
Anganwadi news: धौलपुर. जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वितरित हो रहा पोषाहार लाभार्थियों को पसंद नहीं आ रहा है। हाल ये है कि बड़ी संख्या में लोग पोषाहार ले तो रहे हैं तो लेकिन उसे पशु पालकों को सौंप देते हैं। लाभार्थियों का कहना है कि पैकेज्ड बंद पोषाहार का स्वाद अच्छा नहीं है और उसे पकाने पर अलग तरह की महक आती है जो महिला या बच्चों को पसंद नहीं आ रहा। मांगों को शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट पहुंची आंगनबाड़ी की आशा सहयोगनी व महिला कार्यकर्ताओं ने पोषाहार की स्थिति से जिला कलक्टर अनिल कुमार अग्रवाल को अवगत कराया। जिस पर कलक्टर स्वयं चौक गए और बोले- ऐसा हो रहा है क्या? उन्होंने सीडीपीओ भूपेश गर्ग से बात की। उन्होंने जवाब दिया कि पोर्टल पर पोषाहार को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है और पोषाहार लगातार बंट रहा है।
जिला कलक्टर ने सीडीपीओ की बात को आगे रखा तो महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बोली कि आप जांच करा लें, इस पोषाहार को कोई पसंद नहीं कर रहा। जिस पर जिला कलक्टर ने कहा कि स्वाद पसंद नहीं आ रहा। उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं को सीडीपीओ कार्यालय भिजवाया दिया। गौरतलब रहे जिलेभर में कुल 1033 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। इसमें धौलपुर शहर में 60 केन्द्र हैं।
पोषाहार केन्द्र से उठ रहा है, पर स्वाद पसंद नहीं
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों से पोषाहार का वितरण हो रहा है। साथ ही लगातार डिमांड आ रही है। अगर पसंद नहीं आ रहा है तो लाभार्थी को नहीं लेना चाहिए और शिकायत करनी चाहिए। लेकिन इस तरह की कोई शिकायत लाभार्थी की तरफ से नहीं मिली है। केवल स्वाद पसंद नहीं आना बताया जा रहा है। विभागीय अधिकारी का कहना है कि विभाग की ओर से पोशन ट्रेकर भी शुरू किया है जिस पर लगातार रिपोर्ट ली जा रही है। जिससे लगातार निगरानी रखी जा सके।
अनुपूरक पोषण आहार है, बदलता है स्वाद
विभाग का कहना है कि यह पोषाहार अनुपूरक पोषण आहार (सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन) है जो 6 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को दिया जाता है। यह योजना स्वास्थ्य विकास को लेकर चलाई जा रही है। जिससे बच्चों को पूर्ण पोषाहार मिले। जिसमें विशेषकर गरीब बच्चों को पोषाहार मिल सके। यह पोषाहार आंगनबाड़ी केन्द्रों से वितरित किया जाता है। विभाग का कहना है कि यह सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन है, मिनरल की वजह से स्वाद में बदलाव होता है। जैसे मिनरल पानी पीने पर लगता है।
लाभार्थी से नहीं मिली एक भी शिकायत
उधर, पोषाहार पसंद नहीं आने के मामले में विभाग का दावा है कि एक भी लाभार्थी की ओर से शिकायत नहीं मिली है। राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल पर कोई शिकायत नहीं आई है। इसी तरह 181 पर भी कोई शिकायत नहीं आई है, केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से जिला कलक्टर के समक्ष उक्त बात रखी गई थी। जबकि लाभार्थी की ओर से कोई मामला सामने नहीं आया है।
फैक्ट्रियां बंद होने से बांटा था गेहूं व चावल
पोषाहार पसंद नहीं आने के पीछे एक वजह ये है कि कोरोना काल के दौरान प्रदेश भर में पैकेज्ड पोषाहार बंद पड़ा था। उस दौरान फैक्ट्रियां बंद होने की वजह से सप्लाई बाधित थी। कार्यक्रम प्रभावित नहीं हो इस वजह से सरकार ने उस दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों से गेहूं, चावल व दाल वितरित कराया था। लेकिन यह नियमानुसार नहीं थ, केवल विकल्प के तौर पर शुरू किया था। लॉक डाउन खत्म होने और कोरोना का असर समाप्त होने के बाद से पुन: पैकेज्ड पोषाहार वितरण शुरू कर दिया।
सरकार चला रही पूरक पोषाहार कार्यक्रम
आंगनबाड़ी केन्द्रों से बंट रहा पोषाहार मुख्य तौर पर पूरक पोषाहार कार्यक्रम योजना है। जो गर्भवती महिला और दात्री महिलाओं को मिलता है। इसमें तीन साल के बच्चे को वितरण होता है जबकि 3 से 6 साल के उम्र के बच्चे को आंगनबाड़ी केन्द्र पर आना होगा। यहां पर कार्यकर्ता उसे पका कर खिलाती हैं।
- पोषाहार को लेकर किसी भी लाभार्थी की ओर से शिकायत नहीं मिली है। पोषाहार का स्वाद पसंद नहीं आना अलग बात है। ये मिनरल की वजह से होता है। चावल व दाल कोरोना काल में ट्रांसपोर्ट सिस्टम और फैक्ट्रियां बंद होने की वजह से बांटा गया था। अब वापस पैकेज्ड पोषाहार का वितरण हो रहा है। अगर किसी को शिकायत है तो वह संपर्क पोर्टल या कार्यालय में अवगत कराए। लाभार्थी के पोषाहार पशु पालकों को देने जैसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है।
- भूपेश गर्ग, सीडीपीओ, महिला एवं बाल विकास कार्यालय------
- पोषाहार का स्वाद लाभार्थी को पसंद नहीं आ रहा है। वह ले तो रहे हैं लेकिन इसको आसपास के पशु पालकों को दे जाते हैं। कहना है कि खाने में कोई स्वाद नहीं है।
- सुनीता, आशा सहयोगनी, नगला दरवेस (बसेड़ी) केन्द्र
- पोषाहार को लेकर लगातार लाभार्थी नाखुश हैं। उन्हें ये पसंद नहीं आ रहा है। वो लोग पहले की तरह चावल, गेहूं व दाल की मांग करते हैं।- सुनीता कुशवाह, कार्यकर्ता, बसई नवाब
- इस पोषाहार का स्वाद अजीब सा होने की वजह से लाभार्थियों को भा नहीं रहा है। जिस वजह से लोग ले जाते जाते हैं लेकिन उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।
- उमा राजपूत, कार्यकर्ता, कैला कॉलोनी धौलपुर
- पोषाहार का वितरण किया जा रहा है लेकिन कुछ समय से लाभार्थी इसमें कोई स्वाद नहीं आने से खा नहीं रहे हैं। वह लोग केवल ले जाते हैं।- ज्योति परमार, कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी केन्द्र झोर
Published on:
17 Jul 2023 07:14 pm
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