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Dholpur: शहर की जर्जर सडक़ निर्माण कार्य में बजट बन रहा ‘स्पीड ब्रेकर’

शहर की सडक़ों के निर्माण में पेच फंसता नजर आ रहा है। क्योंकि न तो नगर परिषद पर सडक़ों के निर्माण के लिए फंड है और ना ही राज्य सरकार के पास बजट। स्वायत्त शासन विभाग ने भी सडक़ों के लिए बजट को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं।

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Dholpur news

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धौलपुर. मानसून के दौरान गड्ढारूपी सडक़ों पर हिचकोले खाने के लिए शहरवासी फिर तैयार हो जाएं। नगर परिषद अभी तक शहर की 27 छोटी-बड़ी सडक़ों में से तीन सडक़ों का ही निर्माण करा सका है। तो शेष सडक़ों के निर्माण के लिए शहरवासियों को लंबा इंंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि सडक़ निर्माण के लिए न नगर परिषद पर फंड और ना ही राज्य सरकार पर बजट। जिस कारण सडक़ों का निर्माण कार्य ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

शहरवासियों के भाग्य में विकास के नाम पर सिर्फ इंतजार ही लिखा दिख रहा है। चाहे बात कचरा निस्तारण इकाई की हो या फिर नवीन सडक़ों की। नवीन सडक़ बनाने के लिए परिषद ने टेंडर जारी किए थे। यह टेंडर रामहरि कंस्ट्रक्शन कंपनी को 7 करोड़ 24 लाख रुपए में मिला था। जिसका वर्क ऑर्डर परिषद ने मार्च में जारी किया था। शुरुआत में संवेदक की चाल कछुआ चाल दिखी। प्लांट लगाने में ही देरी हुई। फिर नगर परिषद मेला मैदान पर ही बिल्डिंग मटैरियल का सामान डाल दिया। वहीं, अभी तीन सडक़ों का निर्माण किया जा चुका है तो पुराना शहर की सडक़ का पेंचवर्क भी कंपलीट हो चुका है, तो वहीं दो और सडक़ों के निर्माण होगा। लेकिन शेष 22 सडक़ों के निर्माण में पेच फंसता नजर आ रहा है। यह पेच कुछ और नहीं सिर्फ और सिर्फ फंड का है। क्योंकि न तो नगर परिषद पर सडक़ों के निर्माण के लिए फंड है और ना ही राज्य सरकार के पास बजट। स्वायत्त शासन विभाग ने भी सडक़ों के लिए बजट को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं, गौरव पथ पर अभी पूर्ण कार्य नहीं हो पाया है। यहां पर डामर की किल्लत से काम बीच में ठप हो गया था। हरदेव नगर से गौरव पथ की तरफ जाने वाली सडक़ अभी गड्ढे बने हुए हैं। जबकि मुख्य सडक़ है।

संवेदक को नहीं मिल पा रही निर्माण राशि

नगर परिषद सहित राज्य सरकार की माली हालत का असर शहर के विकास पर पड़ रहा है। शहर की 27 सडक़ों का ठेका 7 करोड़ 24 लाख रुपए में हुआ था। जिसके बाद संवेदक ने कार्य प्रारंभ करते हुए तीन सडक़ों का निर्माण करा दिया। इसके अलावा दो और सडक़ों के निर्माण का कार्य भी प्रारंभ करने वाला है, लेकिन बजट नहीं होने के कारण शेष सडक़ों के निर्माण कार्य का काम ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। दरअसल संवेदक ने नगर परिषद से रुटेशन प्रक्रिया के तहत सडक़ निर्माण के लिए राशि जारी करने दो बार पिटीशन लगा कई दफा परिषद प्रशासन और जिला प्रशासन को अवगत करा चुका है, लेकिन बजट का अभाव होने के कारण परिषद संवेदक को बजट उपलब्ध नहीं करा पा रही है। जानकारी के अनुसार जयपुर डीएलवी में भी सडक़ों के निर्माण कार्य के लिए बजट जारी करने को कहा तो वहां से भी संवेदक को अपने स्तर और अपनी केपेशिटी के साथ ही काम करने को कहा गया है।

स्वायत्त शासन विभाग को नहीं मिला लोन

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की भी माली हालत खराब होने के कारण राज्य भर कई कार्य अटके पड़े हैं। स्वायत्त शासन विभाग ने बजट के अभाव को देखते हुए आरबीआई से लोन लेने के लिए भी अप्लाई किया गया, लेकिन बैंक ने यह कहते लोन जारी नहीं किया कि लोन का बजट कौन और कब लौटाएगा, जिसकी बैंक गारंटी भी चाहती है और गारंटी कोई दे नहीं पाया। इस स्थिति में विभाग को बजट भी जारी नहीं हो पा रहा है। बजट नहीं मिलने से राज्य भर में कई विकास कार्य अधर में लटके पड़े हैं।

जब फंड नहीं तो निविदा प्रक्रियाएं ही क्यों?

नगर परिषद की कहानी समझ से परे है, एक ओर जहां चहुंओर फैली गंदगी और जर्जर सडक़ें नगर परिषद की सच्चाई को बयां करती हैं तो वहीं परिषद की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग रहा है। देखा जाए तो जब परिषद के पास किसी कार्य के लिए फंड ही नहीं है तो विभिन्न कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी ही क्यों की जाती है, यह समझ से परे है। फंड नहीं होने के कारण सागरपाड़ा स्थिति डंपिंग यार्ड में कचरा निस्तारण इकाई, शहर की जल निकासी कार्य,जगह-जगह बनने वाली पार्किंग कार्य सहित कई कार्य लंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारियों के चहेते संवेदकों और अन्य कार्यों का भुगतान तुरंत हो जाता है, जो परिषद के जिम्मेदारों पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं।

27.57 फीसदी बिलो पर लिया टेंडर

शहर की मुख्य सडक़ों से लेकर मोहल्लों तक की सडक़ें जर्जर हालातों में पहुंच चुकी हैं। जिनके निर्माण का ठेका नगर परिषद ने कंस्ट्रक्शन को दिया है। संवेदक को यह काम एक साल के अंदर कम्पलीट करना होगा। जिसका वर्क ऑर्डर 4 मार्च को जारी किया गया था। लेकिन बजट न होने के कारण कार्य अटकता दिख रहा है। संवेदक को 27 सडक़ों का निर्माण कार्य 4 मार्च 2027 तक पूर्ण करना है, सिर पर मानसून और बजट नहीं होने के कारण सडक़ निर्माण कार्य मुश्किल ही दिख रहा है जिससे एक बार फिर शहरवासियों के हाथ सिर्फ निराशा ही लगेगी। सडक़ निर्माण के अलावा संंबंधित फर्म अगले 5 साल तक सडक़ों में होने वाली टूट-फूट के साथ अन्य मेंटेनेंस का कार्य भी करेगी। बताया जा रहा है कि टेंडर फर्म ने 27.57 फीसदी बिलो में लिया है। संवेदक कल्ली शर्मा का कहना है कि सडक़ निर्माण को लेकर परिषद की ओर से बजट नहीं मिल पा रहा है। अभी तक अपने स्तर से चार सडक़ों का निर्माण कराया जा चुका है तो दो और सडक़ों का निर्माण और कराया जाएगा।

इन सडक़ों का हुआ निर्माण कार्य-

बाड़ी लिंक रोड से मचकुंड आईटीआई तक सडक़ निर्माण

- वाटर वक्र्स से डाकखाना तिराहा तक निर्माण अधूरा

- आनंद नगर सडक़ का निर्माण

- फूटा दरवाजा से टाउन चौकी तक पेचवर्क

- राना गार्डन से दशहरा रोड का निर्माण कार्य होगा प्रारंभ सडक़ निर्माण के लिए नगर परिषद के पास बजट नहीं है, तो वहीं स्वायत्त शासन विभाग भी फंड उपलब्ध कराने में असमर्थ हो रहा है। अभी कुछ सडक़ों के लिए सामग्री है, जिससे सडक़ों का निर्माण कराया जाएगा।

-गुमान सिंह सैनी, कार्यवाहक आयुक्त नगर परिषद