
पांडवों ने भी किए थे इस मूर्ति के दर्शन तब बने थे उनके काम,यहां पढ़े पूरी खबर
जब कौरवों ने पांचों पांडवों को जुआ में जीत लिया था, पराजित होने पर पांडवों को बारह वर्ष जंगल में तथा तेरहवाँ वर्ष अज्ञातवास में बिताना था । पांडवों के जीवन में अज्ञातवास का समय बड़ा ही महत्वपूर्ण था, इस अवधी में उन्हें अपनी असली पहचान छुपाकर रहना पड़ा था क्योंकि पांडवों के पहचाने जाने की आशंका थी, इसीलिए उन्होंने अपना नाम और पहचान छुपा कर रखना था । इसी बीच वे भगवान की इस मूर्ति के दर्शन करने गये थे, जिनकी कृपा से उनके काम बन गये थे ।
उड़िसा में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में शामिल है । जगन्नाथ मंदिर, सनातन धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है । उड़िसा के पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण जी को समर्पित है । यह उड़िसा के सबसे बड़े और देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है । हिन्दू शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण जी की नगरी जगन्नाथपुरी या पुरी बताई गयी है । पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा इंद्रघुम्न भगवान जगन्नाथ को शबर राजा से यहां लेकर आये थे । 65 मीटर ऊंचे मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में चोलगंगदेव तथा अनंगभीमदेव ने कराया था। भारत में हिन्दू धर्म के लोगों के बीच यह एक प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण धर्मोत्सव के रूप मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के अवतार 'जगन्नाथ' की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर बताया गया है।
अज्ञातवास के दौरान सभी पांडवों पुरी के भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने भी गये थे, कहा जाता हैं कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से ही उनका अज्ञात वास बिना किसी बाधा के पूर्ण हुआ था । जब पांडव अज्ञातवास के समय जगन्नाथ जी के दर्शन करने आए थे तब से ही मंदिर के अंदर पांडवों का स्थान अब भी मौजूद है । कहा जाता हैं कि जब भगवान जगन्नाथ चंदन यात्रा करते हैं तो पांच पांडव भी उनके साथ नरेन्द्र सरोवर आज भी जाते हैं ।
कहते हैं कि ईसा मसीह सिल्क रूट से होते हुए जब कश्मीर आए थे तब बेथलेहम जाते वक्त उन्होंने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए थे ।
Published on:
05 Jul 2018 05:05 pm
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