
बाबूलाल जैन सेवा संस्थान की ओर से आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में भारतीय सैनिकों की बहादुरी भरे कर्तव्य और सर्जिकल स्ट्राइक की गूंज रही।
वीर रस, हास्य और श्रंगार रस के कवियों ने भी वीर रस के छंदों का मिश्रण कर दर्शकों में देशभक्ति का भाव जागृत किया।आशीष अनल ने 'पूरा देश एक ही सवाल में घिरा हुआ था और भागो भागो भैया मोदी आ गया' सुनाकर जमकर तालियां बटोरी।
वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पवन जैन की कविता यह पुलिस क्यों आई ने सामाजिक बदलाव पर जमकर प्रहार किया और 'ओ बम विस्फोट करने वाले भाई हम बेगुनाहों को मारने की बधाई' कविता से आतंकवाद पर लोगों को गहराई से सोचने के लिए मजबूर किया।
हास्य सम्राट संपत सरल की कविता 'भारतीय सेना ने सीमा क्या लांघी भारतीय नेता भी अपनी सारी सीमाएं लांघ गए, मदनमोहन समर की 'थाम तिरंगा करो घोषणा हिंदुस्तान जवान है' और 'शत्रु की साजिश के सम्मुख जब जब दहला देश हमारा' ने युवाओं में जोश भर दिया।
श्रंगार रस की पद्मिनी शर्मा ने 'ढूंढो-ढूंढो रे सांवरिया' और वंदे मातरम गीत से भी तालियां बटोरी। कमलेश शर्मा की 'अगर आहात करें सम्मान को, कविता ने चीनी सामान के क्रेताओं पर गहरी चोट की।
रामबाबू सिकरवार की 'व्यवस्था पर प्रहार जो वतन की खातिर मिटे' और 'चौतरफा गंदगी है कहीं दिखे ना सफाई', डॉ. सर्वेश अस्थाना के 'पाकिस्तान के सैनिक की मां को चि_ी' के साथ केके झा और सोनू शर्मा की कविताओं से श्रोत भोर तक जमे रहे। कवि सम्मेलन में पहली बार कानपुर की शबीना अदीब के सरस्वती वंदना ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल कायम की।
Published on:
17 Oct 2016 03:05 pm
