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Paush Purnima 2023: पौष पूर्णिमा पर दें सूर्य को अर्घ्य, जान लें डेट

सूर्य आराधना के पर्व पौष की पूर्णिमा यानी Paush Purnima 2023 से ही प्रयागराज में आध्यात्मिक मेला अपनी रंगत में आ जाएगा। इसके बाद सात जनवरी से शुरू हो रहे प्रयागराज के आध्यात्मिक माघ मेले (Spritual Magh Mela Prayagraj) में एक माह तक श्रद्धालु गृहस्थ जीवन कि चिंताओं से दूर गंगा नदी किनारे बसेरा कर कल्पवास करेंगे (Kalpvas Prayagraj) और भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे और पूजा पाठ करेंगे।
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Shailendra Tiwari

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Updated: 4 Jan 2023, 12:00 PM IST

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पौष पूर्णिमा 2023

Paush Purnima Date 2023: साल की पहली पूर्णिमा (Paush Purnima 2023) 6 जनवरी शुक्रवार को पड़ रही है। पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण आकार का होता है, वहीं पौष माह भगवान सूर्य की पूजा का माह है। इसलिए Paush Purnima 2023 पर स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा मनोकामना पूर्ण करता है। पौष पूर्णिमा की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।


Paush Purnima Subh Muhurt: पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा 6 जनवरी 2023 को सुबह 5.44 बजे से लग रही है, और यह तिथि 7 जनवरी को सुबह 8.07 बजे संपन्न हो रही है। पौष पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, यह योग शनिवार रात 12.14 बजे से सुबह 7.15 तक है।

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Paush Purnima Puja Vidhi: प्रयागराज के आचार्य प्रदीप पाण्डेय का कहना है कि इस दिन इस विधि पूजा अर्चना करनी चाहिए।
1. सुबह जल्दी उठें और व्रत का संकल्प लें।
2. पवित्र नदी में स्नान के बाद भगवान भास्कर को अर्घ्य दें। स्नान से पहले वरूण देव को नमस्कार करें।

3. स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें।
4. इसके बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

5. कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान भी शुभ माना जाता है।

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Paush Purnima Mahatv: चूंकि पौष पूर्णिमा सूर्य देव का माह है और इसी दिन चंद्रमा पूर्ण आकार का होता है। इस तरह इसी दिन सूर्य चंद्र का अद्भुत संगम होता है। पौष पूर्णिमा से ही प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत हो जाती है, जहां हर साल गंगा किनारे एक आध्यात्मिक नगर बसता है। लोग गंगा घाट किनारे रहकर पूजा-पाठ करते हैं। सुबह-सुबह गंगा स्नान करते हैं, भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं और पूजा पाठ दान पुण्य करते हैं। पूरा दिन पूजा पाठ में ध्यान लगाते हैं। पूरे एक महीने यानी Magh Purnima तक पवित्र नदी में स्नान ध्यान होता है। पौष पूर्णिमा पर दशाश्वमेध घाट वाराणसी और संगम प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है।