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खुद को पहचानना ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य

जैनाचार्य जीतरत्नसागर सूरीश्वर ने कहा कि अपने आपको जानना पहचानना और पाना ही मानवजीवन का चरम और परम लक्ष्य है। मानव जन्म पाकर जो व्याकि अपने निर्धारित लक्ष्य पर नहीं चलता है वह मानव जन्म हार जाता है। हमें बड़े भाग्य से मानव जन्म की प्राप्ति हुई है इसे व्यर्थ गवाने से फिर पछताना पड़ता है।

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जैनाचार्य जीतरत्नसागर सूरीश्वर ने कहा

वरघोड़े के साथ बंधु युगल ने किया चातुर्मास मंगल प्रवेश

श्रावक-श्राविकाओं ने श्रध्दा-भक्ति के साथ किया स्वागत

हुब्बल्ली. जैनाचार्य जीतरत्नसागर सूरीश्वर ने कहा कि अपने आपको जानना पहचानना और पाना ही मानवजीवन का चरम और परम लक्ष्य है। मानव जन्म पाकर जो व्याकि अपने निर्धारित लक्ष्य पर नहीं चलता है वह मानव जन्म हार जाता है। हमें बड़े भाग्य से मानव जन्म की प्राप्ति हुई है इसे व्यर्थ गवाने से फिर पछताना पड़ता है।
वे मंगलवार को शहर के कंचगार गालि स्थित श्री मरुधर शांति भवन में श्री जैन मरुधर संघ के तत्वावधान में चातुर्मास प्रवेश कर आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हम सह्याद्री की गिरिमाला को लांघते हुए लंबा रास्ता तय कर हुब्बल्ली आए हैं। हमारा लक्ष्य आपको सीखाना नहीं बल्कि आपको जगाना है। यह वर्षावास जागरण का शंखनाद है। आज व्यक्ति कुम्भकरणीय निद्रा में सोया हुआ है। जो सोता है वह खोता है और जो जागना है वह पाता है।

आचार्य ने कहा कि संत और संतरी का एक ही काम है। संतरी बुर्ज पर बैठकर जागते रहो की पुकार करता है ठीक वैसे ही सन्त भी प्रवचनपीठ पर बैठकर मानवमात्र को जागने का आव्हान करता है।
आचार्य के प्रवेश पर उज्जैन, इन्दौर, उन्हैल, मुंबई, पुणे, सालमगढ़ आदि कई शहरों से श्रावक-श्राविकाएं आए हैं। स्थानीय समाजजनों ने सभी अतिथियों का शाल श्रीफल से स्वागत किया। आचार्य श्री का गुरुपूजन एवं शाल ओढाकर बहुमान किया गया।
समाज के अध्यक्ष एवं सचीव ने कहा कि प्रतिदिन प्रात: 09.15 बजे प्रवचन होगा।

वरघोड़े के साथ बंधु युगल ने किया चातुर्मास मंगल प्रवेश

बंधु युगल आचार्य जीतरत्नसागर सूरीश्वर, चंद्ररत्न सागर सूरीश्वर आदि ठाणा और साध्वी भव्यपूर्णाश्री आदि ठाणा ने मंगलवार सुबह वरघोड़े के साथ चातुर्मास मंगल प्रवेश किया।
श्री जैन मरुधर संघ की ओर से गाजे-बाजे के साथ शहर के महावीर गली स्थित शांतिनाथ भवन से तुलझा भवानी, म्यादार ओनी, ब्राड वे, दुर्गद बयलु सर्कल, बेलगावी गली से कंचगर गली श्री मरुधर शांतिनाथ भवन तक वरघोड़े के साथ संतों का स्वागत किया।

जीतरत्नसागर सूरीश्वर के आगमन से जैन समाज में हर्ष और उल्लास का वातावरण छा गया। प्रात: से ही राजमार्गो पर जैन समाज के युवा-युननिया एवं श्रावक श्राविकाओ की चहल-पहल नजर आ रही थी।
जैनाचार्य के दिगंबर मंदिर पधारते ही समाजजनों ने आपका भव्य स्वागत किया एवं प्रवेश यात्रा प्रारंभ हुई।
इस अवसर पर श्री जैन मरुधर संघ के सभी पदाधिकारी, ट्रस्टी समेत, राज्य व देश के विभिन्न शहरों से आए श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।