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कर्नल इंग्ले के प्रयास ; दस हजार नींबू के पौधे बढ़ाएंगे डांग के ग्रामीणों की आय

बाड़ी. कोरोना के खौफ के बीच जहां आमजन परेशान है, वहीं धरती पुत्र अब बारिश होने की आस लगाए बैठा है। किसान को अब एक जोरदार मानसूनी बारिश का इंतजार है। जिससे खेतों में खरीफ की फसल को बोया जा सके। दूसरी ओर धौलपुर मिलिट्री स्कूल के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल नीलेश इंगले बारिश में आने वाले पानी को सुरक्षित करने के प्रयास में पहले से ही जुटे हुए हैं।

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 Colonel Ingley's efforts; Ten thousand lemon plants will increase the income of Dang villagers

कर्नल इंग्ले के प्रयास ; दस हजार नींबू के पौधे बढ़ाएंगे डांग के ग्रामीणों की आय

कर्नल इंग्ले के प्रयास ; दस हजार नींबू के पौधे बढ़ाएंगे डांग के ग्रामीणों की आय
डांग के 30 गांवों से गर्मियों में ग्रामीणों का पलायन रुका
-चम्बल के बीहड़ में सुंदरवन विकसित करने का कर्नल का सपना

बाड़ी. कोरोना के खौफ के बीच जहां आमजन परेशान है, वहीं धरती पुत्र अब बारिश होने की आस लगाए बैठा है। किसान को अब एक जोरदार मानसूनी बारिश का इंतजार है। जिससे खेतों में खरीफ की फसल को बोया जा सके। दूसरी ओर धौलपुर मिलिट्री स्कूल के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल नीलेश इंगले बारिश में आने वाले पानी को सुरक्षित करने के प्रयास में पहले से ही जुटे हुए हैं। वे बारिश के पानी की एक बून्द भी बेकार नहीं जाने देना चाहते है। ऐसे में वे पिछले चार साल स्कूल के आसपास के डांग क्षेत्र में पानी संचित करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में इस बारिश से पूर्व भी वे ऐसे स्थानों पर चेक डैम बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जहां पानी का स्टोर किया जा सके। जिसके लिए उन्होंने अपने स्टाफ के साथ कुछ ग्रामीणों की भी मदद ली है।
कर्नल इंगले ने बताया की उन्होंने 30 ऐसे गांवों को गोद लिया है, जहां पहले पानी के लिए इतनी परेशानी थी। गर्मी आने से पूर्व यह ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर अन्यंत्र पलायन कर जाते थे, लेकिन अब इन गांवों में पिछले 4 सालों में इतना पानी सुरक्षित है कि आज ग्रामीण अपने बच्चों और पशुओं के साथ आराम से गुजर बसर कर रहे हैं। कर्नल नीलेश इंगले ने बताया इस बार बारिश से पूर्व ही उन्होंने चंबल किनारे रहने वाले ग्रामीणों को आय का एक अन्य स्रोत अर्जित करने और प्रकृति में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार नींबू की पौध ग्रामीणों को वितरित की है। यह पौधे इस किस्म के हैं कि किसी भी मिट्टी में रोपित कर थोड़ी सी भी देखभाल कर ली जायए तो कुछ ही वर्षों में हरे भरे होकर नींबू का फल देने लगेंगे। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा और डांग में कुछ हरियाली होगी।
बताया कि वे पिछले 4 सालों से केसर बाग के आसपास के क्षेत्र में जो पथरीली और रेतीली भूमि है, उसमें चेक डैम और एनीकट बनाकर पानी को रोकने के प्रयास में लगे है। जो बेकार में वर्षो से चंबल नदी में चला जाता है। यह कार्य लोगों के सहयोग से बिना किसी सरकारी सहायता के चल रहा है। धौलपुर को चंबल के बीहड़ों के नाम से जाना जाता है। ऐसे में यह बीहड़ इतना हरा भरा हो जाए कि यहां प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ एक घना वन विकसित हो जाए। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण युवाओं के साथ प्रकृति से प्रेम करने वाले लोगों से सहयोग मांगा है। जो प्रकृति के लिए अपना कुछ समय और मेहनत दान कर सकें। उन्होंने बताया कि प्रकृति में जो एक बीज बोया जाता है, वह हजार बीज पैदा करता है। ऐसे में जो प्रकृति के लिए हम करते हैं, प्रकृति हजार गुना करके हमे देती है।
गौरतलब है कि ले. कर्नल नीलेश इंग्ले पिछले चार सालों से प्रकृति के संरक्षण में लगे है। केसरबाग के आसपास के क्षेत्र में इनके प्रयासों से हरियाली बढ़ी है। भूमि में जलस्तर ऊपर आया है और आसपास के डांग इलाके के ग्रामीणों का गर्मियों में होने वाला पशुओं के साथ पलायन रुका है। इस कार्य के लिए इनको सैन्य अकादमी ने सम्मान दिया है।