
धौलपुर. बड़ी फील्ड में ऊबड़-खाबड़ जमीन पर लगी ओपन जिम। Image Source: ChatGpt
धौलपुर. जिस मैदान पर ध्यानचंद जैसे हॉकी खिलाड़ी आकर खेले और उनकी टीम हीरोज को स्थानीय टीम ने हार का स्वाद चखाया, अब उसी मैदान पर हॉकी सिमट रही है तो कुछ सरकारी सिस्टम ने भी लोकप्रिय खेल को बेगाने की तरह छोड़ दिया है। पंच गौरव योजना में जिस लाखों रुपए के बजट से खेल सामान आने की उम्मीद जगाए खिलाड़ियों को सिस्टम की लेट-लतीफी ने निराश किया है। करीब 50 लाख रुपए का खेल सामान धौलपुर समेत जिले के ब्लॉक स्तर पर खिलाड़ियों के पास पहुंचना था लेकिन बिना कुछ हाथ आए ही निकल गया। तय समय पर खरीद नहीं होने से खिलाड़ी मायूस हैं लेकिन अभी भी उन्हें प्रशासन से उम्मीद है कि वह कुछ करेंगे तो जरूर बेहतर होगा और सामान आएगा।
किसी समय शहर में स्टेशन रोड स्थित बड़ी फील्ड (इन्दिरा गांधी स्टेडियम) में हॉकी का जलवा हुआ करता था। कई नामी प्लेयर यहां शाम के समय खेलने और प्रशिक्षण देने के लिए आते थे। लेकिन वक्त के साथ हॉकी की गूंज मध्यम पड़ गई और भारी भरकम बजट वाले खेल आगे बढ़ गए। आज एक तरफ मैदान पर हॉकी के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं लेकिन यहां समतल जगह नहीं होने से खासी दिक्कतें है। रही सही कसर ओपन जिम ने कर दी। प्रशासन के साथ पहले मैदान को ऊंचा उठाने के लिए नगर परिषद के साथ वार्ता भी हुई लेकिन कुछ नहीं हुआ। संघ के सचिव रनवीर सिंह बताते हैं कि इंजीनियर आए थे और मैदान की स्थिति बताई थी। सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन बाद में अचानक से मामला खटाई में पड़ गया।
पंच गौरव योजना के तहत जिले की हॉकी खेल पर करीब 87 लाख रुपए बजट खर्च होना था। प्रशासन का कहना है कि बजट देरी से आया और फिर खेल विभाग से सामान की सूची ली और बैठकें भी की गई। स्पोर्ट्स सामान खरीद के लिए प्रक्रिया की गई और वर्क ऑर्डर होना था लेकिन समय कम होने से यह नहीं हो पाया है। उधर, हॉकी संघ का कहना है कि सामान को लेकर तेजी दिखाने की जरुरत थी, अगर समय पर राशि खर्च होती तो उनके भी खिलाड़ी आज बेहतर प्रशिक्षण ले रहे होते। कहा कि अभी भी देर नहीं हुई है। प्रशासन को उच्च स्तर पर वार्ता करनी चाहिए, जिससे बच्चों को सामान मिल सके।
हॉकी में किसी समय धौलपुर का नाम था। बाहर जाते हैं तो कई खिलाड़ी अब भी धौलपुर मैदान की हॉकी को लेकर पूछते हैं। बजट से सामान मिलता तो खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन करते। प्रशासन को इस पर पुनः कुछ करना चाहिए।
-साक्षी शर्मा, खिलाड़ी जूनियर हॉकी नेशनल
स्पोर्ट्स सामान देने वाली कंपनियों को समय से बुलाकर कार्य करवाना चाहिए था। बजट खर्च नहीं होने से इसमें सबसे अधिक नुकसान खिलाड़ियों का हुआ है। सामान उपलब्ध होता तो मैदान पर बच्चे और शानदार प्रदर्शन करते। अब जिला प्रशासन को इसमें प्रयास कर बजट का वापस मांगना चाहिए. जिससे पंच गौरव योजना का उद्देश्य सार्थक हो सके।
-अरुण सारस्वत, सचिव, राजस्थान हॉकी संघ
खिलाड़ियों के लिए सामान आता तो बेहतर तरीके से प्रशिक्षण लेने में आसानी होती। अभी जो भी सामान लाते हैं. वह खुद के खर्चे पर होता है। जब सुना था कि हॉकी को बजट मिला है तो खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन बाद में मालूम हुआ कि सामान नहीं आया तो निराशा हुई। सरकार को भी इस खेल के प्रति भी क्रिकेट की तरह ध्यान देने की जरूरत है।
-मानवेंद्र गुर्जर, खिलाड़ी जूनियर इंडिया कैंप
मुख्यालय पर पहले ही हॉकी को लेकर सीमित संसाधन हैं। फिर भी खिलाड़ी अपना पूरा दमखम लगा रहे हैं। हॉकी संघ भी मदद करता है। खिलाड़ी को हॉकी के साथ और सामान मिलेगा तो खुशी हुई लेकिन अब कुछ हाथ नहीं आया।
-अंशुल गुर्जर, खिलाड़ी इंडिया कैंप जूनियर
Updated on:
22 May 2026 10:01 am
Published on:
22 May 2026 10:01 am
