
- तीर्थों का भांजा मचकुंड को भूला पर्यटन, आरटीडीसी और अन्य जिम्मेदार विभाग
- जिले का सबसे मुख्य पर्यटन स्थल
धौलपुर. तीर्थों के भांजे के रूप में देशभर में विख्यात मचकुंड धाम जिम्मेदारों की अनदेखी की वजह से अपनी चमक खो रहा है। राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए की लागत से लाइट एंड साउंड शो और रंगीन फव्वारे समेत अन्य फैंसी लाइटें लगवाई थी लेकिन रख-रखाव के अभाव में यह धीरे-धीरे बंद हो गई और अब तो लम्बे समय से न तो फव्वारे और न ही साउंड शो हुआ। मचकुंड तीर्थस्थल पर ध्यान नहीं देने से अब यहां पर पर्यटक भी यदा-कदा पहुंच रहे हैं। केवल स्थानीय लोग और देवछठ मेला पर आसपास के जिलों के लोग यहां पर पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। हाल ये है कि हाल में यहां पर पंच गौरव कार्यक्रम आयोजित हुआ लेकिन प्रचार-प्रसार का अभाव दिखा। खास बात ये है कि राजस्थान की विश्व में पर्यटन से पहचान है और सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। लेकिन धौलपुर शहर के करीब स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर जिम्मेदारों की बेरुखी के चलते यह अब सिमट कर रह गया है।
करीब 3 करोड़ से हुए थे कार्य
मचकुंड धाम को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए पूर्ववर्ती सरकारों ने विकास कार्य समेत अन्य पर करोड़ों रुपए भी खर्च किए। लेकिन इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। पूर्व वसुंधरा राजे सरकार में मचकुंड के लिए विशेष बजट दिया गया। जिससे यहां पर लाइट एंड साउंड शो और फव्वारे इत्यादि शुरू हुए। उस समय बड़ी संख्या में शाम के समय स्थानीय लोग और पर्यटक यहां पहुंचते थे लेकिन धीरे-धीरे साउंड शो और फिर फव्वारे बंद हो गए। जिसके चलते दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों ने भी इससे किनारा कर लिया।
बिजली बिल का भारी खर्चा... परिषद ने भी बनाई दूरी
मचकुंड सरोवर में पूर्व में संचालित रंगीन फव्वारे और लाइट एंड साउंड शो संचालन के लिए बिजली की काफी खपत होती है। जिसके चलते नगर परिषद समेत अन्य जिम्मेदार विभागों ने इससे दूरी बना ली। स्वयं आरटीडीसी और पर्यटन विभाग भी इस बिल की जिम्मेदारी उठाने से किनारा करने लग गए। नतीजा ये हुआ कि साउंड शो और फिर रंगीन फव्वारों का प्रदर्शन बंद हो गया। अब यहां पर केवल शाम के समय कुछ ही लोग पहुंचते हैं। हाल में कुछ आयोजन के चलते नगर परिषद ने लाइट जरुर दुरस्त करवाई हैं। जबकि यहां पर सफाई तक के लाले पड़ चुके थे। निराश्रित जानवर यहां पर घूमते हैं और गंदगी होने के चलते पर्यटकों ने घाटों की तरफ जाना तक बंद कर दिया था।
हैंड ओवर को तैयार... लेने को नहीं कोई
उधर, आरटीडीसी विभाग का कहना है कि वह मचकुंड धाम को हैंड ओवर करने को तैयार हैं। इसको लेकर पत्र भी लिखे जा चुके हैं लेकिन कोई आगे नहीं आ रहा। विभाग का कहना है कि नगर परिषद अगर हैंड ओवर कर ले तो हम एक दफा लाइट एंड साउंड शो से लेकर अन्य सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करके देंगे। वहीं, दूसरी वजह यह भी है कि मचकुंड पर बिजली बिल का खर्चा अधिक है लेकिन कोई कमाई नहीं है। जिसके चलते सभी विभाग इससे दूरी बनाकर रख रहे हैं। हालांकि, आरटीडीसी का कहना है कि अगर कोई जिम्मेदार लेने को तैयार है तो हम अन्य व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देंगे।
- मचकुंड स्थल पर लाइट एंड साउंड शो और फव्वारे इत्यादि का कार्य आरटीडीसी के अंतर्गत है। इसमें क्या चल रहा है, यह ही बता सकेंगे। बाकी हम पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
- संजय जौहरी, उप निदेशक, पर्यटन विभाग भरतपुर
- मचकुंड पर लाइट एंड साउंड शो और रंगीन फव्वारे संचालन हम शुरू करवा कर देंगे, लेकिन उससे पहले नगर परिषद या फिर अन्य एजेंसी को हैंड ओवर करेंगे। जिससे बिजली बिल समेत अन्य खर्चें उठाए जा सकें। या फिर ओएडंएम का भी प्रयास हो सकता है, जिससे दूसरी एजेंसी यहां व्यवस्था संभाले।
- माधव शर्मा, निदेशक तकनीकी, आरटीसीडी
Published on:
22 Mar 2026 06:37 pm
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