
- एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने कार्रवाई ने एजेङ्क्षसयों को चौकाया
- एके ४७ की बरामदगी और फायरिंग रेंज ने खुलासे ने किए सवाल खड़े
dholpur. दशकों तक डकैतों की शरण स्थली रहे चम्बल के बीहड़ एक दफा फिर से सुर्खियों में हैं। इस दफा राजाखेड़ा क्षेत्र के गांव बसई घीयाराम से एके 47 जैसा हथियार मिलना है। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों ने कान खड़े कर दिए हैं। गत 8 मई और फिर 5 जून को एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इलाके में चम्बल नदी के तटवर्ती गांवों में दबिश अवैध भारी मात्रा में हथियार बरामदगी ने चौका दिया। पिता-पुत्र की गिरफ्तारी और तलाशी में मिले एके47 जैसे हथियार की बरामदगी ने बीहड़ में पनप रही गैंगों की हकीकत को खोल कर रख दिया। बीहड़ में कैसे अपराधी पैर पसार रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में खास बात ये रही कि बदमाशों ने हथियार चलाने के लिए खुद की फायरिंग रेंज बना ली और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
अन्तरराज्जीय बदमाशों की बनी शरणस्थलीउक्त घटनाक्रम ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। उधर, एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने गिरफ्तार किए जीतू चंबल और उसके पिता तेजा ठाकुर से प्रारम्भिक पूछताछ में कई वारदातों से तार जुडऩे की खबरें आ रही हैं। जीतू का भाई और हिस्ट्रीशीटर रामदत्त ने जिस तरह से बसई घीयाराम में आश्रय स्थल बना रखा था और बदमाशों को यहां फरारी कटवाने में मदद करने की जानकारी ने भी एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। बदमाशों ने बीहड़ में खुलेआम फायरिंग रेंज खोल हथियारों के प्रशिक्षण देने की जानकारी ने सकते में डाल दिया है।
दो दशक से आतंक का पर्याय बना था चम्बल परिवार
गिरफ्त में आए पिता-पुत्र जीतू चंबल और तेजा ठाकुर का परिवार पिछले दो दशक से क्षेत्र एवं आसपास के राज्यों में आतंक का पर्याय बना हुआ था। पूर्व दस्यु शिवदत्त ठाकुर वर्ष 2002 से ही क्षेत्र में अपराध की दुनिया में कुख्यात रहा था। जो बाद में आनंदपाल के गिरोह में शामिल हो गया। जिसकी मौत के बाद कमान संभाली उसके भाई रामदत्त का आतंक स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश तक फैला था। वर्तमान में उस पर इन राज्यो में हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण जैसे अनेक गंभीर मामले दर्ज हैं। राजाखेड़ा के सबसे बड़े व्यापारियों में शामिल रिखबचंद जैन और उनके पुत्र संजय जैन पर 50 लाख की फिरौती के लिए वर्ष 2014 में दिन दहाड़े भरे बाजार में दुकान पर ही अंधाधुंध फायरिंग कर डर दिखाया और फिर फिरौती का खेल शुरू हो गया।
आखिर पुलिस की भूमिका क्यो रही निराशाजनक
चम्बल परिवार का निवास बसई घीयाराम में होना और लगातार मौजूदगी का रहना, फायरिंग रेंज के बनाना, कथित रूप से ट्रेनिंग देना, अवैध हथियारों की बिक्री का धंधा करना और राजाखेड़ा पुलिस को एक माह पहले तक जानकारी तक न होना सवाल खड़े करता है। जबकि कई राज्यों की पुलिस अपने मुखबिर तंत्र के जरिए उसे तलाश करने में जुटी थी। ये टीमें यहां आती भी रही और स्थानीय पुलिस की मदद भी ली। चुनाव से पहले अनोखे तरीके से हरियाणा पुलिस ने रामदत्त को गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे में इन बदमाशों के कारनामों की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं होना चौका रहा है। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) टीम आती है और पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर एके 47 हथियार को जप्त कर ले जाती है।
बदमाशों को फॉलो करना चिंताजनक
...चंबल इलाके में अवैध हथियारों का चलन बढ़ा है। युवाओं में इसके प्रति आकर्षण है। पूर्व पुलिस अधीक्षक केसर सिंह शेखावत के कार्यकाल में चलाए अभियान में अवैध हथियारों की रेकॉर्ड बरामदगी हुई थी। अब वर्तमान एसपी सुमित मेहरड़ा लगातार अवैध हथियारों को कार्रवाई कर रहे हैं। अच्छी सफलता भी मिली है। चिंताजनक बात ये है कि युवा बदमाशों को फ्लो कर रहे हैं। हाल में पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों को प्रदर्शन करने वालों को गिरफ्तार भी किया है।
Published on:
08 Jun 2025 06:51 pm
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