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धौलपुर.जिले में संचालित 8 सीएचसी, 40 पीएचसी सेंटरों सहित बाड़ी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं लचर हालातों में हैं। जहां मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा। विशेषज्ञ डॉक्टरों और संसाधनों के अभाव के कारण यह स्वास्थ्य केन्द्र केवल रेफर केन्द्र बनकर रह गए हैं। प्रतिदिन इन केन्द्रों से 10 से 15मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। जिस कारण जिला अस्पताल पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 में अपने कुल व्यय का 8.1 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित किया है, जो अन्य राज्यों के 6.2 प्रतिशत के औसत से काफी अधिक है। राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास, आपातकालीन सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर देने की बात कही। लेकिन यह सब सुनने तक ही अच्छा लगता है, क्योंकि धौलपुर जिले में जमीनी हालात इससे बिलकुल जुदा हैं। जहां सीएचसी सेंटरों से लेकर पीएचसी सेंटर और बाड़ी जिला अस्पताल खांसी, बुखार, पेट दर्द के इलाज तक ही सीमित होकर रह गए हैं। कारण...विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल उपकरणों का अभाव। जिसको पूरा करने का दम राज्य सरकार भरती रहती है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। हालात यह हैं कि जिले में संचालित 8 सीएचसी और 40 पीएचसी सेंटर आज केवल रेफरल केन्द्र बनकर रह गए हैं इसमें सरमथुरा सीएचसी, राजाखेड़ा एसडीएच और सीएचसी, बसेड़ी सीएचसी और दो साल पहले क्रमोन्नत किया बाड़ी जिला अस्पताल भी शामिल हैं। इन स्वास्थ्य केन्द्रों से प्रतिदिन 10 से 15मरीज धौलपुर जिला अस्पताल रेफर किए जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हायर सेंटर पर पड़ रहा है।
रेफरल केन्द्र बनने का कारण
बात करें जिले की चार विधानसभाओं में संचालित 8 सीएचसी और 40 पीएचसी सेंटरों पर तैनात स्टॉफ की तो ८ सीएचसी केन्द्रों पर 40 विशेष चिकित्सकों सहित अन्य पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत केवल 21 ही हैं, जबकि विशेषज्ञ चिकित्सक सहित कहीं नर्सिंग स्टॉफ तो कहीं लैब टेक्नीशियर तो कहीं रेडियोग्राफर के पद सहित 19 पद खाली हैं। इसी तरह 40 सीएचसी केन्द्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित 75 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत केवल 39 ही हैं, यानी 36 पद अभी भी खाली हैं जो कि एक बड़ी संख्या है, जबकि 03 सेंटर ऐसे भी बताए जा रहे हैं जिनमें कोई चिकित्सक ही नहीं है और वहां केवल नर्सिंग स्टॉफ ही मरीजों का इलाज कर रहा है। जिले में गत वर्ष सर्वे के दौरान सामने आया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 82.2 प्रतिशत फिजिशियन और 83.2 सर्जन की कमी है।
मेडिकल उपकरणों तक का अभाव
राजस्थान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों (पीएचसी) पर राज्य सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार कई अनिवार्य सुविधाएं, बुनियादी ढांचा और सेवाएं होना आवश्यक है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। लेकिन अधिकतर इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुविधाओं का भारी अभाव बना हुआ है। जहां छोटे सर्जिकल ऑपरेशन के लिए आवश्यक उपकरणों तक का अभाव बना हुआ है। कहीं एक्स-रे मशीन उपलब्ध है तो उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों का बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं और एक्सीडेंट जैसे मामलों में मरहम पट्टी कर उन्हें धौलपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
बाड़ी जिला अस्पताल की हालत खराब
राज्य सरकार ने बाड़ी डीएचसी केन्द्र को गत दो साल पहले क्रमोन्नत कर जिला अस्पताल तो बना दिया, लेकिन वहां सुविधाएं देना भूल गया। विशेषज्ञ डॉक्टर और जांच संंबंधी उपकरणों के नहीं होने के कारण मरीजों को हल्की गंभीर बीमारी या फिर सडक़ हादसे में घायलों को धौलपुर जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। हालात यह हैं कि ४ साल से जनरल सर्जन का पद रिक्त है, इसके अलावा आर्थो सर्जन, जनरल फिजीशियन तक जिला अस्पताल में नहीं हैं। जिस कारण क्षेत्रीय लोगों को बाड़ी जिला अस्पताल में उचित इलाज का लाभ कतई नहीं मिल पा रहा है।
गंभीर बीमारियों का कोई चिकित्सक नहीं
अब बात करते हैं धौलपुर जिला अस्पताल की तो यहां के भी हालात कुछ ठीक नहीं हैं। नवीन जिला अस्पताल बनने के बाद लगा जैसे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन ऐसा 3 साल बाद भी होता नहीं दिख रहा और यहां भी चुनिंदा बीमारियों का ही इलाज हो पा रहा है। देखा जाए तो यहां गेस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रालॉजी, यूरोलॉजी के चिकित्सक ही नहीं हैं। जिस कारण मरीजों का ग्वालियर, आगरा या फिर जयपुर भागना पड़ता है। जिला अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञों से लेकर वार्ड बॉय तक पद खाली हैं, जिनमें वरिष्ठ विशेषज्ञ 3 कनिष्ठ विशेषज्ञ 5 चिकित्सा अधिकारी 20 नर्सिंग अधीक्षक 4 लैब टैक्नीशियन 5सहायक लैब 3 रेडियोग्राफर के 2 पद खाली हैं।
धौलपुर जिला अस्पताल में प्रतिदिन जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों से लगभग 10 मरीज रेफर होकर आते हैं। इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं को धीरे-धीरे बेहतर करना होगा। जिससे लोगों को उचित स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
-समरवीर सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी
Published on:
15 Jun 2026 08:32 pm
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