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रक्तवीरों का दान…बचाए मासूम मरीजों की जान

बदलते समय के साथ लोगों में रक्तदान को लेकर भी जागरूकता आई है। यही कारण है कि पिछले दस वर्षों में रक्तवीरों के आंकड़ों में साल दर साल इजाफा हुआ है।

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रक्तवीरों का दान...बचाए मासूम मरीजों की जान Donation by blood donors... saving the lives of innocent patients

धौलपुर. बदलते समय के साथ लोगों में रक्तदान को लेकर भी जागरूकता आई है। यही कारण है कि पिछले दस वर्षों में रक्तवीरों के आंकड़ों में साल दर साल इजाफा हुआ है। इन वर्षों के आंकड़ों को देखें तो 14,131 रक्तदाताओं ने केवल केम्पों के माध्यम से लगभग 14 हजार यूनिट रक्तदान किया है।

जिससे न जरूरतमंद की मदद की गई, बल्कि कई लोगों की नया जीवनदान भी मिला।एक समय था जब लोग रक्तदान करने से कतराते थे, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता मुहिम और युवाओं का रक्तदान को लेकर बढ़ते रुझान ने ब्लड को लेकर आ रही परेशानियों को हल कर दिया है। 2016 से लेकर गत अक्टूबर माह तक 324 कैम्पों का आयोजन किया गया। कैम्पों के आयोजन को लेकर पहली बार 26 कैम्प आयोजित किए गए थे।

जिसके बाद से गत वर्ष को छोड़ दिया जाए तो प्रति वर्ष कैम्पों के आंकड़े बढ़ते गए और रक्तदाताओं के। इन दस वर्षों में 14,131 रक्तदाताओं ने केवल केम्पों के माध्यम से लगभग 14 हजार यूनिट रक्तदान किया है। इन केम्पों का आयोजन अस्पताल से लेकर देहातों तक में किया गया। जिसमें युवाओं ने रक्तदान के प्रति अपना खुलकर समर्थन दिया।

कैम्पों में युवा निभा रहे बढ़ चढकऱ भूमिका

सर्वप्रथम केम्पों का आयोजन 2016 में किया। इस वर्ष 26 कैम्प आयोजित किए गए थे, जिनमें केवल 677 लोगों ने रक्तदान किया। हालांकि शुरुआत माहौल में इतने लोगों के रक्तदान को भी खूब सराहा गया था, लेकिन अगले वर्ष यानी 2017 में रक्तदाताओं की संख्या एक हजार के पार पहुंच गई और 35 कैम्पों में 1049 लोगों ने रक्तदान किया। तो 2018 में आयोजित 31 कैम्पों में रक्तदाताओं का जोश देखते ही बना इस दौरान 1364 लोगों ने मासूम जिंदगियां बचाने अपना रक्त दान किया।

हालांकि इन दस वर्षों में सबसे ज्यादा रक्तदान 2023 में किया, इस वर्ष जगह-जगह 46 कैम्प लगाए गए थे, जिनमें 2359 रक्तवीरों ने अपना खून दान किया था। देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि कैम्पों के आधार पर साल दर साल रक्तदाताओं की संख्या में इजाफा होता गया है। इन कैम्पों का आयोजन शहर से लेकर देहातों और जिला मुख्यालय स्थित ब्लड बैंक में भी किया गया।

51835 मरीजों के परिजन और रिश्तेदारों ने दिया खून

एक ओर जहां कैम्पों के माध्यम से मासूम मरीजों को जीवनदान देने रक्तदान किया गया। वहीं जिला ब्लड बैंक में अपने मरीजों को रक्त देने में मरीजों के परिजन और रिश्तेदार भी पीछे नहीं रहे। पिछले दस सालों में 28519 मरीजों के परिजनों ने और 23316 मरीजों के रिश्तेदारों ने लगभग 50 हजार यूनिट रक्त अपना ब्लड बैंक में जमा कराया। जिसका उपयोग मरीजों की जान बचाने के लिए किया गया। देखा जाए तो ब्लड बैंक में कैम्पों और मरीजों के परिजन, रिश्तेदारों के माध्यम से 65,142 यूनिट रक्त आया।

61,939 यूनिट रक्त का प्रयोग हुआ जिला अस्पताल और एमसीएच में

जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में जहां पिछले दस सालों में कैम्पों और मरीजों के परिजन, रिश्तेदारों के माध्यम से 65,142 यूनिट रक्त आया। तो वहीं 61,939 यूनिट रक्त पिछले दस सालों में जिला अस्पताल सहित एमसीएच में जरूरतमंद मरीज को दिया गया और उसकी जान बचाई गई। इन दस सालों में सबसे ज्यादा रक्त की आवश्यकता 2023 में पड़ी थी, तब 8227 यूनिट रक्त अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए दिया गया था।

नर्सिंग होमों को 3205 यूनिट रक्त का किया विक्रय

स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल और एमसीएच में जहां इस रक्त से कई मरीजों की जान बचाई तो वहीं शहर के नर्सिंग होमों में इस रक्त का विक्रय का विभाग को आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले दस सालों में विभिन्न नर्सिंग होमों में 1500 रुपए यूनिट के दाम से 3205 यूनिट रक्त विक्रय किया गया। यानी रक्त विक्रय करने से विभाग ने 48 लाख 75 हजार रुपए की आर्थिक आय भी अर्जित की।