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मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना ; एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीयन नहीं हो पाया, कैसे निरोगी रहे काया

बाड़ी. राज्य सरकार की हर व्यक्ति को निरोग रखने की मंशा के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में जिले का एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीकृत नहीं है। इस कारण रोगियो को निजी चिकित्सालयों में योजना का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत हर परिवार को प्रत्येक वर्ष 5 लाख रुपए तक इलाज कराने की सुविधा मिलती है।

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Chief Minister Chiranjeevi Yojana; Not a single private hospital could be registered, how to stay healthy

मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना ; एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीयन नहीं हो पाया, कैसे निरोगी रहे काया,मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना ; एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीयन नहीं हो पाया, कैसे निरोगी रहे काया,मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना ; एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीयन नहीं हो पाया, कैसे निरोगी रहे काया

मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना ; एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीयन नहीं हो पाया, कैसे निरोगी रहे काया

- जिले में नहीं मिल रहा चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना का लाभ

वीरेन्द्र चंसोरिया

बाड़ी. राज्य सरकार की हर व्यक्ति को निरोग रखने की मंशा के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में जिले का एक भी निजी चिकित्सालय का पंजीकृत नहीं है। इस कारण रोगियो को निजी चिकित्सालयों में योजना का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत हर परिवार को प्रत्येक वर्ष 5 लाख रुपए तक इलाज कराने की सुविधा मिलती है। सरकार ने योजना को लेकर भरपूर प्रचार किया। इसके चलते लोगों ने इसमें पंजीयन कराया। वहीं सरकार की ओर से जगह-जगह शिविर लगाए गए। लेकिन एक भी निजी चिकित्सालय के पंजीकृत नहीं होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।850 का भुगतान कर लिया जाता है बीमागौरतलब है कि योजना के तहत प्रत्येक परिवार को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए ई-मित्र द्वारा 850 की अग्रिम राशि जमा कर एक वर्ष तक 5 लाख का मुफ्त निजी अथवा सरकारी अस्पतालों में इलाज दिए जाने की गारंटी दी जाती है। ऐसे में अधिकतर परिवारों ने इस योजना के तहत पंजीकृत करा रखा है, लेकिन जिले में इस योजना का कोई भी लाभ किसी को प्राप्त नहीं हो पा रहा है। एनएसएफ कार्ड धारकों के लिए मुफ्त योजनाऐसे परिवार, जिन्हें सरकार की तरफ से राशन वितरित किया जाता है। उन परिवारों से उक्त योजना के लिए कोई भी राशि जमा नहीं कराई जा रही है। उन्हें स्वत: ही उनके जन आधार कार्ड से जोड़ कर योजना का लाभ दिया जाता है। सरकारी कर्मचारी भी निशुल्क पंजीकृतयोजना के तहत राजस्थान सरकार के प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को भी योजना के अंतर्गत निशुल्क पंजीकृत किया गया है। उन्हें तथा उनके परिवार को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज की गारंटी दी गई है। जबकि जिले में सच्चाई इसके बिलकुल उलट है।सरकार नहीं करती भुगतान, क्यों कराएं पंजीयन - निजी अस्पतालवहीं निजी अस्पतालों के संचालकों से जब योजना को लेकर एवं उनके पंजीकरण ना होने को लेकर जानकारी चाही, तो एक निजी अस्पताल संचालक ने बताया कि वर्तमान में चिरंजीवी योजना के तहत जिले के किसी भी निजी अस्पताल ने पंजीकृत नहीं करवाया है। जिसका प्रमुख कारण समय पर सरकार द्वारा भुगतान न करने के साथ मनमाने ढंग से भुगतान करना है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन बिना आर्थिक सहयोग के योजनाओं को संचालित नहीं कर सकता। निजी अस्पतालों का पंजीयन स्वेच्छा से, बाध्यकारी नहीं-सीएमएचओ योजना के तहत निजी अस्पतालों को भागीदार होने के लिए स्वेच्छा से आमंत्रित किया गया है। इसके लिए कोई भी बाध्यकारी प्रक्रिया नहीं है। निजी अस्पतालों के साथ कई बार बैठक कर चुके हैं। उन्हें समझाइश भी की गई, लेकिन कई अस्पताल तो 10 से 20 बिस्तर के ना होने के कारण योजना के तहत पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं, तो कई अस्पताल इसके लिए आगे आने के लिए तैयार नहीं है। वहीं लम्बित भुगतान किसी को नहीं है, अगर किसी को है तो वह पीएसी में क्लेम कर सकता है। जिसे हमारे द्वारा तुरंत एप्रुव्ड कर बकाया भुगतान किया जाएगा।डॉ. गोपाल प्रसाद गोयल, सीएमएचओ, धौलपुर। क्या कहते हैं लोग चिरंजीवी योजना को हर घर में पहुंचाने का जो दावा राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। वह पूर्णतया थोथी साबित हो रहा है।कुनाल बंसल, बेरोजगार शिक्षित युवा। ईमित्र सेंटर एवं स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से रजिस्ट्रेशन तो करा लिए गए हैं, लेकिन जिले भर में कोई भी अस्पताल इस योजना के तहत पंजीकृत ना होने से लाभ नहीं मिल पा रहा है।धीरज चंसौरिया, शिक्षक। उक्त योजना के अंतर्गत पंजीकृत तो कर लिया है, लेकिन इलाज के नाम पर धरातल पर शून्य हैं। यह योजना केवल कागजों पर चल रही है।पप्पी लवानिया, सरकारी शिक्षक। स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए इनके द्वारा 850 की अग्रिम राशि जमा कर 5 लाख का बीमा की गारंटी दिए जाने की बात बेमानी साबित हो रही है। गरीब लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। भानु प्रताप परमार, श्रमिक।