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ड्रॉपआउट सर्वे में उदासीनता बरतने वाले शिक्षकों पर होगी कार्रवाई

राजकीय स्कूलों गिरते नामांकन को सुधारने शिक्षा विभाग ने इस सत्र 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभी तक विभाग इस लक्ष्य से कोसों दूर है। जिस कारण घर-घर जाकर ड्रापआउट बच्चों का सर्वे कर उन्हें शिक्षा से जोडऩे में उदासीनता बरतने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को शिक्षा विभाग नोटिस थमाकर कार्रवाई करने जा रहा है।

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ड्रॉपआउट सर्वे में उदासीनता बरतने वाले शिक्षकों पर होगी कार्रवाई Action will be taken against teachers who show indifference in dropout survey

सर्वे कर बच्चों को शिक्षा से न जोडऩे वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुख पर होगी कार्रवाई

राजकीय स्कूलों में गिरते नामांकन पर शिक्षा निदेशक और सचिव सख्त

विभाग ने इस सत्र 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का रखा लक्ष्य

धौलपुर. राजकीय स्कूलों गिरते नामांकन को सुधारने शिक्षा विभाग ने इस सत्र 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभी तक विभाग इस लक्ष्य से कोसों दूर है। जिस कारण घर-घर जाकर ड्रापआउट बच्चों का सर्वे कर उन्हें शिक्षा से जोडऩे में उदासीनता बरतने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को शिक्षा विभाग नोटिस थमाकर कार्रवाई करने जा रहा है।

राजकीय स्कूलों में प्रति सत्र नामांकन गिरता जा रहा है। स्थिति को सुधारने शिक्षा विभाग कदम भी उठा रहा है, लेकिन शिक्षकों और संस्था प्रमुखों की उदासीनता से यह कदम कारगर साबित नहीं हो पा रहे। जिसको लेकर अब शिक्षा विभाग सख्ती के मूड में आ गया है। शिक्षा निदेशक बीकानेर और शिक्षा सचिव ने सीधे तौर पर ऐसे शिक्षकों को कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जो ड्रॉपआउट बच्चों को सर्वे कर नामांकन बढ़ाने में आना-कानी कर रहे हैं। इसको लेकर जिला शिक्षा विभाग ने भी अब तैयार है। ज्ञात हो कि विभाग ने इस बार राजकीय स्कूलों में 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा था।

24 तक चलेगा सर्वे अभियान

शिक्षा विभाग ने प्रवेशोत्सव को तीन चरणों में बांटा गया था। पहला चरण गर्मी की छुट्टियों के दौरान प्रारंभ हुआ था, लेकिन भारत-पाक तनाव के चलते यह अभियान अधूरा रह गया था। जिसके बाद दूसरा चरण 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 24 जुलाई तक चलेगा। इसमें शिक्षकों को ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल तक लाने की भूमिका निभानी थी। इन दो चरणों के बाद तीसरे चरण में शिक्षकों को 25 जुलाई से 10 अपे्रल तक इन बच्चों का नाम समग्र पोर्टल पर चढ़ाना है, लेकिन अभी तक शिक्षकों की उदासीनता स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की दिशा में भारी पड़ रही है। इसी को ध्यान में रख विभाग ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई करने जा रहा है।

इस सत्र 1 लाख 7 हजार नामांकन

राजकीय स्कूलों की दुर्दशा सुधारने इस सत्र शिक्षा विभाग ने स्कूलों में 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन अभी विभाग इससे कोसों दूर है। पिछले सत्र के दौरान राजकीय स्कूलों में 1 लाख 14 हजार 400 बच्चों का नामांकन था। तो इस स्थिति में 10 प्रतिशत के इजाफे के साथ इस सत्र में 11 हजार 500 के आसपास बच्चों का नामांकन बढ़ाने के साथ 1 लाख 25 हजार 900 नामांकन करने थे, लेकिन अभी राजकीय स्कूलों में 21 जुलाई तक 1 लाख 7 हजार ही नामांकन हो पाया है। यानी विभाग लक्ष्य से अभी काफी दूर है।

हर बच्चे को शिक्षा से जोडऩा लक्ष्य

शिक्षा विभाग का ड्रापआउट बच्चों का सर्वे कर उनका नामांकन करना ही लक्ष्य नहीं, अपितु उन्हें शिक्षा से जोडऩा भी विभाग का लक्ष्य है। चाहे वह बच्चा राजकीय स्कूल में पढ़े या निजी स्कूल में। बसर्ते वह जुड़ाव शिक्षा की ओर होना चाहिए। शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट बच्चों के अलावा उन परिवार जेसे घुमत्तू, अद्र्ध घुमत्तू और प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को भी विद्यालय से जोडऩे की योजना बनाई है। जिससे ऐसे बच्चे भी शिक्षा से जुड़ ज्ञान प्राप्त कर सकें।

ऐसे संस्था प्रमुखों को दी जाएगी चेतावनी

शिक्षा विभाग ऐसे संस्था प्रमुखों को भी चेतावनी देगा जिनके यहां से किसी कक्षा में 50 बच्चे उत्तीर्ण होने के बाद अगली कक्षा में केवल 25 बच्चे ही प्रवेश कर पाते हैं और शेष 25 बच्चों का कोई अता-पता नहीं होता। इनमें से कुछ बच्चे घर बैठ जाते हैं तो कोई टीसी कटाकर अन्यंत्र स्कूल चला जाता है, जब इसकी जानकारी लेने पर संस्था प्रधान कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं दे पाते। अब यदि किसी स्कूल में ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो संस्था प्रधान को भी चेतावनी दी जाएगी।

पिछले तीन सालों में नामांकन

2023-24 1 लाख 25 हजार

2024-25 1 लाख 14 हजार

2025-26 1 लाख 7 हजार (21 जुलाई)

- घर-घर सर्वे कर ड्रापआउट बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ते हुए राजकीय स्कूलों का नामांकन बढ़ाने में उदासीनता दिखाने वाले शिक्षकों को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-सुक्खो देवी, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, धौलपुर