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फैक्ट्री में बाल मजदूरी करते मिले 27 बच्चे, मालिक कराता था 15 घंटे काम

बाल श्रम की रोकथाम के लिए गठित टास्क फोर्स कमेटी के निर्देशन में बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, प्रयत्न संस्था एवं कोतवाली पुलिस ने संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को दौना पत्तल की फैक्ट्री पर कार्रवाई की।

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फैक्ट्री में बाल मजदूरी करते मिले 27 बच्चे, मालिक कराता था 15 घंटे काम

फैक्ट्री में बाल मजदूरी करते मिले 27 बच्चे, मालिक कराता था 15 घंटे काम

धौलपुर. बाल श्रम की रोकथाम के लिए गठित टास्क फोर्स कमेटी के निर्देशन में बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, प्रयत्न संस्था एवं कोतवाली पुलिस ने संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को दौना पत्तल की फैक्ट्री पर कार्रवाई की। मौके पर बच्चे बाल श्रम करते मिले। टीम ने 27 बच्चों को रेस्क्यू कराया। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बाल समिति के अध्यक्ष रवि पचौरी ने बताया कि गुम्मट चौकी के पास गोस्वामी ट्रेडर्स के नाम से एक दौना पत्तल की फैक्ट्री है। सूचना पर जब फैक्ट्री में कार्रवाई की गई तो 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग 15 बालिका एवं 12 बालक मजदूरी करते मिले। जिन्हें टीम ने रेस्क्यू किया। साथ ही पुलिस ने उक्त फेक्ट्री मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। उधर, रेरक्यू कराए बच्चों को उनके अभिभावकों की तरफ से भविष्य में बालश्रम नहीं कराने और शपथ पत्र देने के बाद उन्हें सुपुर्द कर दिया। कार्रवाई के दौरान बाल कल्याण समिति अध्यक्ष, राजेन्द्र मय पुलिस जाब्ता, चाइल्ड लाइन के समन्वयक सरनाम सिंह, संस्था के राकेश कुमार आदि शामिल थे।

मजदूरी में मिलते मात्र 50 रुपए

एनजीओ के एड्वोकेसी ऑफिसर राकेश कुमार तिवाड़ी ने बताया कि रेस्क्यू किए बच्चों ने बताया कि फैक्ट्री मालिक उनसे सुबह 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक कार्य कराता था। एक कट्टा दौना पत्तल बनाने के बाद 50 रुपए मजदूरी मिलती थी। किसी तरह कोई गलती होने फटकार लगाता और खाना भी नहीं मिलता था। फैक्ट्री में रात की शिफ्ट अलग है, जिसमें भी बच्चे आते हैं। आरोप लगाया कि इस बीच बच्चों को घर पर नहीं जाने दिया जाता।

कार्रवाई से मचा हडक़ंप

बाल मजदूरी को लेकर हुई कार्रवाई से अन्य प्रतिष्ठानों के संचालकों में हडक़ंप मच गया। जहां बाल श्रमिक कार्य करते हैं। गौरतलब है कि बाड़ी में दौना पत्तल की कई फैक्ट्री संचालित हैं। जहां नियमों को अनदेखा कर कार्य हो रहा है। यहां पर श्रमिकों के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। कुछ समय पहले कुछ फैक्ट्री में आग लग गई थी, जिन पर बमुश्किल काबू पाया जा सका था।

कॉलोनियों में चल रही फैक्ट्रियां

बाड़ी शहर के चारों तरफ कई कालोनियों में दर्जना फैक्ट्रियों में मशीनों से दौना पत्तल बनाए जाते हैं। ये कई सालों से संचालित हैं। इन फैक्ट्रियों में कार्य करने वाले नाबालिक तो है ही इसके साथ-साथ यहां पर नियमों को ताक पर रखा हुआ है। नागरिकों में चर्चा का विषय ये है कि केवल गिनी-चुनी जगह कार्रवाई क्यों, जबकि कई फैक्ट्रियां संचालित हैं। उधर, इन फैक्ट्रियों की जांच नहीं होने से यहां विद्युत चोरी करने के भी आरोप लगते रहे हैं। कार्रवाई नहीं होने से इन फैक्ट्री संचालकों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।

बाल श्रम दंडनीय अपराध

बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के अनुसार बाल श्रम दंडनीय अपराध है। 14 वर्ष से छोटे बच्चों का किसी भी व्यवसाय में नियोजन और 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों का निर्धारित व्यवसायों में और अनुपयुक्त परिस्तिथियों में नियोजन दंडनीय है। किशोर न्याय अधिनियम में ऐसे अपराधों के लिए अपराध की प्रकृति के आधार पर कठोर सजा प्रावधान हैं। जिले में बाल श्रम रोकथाम के लिए पुलिस, श्रम विभागए बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, एनजीओ के प्रतिनिधि टास्क फोर्स के रूप में कार्रवाई करते हैं। बाल कल्याण समिति की ओर से विगत वर्ष में 37 बाल श्रम में लिप्त बच्चो का पुनर्वास किया गया।