
प्रदेश में 32 फीसदी उमा स्कूल बगैर प्रधानाध्यापकों के संचालित
-प्रशासनिक व्यवस्था का बिखरा ताना-बाना, मॉनिटरिंग भी प्रभावित
-बीच सत्र में व्याख्याताओं, प्रिंसीपलों के ट्रांसफर से निशाने पर शिक्षा विभाग
धौलपुर. प्रदेश में 4100 वाइस प्रिंसीपलों को प्रधानाध्यापक बनाए जाने के बाद भी राज्य के 32 फीसदी उच्च माध्यमिक स्कूल बगैर प्रधानाध्यापकों के संचालित हो रहे हैं। स्कूलों में मुखिया नहीं होने के कारण जहां शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था का भी ताना-बाना बिखर रहा है। पदस्थापना नहीं मिलने से राज्य में कई स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी प्रधानाचार्य नहीं है, तो कहीं दो-दो हो गए हैं।
शिक्षा विभाग एक ओर जहां राज्य की शिक्षा को बेहतर बनाने की ढींगें हाकता है, वहीं दूसरी ओर खुद उसके कर्म, राज्य की शिक्षा को गर्त में ले जा रहे हैं। कारण एक हो तो गिनाएं...लेकिन इस समय सबसे ज्वलंत मुद्दा व्याख्यात और वाइस प्रिंसीपलों के प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत करने और स्थानांतरण का है। विभाग ने गत छह माह पहले राज्य के 4100 वाइस प्र्रिंसीपलों को प्रिंसीपल बनाया था, इनमें से 300 को ट्रांसफर पोस्टिंग दी जा चुकी है, लकिन अभी भी 3800 प्रधानाचार्य स्थापना को लेकर इंतजार कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि पदोन्नत प्रधानाचार्यों को बिना कार्य के वर्तमान पदों का वेतन भी दिया जा रहा है।
सैकड़ों स्कूल ऐसे जहां दो-दो प्रधानाचार्य
शिक्षा विभाग 4100 वाइस प्रिंसीपलों को प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नत कर उन्हें नई पदास्थापना देना भूल गया है। जिनमें कई को तो पोस्टिंग दे दी गई, लेकिन 3800 प्रधानाचार्य स्थापना को लेकर अब भी इंतजार कर रहे हैं। विभाग ने ऐसे प्रधानाचार्यों को वर्तमान कार्यरत स्कूल में ही प्रधानाचार्य का पद स्वीकृत कर दिया, अब ऐसी स्थिति में राज्य में सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं जहां दो-दो प्रिंसिपल कार्यरत हैं। जिस कारण कई स्कूलों में आपसी सामंजस्य भी बैठाना भारी पड़ता दिख रहा है।
पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं विभाग
शिक्षा विभाग स्कूलों में दैनिक गतिविधियों के साथ अन्य गतिविधियां तो कराता रहता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं दिखता। बीच सत्र में 6000 हजार प्रधानाध्यापकों और 6500 हजार व्याख्याताओं के ट्रांसफर इस बात को और बल देते हैं। तो वहीं पिछले दो माहों से शिक्षकों आइएसआर के कार्य में लगा रखा है। आइएसआर के कार्य के कारण शिक्षक स्कूलों से दूर हैं और बच्चे बगैर गुरु के ज्ञान कैसे लें?
परीक्षाएं शुरू... पर नहीं हो पाया निर्णय
शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के 17859 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 5800 रिक्त चल रहे हैं। नवीन शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 12 फरवरी से 10वीं,12वीं बोर्ड की परीक्षाएं भी प्रारंभ हो चुकी हैं। लेकिन प्रदेश के 32 फीसदी उच्च माध्यमिक स्कूल प्रिंसिपल विहीन हैं।
स्कूलों में यह आ रही समस्याएं
देखा जाए तो यथास्थान पदोन्नत होकर कार्य ग्रहण कर लेने से प्रधानाचार्य को हालांकि कोई आर्थिक नुकसान नहीं हो रहा है, लेकिन विद्यालय का पूरा ताना-बाना ही बदल गया है। विद्यालय मे प्रधानाचार्य समकक्ष होने के कारण न केवल आपसी समन्वय बिगड़ रहा है बल्कि जो अध्यापन कालांश पदोन्नति से पूर्व थे उनमें ही अध्ययन करवाने मे गुरेज किया जा रहा है, जिससे विद्यालयी वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
एक्सपर्ट व्यू.....
फोटोशिक्षा विभाग ने यह नई परिपाटी कायम कर रखी है। पदोन्नति के कई माह बाद पोस्टिंग दी जा रही है। जो कि सही नहीं है। ऐसी स्थिति में कई स्कूल शिक्षक और प्रधानाध्यापक विहीन हैं। जिससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है वहीं स्कूलों में आपसी सामंजस्य के साथ मॉनिटरिंग कार्यों में भी बाधा आती है। विभाग को पदोन्नति के सात दिन के अंतराल में नई पोस्टिंग दी जानी चाहिए।
-अरविन्द शर्मा, पूर्व शिक्षा अधिकारी धौलपुर
Published on:
15 Feb 2026 06:50 pm
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