
धौलपुर से एक कविता रोज.....बेटियां
धौलपुर से एक कविता रोज.....बेटियां
अपने माता - पिता की लाडली होती हैं बेटियां।
जनकदुलारी लक्ष्मी से प्यारी होती हैं बेटियां।।
घर में सब'की प्यारी, मा की दुलारी होती हैं बेटियां।
अपने भाई की सांसों की डोर होती हैं बेटियाँ ।।
अपने माता पिता को छोड़कर खुशियों से दूर।
हमारे - तुम्हारे घर बहू बनकर रहती हैं बेटियाँ ।।
अपने ऊपर सबका हर जुल्म सहती हैं बेटियाँ ।
मां-बाप,भाई-बहन की हर बात मानती हैं बेटियाँ ।।
"प्रवीन" तब यह पूंछता की,
समाज में आने से पहले ही क्यों मारी जाती हैं बेटियां।
दहेज प्रथा के बीच प्रताड़ित होकर हर जुल्म हैं बेटियाँ।।
हर भाई की कलाई सूनी रहती है ,
जब घर और समाज ना हो बेटियाँ।।
अपने माता - पिता की लाडली होती हैं बेटियां।
कवि :- प्रवीन मुदगल
अजीतापुरा, धौलपुर, राजस्थान
मो. न. :-8475958084
इस कविता के लेखक प्रवीण मुदगल गांव अजीतपुरा जिला धौलपुर राजस्थान के रहने वाले हैं इन्होंने यह कविता धौलपुर पत्रिका के लिए भेजी है
Published on:
14 Oct 2020 05:23 pm
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