
देश में पहला स्मार्ट गांव बन कर उभरा धनौरा, क्राइम व अल्कोहल फ्री है गांव
देश में पहला स्मार्ट गांव बन कर उभरा धनौरा, क्राइम व अल्कोहल फ्री है गांव
- सभी गांवों के लिए प्ररेणा का स्त्रोत बनी गांव के विकास की कहानी
Smart Village Dhanora news dholpur धौलपुर. कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों....! इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है गांव धनौरा के गांव वासियों ने। राजस्थान के धौलपुर जिले का गांव धनौरा देश का पहला स्मार्ट गांव बन कर उभरा है। यह सब कुछ स्थानीय ग्रामीणों के बलबूते से ही संभव हो सका है। ग्रामीणों ने एकजुटता से लिखि गई गांव के विकास की कहानी आज देश के सभी गांवों के लिए एक प्ररेणा का स्त्रोत बनी हुए है।
ऐसे शुरू हुआ गांव के विकास का सफर
धौलपुर जिले के बाड़ी कस्बे से पांच किलोमीटर दूर स्थित लगभग 2200 लोगों की आबादी वाला धनौरा गांव उत्तर पूर्व में एक छोटा सा गांव है। धनौरा गांव ने पिछले 7-8 वर्षों में विकास की नई गाथा गढ़ी है, देश के अन्य गाँवों की तरह यहां भी खुले में शौच, कीचड़ भरे संकरे व कच्चे रास्ते, पानी की कमी, बेरोजग़ारी, स्तरीय शिक्षा का अभाव, निम्न जीवन स्तर जैसी समस्याएं आम थी। गांव में रिट्रोफिटिंग के तहत सभी स्कूलों, पंचायत और दूसरे महत्वपूर्ण भवनों का जीणोद्धार, री-डेवलपमेंट यानी गांव में सड़क, बिजली - पानी स्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था को सुचारु बनाना, ग्रीनफील्ड यानी पेड़ों और हरित आवरण का उचित प्रबंधन, ई-पैन यानी तकनीक का उपयोग करके स्मार्ट गांव के कामों के लिए डिजिटल स्मार्ट तरीके ढूंढना और लाइवलीहुड यानी गांव में ही उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग करके गांव वालों के लिए रोजगार पैदा करना। इस सोच के साथ स्मार्ट विलेज धनौरा में काम शुरू हुआ। सरपंच और दूसरे जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और एनजीओ के समन्वय और सहयोग से गांव का कायाकल्प किया गया। सबसे पहले गांव को खुले में शौच से मुक्त करवाने का अभियान शुरू किया गया। इसके लिए कई बार गांव के पंच पटेलों के साथ मीटिंग करने के बाद 1 मई, 2014 में प्रथम महिला पंचायत का आयोजन किया गया। गांव के लोगों को विशेष रूप से बुजुर्ग महिलाओं को इसके लिए तैयार करना आसान काम नहीं था। इसके लिए गांव की युवा टीम में घर घर जाकर सर्वे किया और लोगों को समझाने का सफल प्रयास किया। हर घर में शौचालय की मुहिम के अंतर्गत ग्राम पंचायत के सहयोग से पूरी ग्राम पंचायत में 822 शौचालय का निर्माण किया गया। टॉयलेट के पानी की उचित निकासी के लिए सीवरेज लाइन और सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया। सीवरेज लाइन पर ज्यादातर काम गांव वालों के श्रमदान के सहयोग से किया गया। इसमें मजदूरी के लिए बहुत कम पैसा देना पड़ा। संभवतया भारत का पहला गाँव है, जहां पर सीवरेज लाइन और सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया है। विद्यालय में बच्चों के लिए आधुनिक शौचालय का निर्माण किया गया और सार्वजनिक स्थान पर शौचालय निर्माण किया गया। ग्राम पंचायतों को जिला स्तर पर पहचान मिली और जिला प्रशासन द्वारा धनौरा पंचायत को धौलपुर जिले की पहली खुले में शौच से मुक्त पंचायत घोषित किया गया है ।
ग्रामीण से स्वयं हटाए अतिक्रमण, रास्ते हुए चौड़े
गांव में कई जगह रास्ते बहुत सकरे थे और ट्रैक्टर या बड़े साधन गांव के चारों ओर नहीं निकल सकते थे। इसलिए गांव के मुख्य रास्ते के साथ-साथ इसे जोडऩे वाले विभिन्न आंतरिक रास्तों (गलियों) से अतिक्रमण हटा कर इन्हें 8-10 फीट चौड़ाई की जगह अब 20-25 फीट चौड़ा किया गया है और इनमें लगभग 2.3 किलोमीटर लंबी, उच्च कोटि की सीमेंटेड सड़कें बनाई गई हैं। लोगों के आपसी सहयोग व त्याग की बदौलत गांव का हर रास्ता अतिक्रमण मुक्त है। गांव में गौरव पथ निर्माण करने के लिए 10 से 12 फीट चौड़े रास्ते को 20 से 25 फीट चौड़ा किया गया । राज्य सरकार द्वारा इस आधुनिक गौरव पथ का निर्माण किया गया है। गौरव पथ के निर्माण के लिए गांव के लोगों द्वारा स्वेच्छा से अपनी जमीन देना, सामाजिक जन चेतना और विकास में जन सहभागिता का सबसे बड़ा उदाहरण है । जन सहयोग से ग्रामीण विकास का संदेश लोगों तक पहुंचाने के प्रतीक के रूप में गांव के मुख्य द्वार पर भव्य स्वागत द्वार बनाया गया है। यह धनोरा गांव की विकास गाथा को देश के कोने कोने में पहुचाने का काम कर रहा है।
गांव सामुदायिक भवन व पुस्तकालय भी
गांव के सभी परिवारों से विशेषकर सरकारी कर्मचारियों के नियमित आर्थिक योगदान से गांव में सामुदायिक भवन और पुस्तकालय का निर्माण पूरा कर लिया गया है। गाँव में 200 से 300 लोगों के बैठने की क्षमता वाला सामुदायिक भवन, स्मार्ट विलेज धनौरा की खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है ।
जल संरक्षण की मिसाल
जल संरक्षण और संवर्धन के लिए अतिक्रमण हटा कर एक ढाई किलो मीटर लंबी मानव निर्मित नहर का निर्माण और 8 परकोलेशन तालाबों का काम पूरा हो चुका है ।
परंतु सभी लोगों ने गांव के हित में अपने अपने खेतों से इस नाले को पुनर्जीवित करने में बहुत बड़ा सहयोग किया। एक अनुमान के अनुसार इस व्यवस्था से गांव की भूमि में प्रतिवर्ष 97.49 मिलियन लीटर पानी रिचार्ज होता है। प्रत्येक वर्ष वृक्षारोपण का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है। 'ग्रीन विलेज - क्लीन विलेजÓ का नारा स्मार्ट विलेज धनौरा की पहचान बन चुका है ।
रातभर जगमग रहते है गांव के रास्ते
गांव में सार्वजनिक स्थानों पर सोलर लाइट लगाने का काम भी पूरा हो चुका है । जिससे रात के समय में पूरा गांव दूधिया रोशनी से जगमगा उठता है । इससे अंधेरे के कारण महिलाओं और बच्चों को होने वाली परेशानी से भी पूरी तरह निजात मिल चुकी है ।
शिक्षा पर विशेष ध्यान
गांव के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देने की व्यवस्था भी की गई है। गांव व आसपास के होनहार बच्चों को गांव में ही स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए "उत्थान कोचिंग संस्थान" की शुरुआत हो चुकी है। आओ पढ़े-आगे बढ़े, शिक्षा पाओ-ज्ञान बढ़ाओ इत्यादि कार्यक्रमों की शुरुआत स्मार्ट विलेज धनौरा से की गई है ।
मृत्युभोज राशि से रचनात्मक कार्य
ग्रामीणों द्वारा शादी-ब्याह जैसे अन्य खुशी के आयोजनों के अवसर पर, गांव के ही युवक युवतियों के सरकारी नौकरी पाने अथवा नया उद्यम शुरू करने की खुशी में, गांव के विकास के लिए एक निश्चित राशि 'ग्राम विकास समितिÓ को दी जाती है । गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु पर मृत्युभोज के बजाय कोई भी रचनात्मक कार्य करने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। गांव की श्मशान भूमि पर स्वजन स्मृति में वृक्षारोपण किया जाता है ।
घरों पर प्रेरणादायक भित्ति चित्र
गांव की गलियों में, घरों की बाहरी दीवारों पर बने सुंदर और प्रेरणादायक भित्ति चित्र, स्लोगन और प्रेरक पंक्तियां गांव की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गांव के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा व सकारात्मक माहौल को जन्म देते हैं। पूरा गांव एक आर्ट गैलरी में तब्दील किया गया है।
क्राइम फ्री विलेज
वर्तमान में, गांव में कोई पुलिस केस दर्ज न होने के कारण, जिला प्रशासन द्वारा धनौरा गांव को "क्राइम फ्री विलेज" घोषित किया गया है। गांव में पूर्ण शराबबंदी व नशाखोरी के चलते गांव को 'अल्कोहल फ्री गांवÓ भी घोषित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने किया सम्मानित
16 जुलाई 2018 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्मार्ट विलेज धनौरा को "आदर्श ग्राम सम्मान" का खिताब देकर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। राजस्थान सरकार ने स्मार्ट विलेज मॉडल को अपनाकर, स्मार्ट विलेज योजना राज्य में शुरू की है । राज्य सरकार द्वारा धनौरा ग्राम पंचायत को राज्य स्तरीय पंचायत अवार्ड से भी नवाजा गया है और साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर जबलपुर में हुए कार्यक्रम में भी धनौरा गांव को शामिल किया गया।
डॉ. सत्यपाल मीना की अहम भूमिका
भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी डॉ. सत्यपाल सिंह मीना ने सोच बदलो-गांव बदलो की मुहिम के जरिए ग्रामीणों के आपसी सहयोग से गांव का विकास किया है। डॉ.मीना ने ग्रामीणों को जागरूक कर प्रत्येक घर में शौचालय, चौड़ी सड़के, वृक्षारोपण व सामुदायिक केन्द्र बनवाने में अहम भूमिका निभाई है।
Published on:
09 Feb 2021 01:56 pm
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