
धौलपुर. राजघाट विद्यालय में लगा कक्षा में लगा स्मार्ट बोर्ड।
धौलपुर. शहर से लगे बीहड़ में बसे राजघाट गांव में करीब नौ साल पहले तक मूलभूत सुविधाएं तो दूर एक कच्चा रास्ता तक नहीं था। लेकिल आज इस गांव की सूरत बदल चुकी है। यहां अब बिजली, स्मार्ट स्कूल, आरओ, वाटर प्लांट, शौचालय तक सुविधा है। ये सब संभव हुआ है युवा चिकित्सक डॉ.अश्विनी पाराशर और उनके साथियों की बदौलत, जो साल २०१५ में दिवाली पर जयपुर से घर आए थे। वह जब साथियों के साथ यहां मिठाई और आवश्यक सामान वितरित करने गए तो वह स्थानीय हालात देख कर चौक गए। जिसके बाद उन्होंने सेव राजघाट कैंपेन की मुहिम चलाई और गांव में सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर उन्होंने सरकार से एक तरह की जंग छेड़ दी। इन सालों की गांव में काफी कुछ बदला है लेकिन युवा डॉक्टर की मुहिम आज भी जारी है।
शुरू की क्राउड फंडिंग, फिर बदलने लगी सूरत
साल २०१५ में डॉ.अश्विनी और उनके साथ जब इस गांव में पहुंचे थे तो एक सरकारी हैडपंप था जिसमें भी खारा पानी निकलता था। वहीं, प्राथमिक विद्यालय के नाम बीहड़ में एक कमरा बना हुआ था, जो भी बाढ़ के समय डूब जाता था। गांव में सुविधाएं जुटाने के लिए सभी ने मिलकर क्राउड फंडिंग की। जिसमें कुछ एनजीओ का भी सहयोग लिया। जिससे इन्होंने आरओ वाटर प्लांट, हर घर में सोलर लाइट, शौचालय निर्माण और गांव तक जाने के लिए कच्चा रास्ता तैयार करवाया। वहीं, डॉ.अश्विनी ने मूलभूत सुविधाओं को लेकर हाइकोर्ट में एक पीएलआई भी दायर कर रखी है।
हालात बदले तो २२ साल बाद गांव से निकली बारात
यहां के हालातों को देखते हुए कोई भी व्यक्ति भी अपनी बेटी की शादी इस गांव में नहीं करना चाहता था। लेकिन उस समय एमबीबीएस कर रहे अश्विनी के प्रयासों से यहां सुविधाएं पहुंची तो फिर लोगों का नजरिया भी बदला। साल २०१८ में पड़ोसी प्रदेश मध्यप्रदेश के गांव कुसैत के लिए युवक पवन की २२ साल बाद बारात रवाना हुई। इससे पहले गांव में साल १९९६ में एक युवक की शादी हुई थी।
पहुंची बिजली और फिर बनवाया स्कूल का नया भवन
शहर के पास और नगर परिषद क्षेत्र में होने के बाद भी राजघाट शाम होते अंधेरे में डूब जाता था। ग्रामीणों को सोलर लाइट उपलब्ध कराई लेकिन वह ज्यादा कारगार साबित नहीं हुई। जिस पर बिजली लाइन पहुंचाने के लिए जिला कलक्टर समेत अन्य अधिकारियों से बात की। लेकिन डिमांड नोटिस भरने के लिए राशि नहीं थी। जिस पर नॉर्वे में रह रहे भारतीयों से सहयोग लिया और डिमांड नोटिस राशि जमा करवाई। जिस पर बिजली के खंभे लगे और कनेक्शन दिलवाए। वहीं, खस्ताहाल स्कूल को लेकर भी नार्वे के १७ लाख रुपए का सहयोग लेकर दो कमरे और शौचालय का निर्माण करवाया।
अब स्मार्ट क्लास में बच्चे ले सकेेंगे शिक्षा
डॉ.पाराशर ने बताया कि स्थानीय बच्चों को अधिक से अधिक स्कूल से जोडऩे के लिए कुछ नया करने की जरुरत थी। जिस पर महाराष्ट्र की एक एनजीओ की मदद से विद्यालय में स्मार्ट क्लास रूम तैयार करवा कर स्मार्ट बोर्ड लगवाया है। उनका कहना है कि जिले का संभवताया यह पहला प्राथमिक विद्यालय है जिसमें स्मार्ट क्लास रूम है। उन्होंने बताया कि बच्चों को एनीमेशन विडियोज, लाइव स्ट्रीमिंग व ऑनलाइन लेक्चर्स की व्यवस्था करवा रहे हैं। साथ ही नॉर्वे के कुछ भारतीय सप्ताह में इन्हें पढ़ाएंगे और नई चीजें सिखाएंगे।
Published on:
16 Jan 2025 08:45 pm
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