22 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हर किसी का ध्यान खींचता है नेरोगेज का जापानी इंजन…

– धौलपुर नेरोगेज लाइन संचालन में स्टीम इंजन ने निभाया खास रोल – अब रेलवे स्टेशन की नई इमारत के समक्ष रखा इंजन धौलपुर. पूर्वी राजस्थान के शहर धौलपुर को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर होने का खासा फायदा मिला। जब कई इलाकों में रेलवे का संचालन नहीं था, उस वक्त धौलपुर में रेल दौड़ रही थी। […]

2 min read
Google source verification
हर किसी का ध्यान खींचता है नेरोगेज का जापानी इंजन... The Japanese narrow gauge engine catches everyone's attention...

- धौलपुर नेरोगेज लाइन संचालन में स्टीम इंजन ने निभाया खास रोल

- अब रेलवे स्टेशन की नई इमारत के समक्ष रखा इंजन

धौलपुर. पूर्वी राजस्थान के शहर धौलपुर को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर होने का खासा फायदा मिला। जब कई इलाकों में रेलवे का संचालन नहीं था, उस वक्त धौलपुर में रेल दौड़ रही थी। इसमें प्रमुख रूप से धौलपुर-सरमथुरा नेरोगेज लाइन खास रही है। उक्त ट्रेन का शुभारंभ साल 1908 हुआ था और यह कोयले के स्टीम इंजन (भाप) से संचालित थी। इसका संचालन मार्च 2023 में पूर्णतय बंद हो गया और अब यह स्टीम इंजन रेलवे स्टेशन की मुख्य इमारत के समक्ष रखा गया। नवीन रेलवे भवन के इस साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है। लेकिन आज भी यह इंजन यात्रियों का ध्यान अपनी ओर बरबस खींचता है। आज भी कई युवा स्टीम इंजन के समक्ष खड़े होकर सेल्फी खिंचवाते हैं। यह शहर का एक खास प्वाइंट है और नवीन स्टेशन खुलने पर यह खास पहचान वापस बनाएगा।

साल 2023 में बंद हुआ सफर

धौलपुर में छोटी रेलवे लाइन (नेरोगेज) खासी लोकप्रिय ट्रेन में शुमार थी। शुरुआत इसकी साल 1908 में हुई, तब यह स्टीम इंजन से संचालित थी। हालांकि, बाद में इसको डीजल इंजन में बदल दिया गया। करीब 72 किलोमीटर का ट्रेन का सफर होता था। एक चक्कर धौलपुर से सरमथुरा और दूसरा यूपी के तांतपुर तक होता था। शुरुआत इसकी रेड स्टोन ढोने के लिए हुई थी लेकिन बाद में यह सवारी ले जाने लगी। सरमथुरा और तांतपुर इलाके से बड़ी मात्रा में रेड स्टोन निकलता था, जो धौलपुर इसी ट्रेन से आता था। तब यह मालगाड़ी का काम करती थी। धौलपुर-बाड़ी लाइट रेलवे (बाद में धौलपुर स्टेट रेलवे) को फरवरी 1908 में खोला गया था।

जापानी कंपनी ने बनाए थे इंजन

धौलपुर बाड़ी लाइट रेलवे के लोकोमोटिव के कभी धुआं उड़ाती चलती थी। बाद में यह डीजल इंजन से चली। इस लाइट रेलवे को डीजल से संचालित जेडडीएम.5 लोको खींचते हैं। चितंरजन लोकोमोटिव वक्र्स द्वारा निर्मित ये लोको 450 अश्वशक्ति के थे। इस लाइन के पास पहले दो स्टीम इंजन हुआ करते थे जो 1954 में जापान की कावासाकी कंपनी ने तैयार किए थे।

हर किसी का ध्यान खींचता है नेरोगेज का जापानी इंजन…