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धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व: खनन व्यापारियों ने सैकड़ों लोगों के रोजगार का उठाया सवाल

Dholpur-Karauli Tiger Reserve: dholpur, बाड़ी. सरकार की ओर से धौलपुर-करौली क्षेत्र को पांचवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किए जाने से जहां एक और लोगों में खुशी का माहौल है तो वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के चेहरे मायूस हैं।

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Dholpur-Karauli Tiger Reserve: Mining traders raised the question of employment of hundreds of people

धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व: खनन व्यापारियों ने सैकड़ों लोगों के रोजगार का उठाया सवाल

Dholpur-Karauli Tiger Reserve: dholpur, बाड़ी. सरकार की ओर से धौलपुर-करौली क्षेत्र को पांचवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किए जाने से जहां एक और लोगों में खुशी का माहौल है तो वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के चेहरे मायूस हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण उक्त क्षेत्र में होने वाला खनन व्यापार तथा स्थानीय लोगों का निवास है। जिसे लेकर लोगों ने प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार पर बिना सोचे समझे निर्णय लेने का आरोप लगाया। साथ ही निर्णय पर पुन: विचार करने ेके किए कहा है।

खनन व्यापार होगा प्रभावित, सैकड़ों लोगों को मिलता है रोजगार

टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित होने के बाद स्टोन एसोशिएशन के जिला अध्यक्ष मन्नालाल मंगल ने कहा कि उक्त क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की खनिज संपदा मौजूद है। जिससे तकरीबन 40 हजार लोग प्रतिदिन प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह संख्या सैकड़ो में है। अगर इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व जोन घोषित कर दिया जाएगा तो उन लोगों के लिए रोजगार के कोई भी अवसर नहीं बचेंगे। मंगल ने कहा कि धौलपुर क्षेत्र में पाए जाने वाला पत्थर उत्कृष्ट किस्म का है। जिसकी मांग विदेशों तक है उक्त व्यापार से बड़ी संख्या में युवा तथा व्यापारी जुड़े हुए हैं। रिजर्व क्षेत्र घोषित होने के बाद खनन व्यापार पूरी तरह से प्रभावित होगा तो वही मंगल ने दूसरी ओर उक्त क्षेत्र के गांव मोरोली, बिछिया, भमपुरा, डांग बसई आदि क्षेत्र के स्थानीय लोगों की रिहाइश पर भी सवाल उठाया।

क्षेत्र में करते हैं डेढ़ लाख लोग निवास

जिलाध्यक्ष ने जहां व्यापार को प्रभावित होने की बात कही तो वहीं दूसरी ओर कहा कि धौलपुर करौली डांग क्षेत्र में कई स्थानीय जनजातीय के साथ-साथ ग्रामीण लोग रहते हैं। इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित करने के बाद उन लोगों का क्या होगा जो पैदाइशी रूप से इस इलाके में रह रहे हैं। मंगल ने बताया कि तकरीबन डेढ़ लाख लोग ऐसे हैं जो धौलपुर जिले में मात्र इस क्षेत्र में निवास करते हैं। उनके लिए प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई भी रास्ता नहीं सुझाया गया है।

सैकड़ों को मिलता है रोजगार

जिले में न केवल पत्थर व्यवसाय बल्कि धौलपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में पशुधन है। जिनसे प्रदेश सरकार की तीन बड़ी डेयरी संचालित होती हैं। उक्त व्यापार से बड़े पैमाने से ग्रामीण जुड़े हुए हैं। अगर उक्त क्षेत्र को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा तो पशुओं के लिए चारागाह नहीं बचेगा। ऐसे में सीधे-सीधे तकरीबन 5 से 10 हजार लोग प्रभावित होंगे।

करोड़ों की राशि से पुल निर्माण का फिर औचित्य क्या

टाइगर रिजर्व क्षेत्र पर प्रश्न चिन्ह उठाते हुए डांग क्षेत्र के ग्रामीण नागरिक ने कहा कि एक और केंद्र सरकार की ओर से बिना सोचे समझे इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया है। वहीं प्रदेश सरकार ने करोड़ों की लागत से इस क्षेत्र में दूरी कम करने के लिए पुल निर्मित किए जा रहे हैं। कहा कि प्रदेश सरकार ने तकरीबन 80 करोड़ की लागत से चंबल पर सेवर पुल का निर्माण किया जा रहा है जिससे कई गांव सीधे.सीधे मुख्यालय से जुड़ जाएंगे। लेकिन टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित होने के बाद उक्त पुल का उपयोग आम नागरिक कैसे कर पाएंगे। उधर, कांग्रेस सेवा दल के नेता रामेंद्र सिंह मीणा ने कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। आरोप है कि 10 वर्ष से धौलपुर करौली सांसद बिना किसी क्रियाकलाप के उदासीन बने हुए हैं। न तो उन्हें क्षेत्र के लोगों की जनसंख्या के बारे में पता है और न ही उनके निवास एवं संस्कृति के बारे में। उक्त निर्णय लेने से पूर्व सांसद को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष प्रेषित करनी चाहिए थी और उक्त क्षेत्र से प्रभावित होने वाले लोगों के लिए विकल्प रखना चाहिए।

- केंद्र व प्रदेश सरकार दोनों से ही आग्रह है कि इस घोषणा को होल्ड कर अभी स्थानीय लोगों से सर्वे करना चाहिए। उनकी मर्जी के मुताबिक ही उक्त क्षेत्र को टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लाना चाहिए।- मुन्नालाल मंगल, जिलाध्यक्ष, स्टोन एसोसिएशन धौलपुर

- धौलपुर करौली डांग क्षेत्र में कई स्थानीय जनजातीय के साथ-साथ ग्रामीण लोग रहते हैं। इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित करने के बाद उन लोगों का क्या होगा जो पैदाइशी रूप से इस इलाके में निवास करते हैं।

- रामेन्द्र मीणा, वरिष्ठ पदाधिकारी, कांग्रेस सेवादल

- प्रदेश सरकार की ओर से तकरीबन 80 करोड़ की लागत से चंबल पर सेवर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। जिससे कई गांव व सीधे मुख्यालय से जुड़ सकेगा। लेकिन टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित होने के बाद उक्त पुल का उपयोग आम नागरिक कैसे कर पाएंगे।- हरिओम बंसल, समाज सेवी