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धौलपुर. बड़े- बड़े दावे और वादे के बावजूद भी जिले के 394 स्कूल भवनों का पुनरुद्धार नहीं हो सका। मानसून के सीजन में एक बार फिर मासूम इन स्कूलों में पढऩे को मजबूर होंगे। इन स्कूलों में 36 स्कूल ऐसे हैं जो पूर्ण रूप से जर्जर हैं, तो 334 स्कूल आंशिक जर्जर और 24 स्कूलों को मरम्मत की दरकार है, लेकिन सरकार के ढुलमुल रवैया और बजट जारी न करने के कारण इन स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
झालावाड़ स्कूल हादसे को एक साल होने वाला है, तो मानसून... बारिश की झड़ी बन राजकीय स्कूलों की छतों से टपकने को बेकरार है। लेकिन इन सबसे शिक्षा विभाग और राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं लिया, अगर सबक लिया होता तो जिले के जर्जर स्कूल और कक्षा कक्षों में से अधिकतरों का निर्माण हो चुका होता, लेकिन ऐसा होता नहीं है। यही कारण है कि मानसून सिर पर आने को है और अभी तक ना 36 पूर्ण जर्जर स्कूल बनाए गए हैं और ना ही 334 आंशिक रूप से जर्जर स्कूलों (जिन स्कूलों के कुछ भवन जर्जर हों) का निर्माण ही किया जा सका है, हालांकि इन 36 पूर्ण जर्जर स्कूलों को जमींदोज और 334 आंशिक रूप से जर्जर स्कूलों के मरम्मत करने के आदेश जरूर शिक्षा विभाग ने जारी किए हैं, लेकिन बजट के अभाव के कारण अभी 3 स्कूलों को छोडकऱ शेष सभी स्कूलों की हालत खस्ताहाल बनी हुई है।
निर्माण, मरम्मत कार्य पर 20 करोड़ होंगे खर्च
जिले में 774 पीएस और यूपीएस प्रारंभिक स्कूल हैं। जिनमें से 36 पूर्ण जर्जर, 334 आंशिक जर्जर, 336 मरम्मत योग्य और 67 स्कूल ऐसे हैं जो पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं यानी बेहतर हालातों में हैं। तो वहीं 18 स्कूल ऐसे भी हैं जो तकनीकी रिपोर्ट और एसएससी की रिपोर्ट में भिन्नता होने के कारण इनपर कोई निर्णय (जमींदोज या मरम्मत) नहीं लिया जा सका है। इन सबके निर्माण और मरम्मत के कार्य पर लगभग 15 से 20 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। हालांकि शिक्षा विभाग ने 36 पूर्ण जर्जर स्कूलों में 11 स्कूलों को ही जमींदोज कर पुन: बनाने के लिए प्रशासनिक प्रस्ताव स्वीकृति किया गया है, शेष 25 पूर्ण जर्जर स्कूलों के भविष्य पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासनिक प्रस्ताव स्वीकृति तो हो गया पर इन स्कूलों का निर्माण कार्य कब होगा?
केवल 11 स्कूलों का जमींदोज करने की स्वीकृति
देखा जाए तो इन सब मामले में हल्की राहत भरी खबर यह है कि इन 11 पूर्ण जर्जर स्कूलों में से 3 स्कूलों प्राथमिक विद्यालय शाला गोस्वामी, प्राथमिक विद्यालय सिद्धियापुरा और प्राथमिक विद्यालय मुतावली के पुन: निर्माण को बजट जारी किया जा चुका है। इनमें से दो स्कूलों शाला गोस्वामी और सिद्धियापुरा को जमींदोज कर कार्य प्रारंभ भी कर दिया गया है। इसके अलावा एक अन्य स्कूल कुण्डा का पुरा के स्कूल भवन निर्माण के लिए भी बजट जारी किया गया है, हालांकि अभी तक यह स्कूल भवन विहीन था। स्कूल निर्माण के बाद प्राथमिक विद्यालय कुण्डापुरा को अपनी पहचान मिल जाएगी।
केवल 5-6 स्कूलों की मरम्मत का मांगा प्रस्ताव
सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षा विभाग इन जर्जर और मरम्मत योग्य स्कूलों को लेकर ज्यादा सक्रिय भी नहीं दिख रहा, यही कारण है विभाग ने जिला शिक्षा विभाग से केवल 5-6 स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव मांगा है और वह भी वह स्कूल जिनमें कम खर्चा हो सके। अब जहां जर्जर और मरम्मत योग्य स्कूलों का आंकड़ा 400 के आसपास हो तो वहां केवल 5-6 स्कूलों की ही मरम्मत का प्रस्ताव मांगना शिक्षा विभाग मंशा को दर्शाता है।
मासूम फिर उठाएंगे परेशानियां
झालावाड़ हादसे के बाद शिक्षा विभाग ने राज्य भर में जर्जर स्कूलों का सर्वे करा उन्हें जमींदोज करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद जिले में 36 स्कूल ऐसे निकले जो पूर्ण रूप से जर्जर थे। जिसके बाद इन स्कूलों में पढऩे वाले लगभग 20 हजार बच्चों की पढ़ाई के लिए अन्यंत्र स्थलों जैसे, निजी भवनों, पंचायत भवनों या टीन शेड लगाकर व्यवस्था की गई थी तो वहीं कई स्कूलों को मर्ज भी किया गया। इस दौरान कई ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों के बच्चों को 2 किमी पैदल तक चलकर अध्ययन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब पूर्ण जर्जर भवनों के निर्माण नहीं होने से नौनिहालों को फिर परेशानियां उठानी पडेंग़ी।
संस्थाओं ने 312 स्कूलों की कराई मरम्मत
अब बात की जाए एसडीआरएफ और शिक्षा परिषद की तो इन संस्थाओं की ओर से जिले के 312 प्राथमिक स्कूलों की मरम्मत (छत, दीवार आदि) कराई जा चुकी है। इनमें 258 स्कूलों की मरम्मत का कार्य एसडीआरफ ने कराया, जिस पर प्रति स्कूल 2-2 लाख रुपए खर्च किए गए तो वहीं शिक्षा परिषद 54 स्कूलों की मरम्मत करा चुका है। देखा जाए तो अभी भी 24 स्कूल जिले में ऐसे हैं जिनकों मरम्मत की दरकार है।
- जिले के जर्जर स्कूलों और मरम्मत योग्य स्कूलों का प्रस्ताव बनाकर शिक्षा विभाग अजमेर मुख्यालय को भेज दिया गया है। तो वहीं जिले के कुछ स्कूलों में मरम्मत का कार्य हो चुका है, शेष का जल्द ही किया जाएगा।
-महेश कुमार मंगल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी धौलपुर
Published on:
17 Jun 2026 07:08 pm
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