। पुरुष-महिला दोनों वर्गों के दीक्षा निमित्त मेहंदी, सांझी, गीत-संगीत व भक्ति-भावना इत्यादि कार्यक्रमों में महिलाओं-बच्चों से लेकर युवाओं ने उत्साह से भाग लिया। दीक्षार्थियों को रजोहरण देकर दीक्षा प्रदान करने के पश्चात धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य नररत्न सूरीश्वर एवं आचार्य वर्धमानसागर ने कहा कि भौतिक सुखों पर विजय पाने वाले ही वास्तव में विजेता कहलाते हंै। दुनिया को जीतने वालों को लोग ज्यादा दिनों तक याद नहीं रख पाते अपितु आत्मा पर विजय पाने वालों को न केवल युगों-युगों तक याद किया जाता है अपितु उनका अनुसरण भी किया जाता है। दीक्षा महोत्सव का गवाह बनने आए श्रद्धालुओं ने अपने भाव प्रकट किए। एक साथ इतनी दीक्षाओं के दृश्य देख आमजन श्रद्धा से झुक गया। समिति के प्रकाश पिरगल ने बताया कि आचार्य ने नवदीक्षितों का नामकरण किया। नवदीक्षित अल्पेश को अन्वयरत्न विजय, किरतेश को कर्तव्यरत्न विजय, संयम को सम्यगरत्न विजय, धैर्य को भाग्यरत्न विजय, तत्व को तारकरत्न विजय, कल्प को कदंबरत्न विजय, तत्व को त्रिलोकरत्न विजय, हेतलबेन को हितस्तवाश्री, विरतिबेन को विरस्तवाश्री, अश्वनीबेन को आगमस्तवाश्री एवं देशवाबेन को चैत्यस्तवाश्री नाम दिया गया।
दीक्षा समिति के इंदर नाहर ने बताया कि दीक्षा के छह दिवसीय कार्यक्रमों के दौरान चिकपेट विधायक उदय बी. गरुड़ाचार व चामराजपेट विधायक जमीर अहमद का सहयोग रहा।
दीक्षा समिति के हीराचंद कोठारी, चंद्रकुमार संघवी एवं विनोद भंडारी ने बताया कि आचार्य ने गणीवर्य कृपारत्न विजय को पन्यास प्रवर की घोषणा की। वित्तीय समिति के किशोरकुमार एवं ताराचंद राठौड़ ने बताया कि राजस्थान मूर्तिपूजक संघ जयनगर ने आगामी उपधान तप की विनती रखी तथा अनेकों संघों ने आगामी चातुर्मास के लिए अपना अनुरोध व विनती रखी। दीक्षा के संपूर्ण कार्यक्रमों में आदिनाथ जैन श्वेतांबर संघ चिकपेट द्वारा संचालित संभवनाथ जैन मंदिर वीवी पुरम द्वारा प्रांगण उपलब्ध कराने, बहुमान समिति के दुर्लभचंद खांटेड़ व रितेश भंडारी, आवास-निवास समिति के संतोष परमार, प्रदीप जैन व चंद्रकांत तातेड़ के साथ बेंगलूरु के अनेकों संघों, महिला व युवा मंडलों का सहयोग रहा। सिद्धार्थ बोहरा व सुशील तलेसरा ने दीक्षा समिति के साथ जुडक़र छह दिवसीय कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान किया।