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विद्युत उपभोक्ता 450, बकाया एक करोड़ 35 लाख, फिर भी सप्लाई जारी

- बकाया बिल वसूलने के प्रयास से निगम ने बनाई दूरी, विजीलेंस भी चुप - ग्रामीण क्षेत्र में कार्रवाई से बचता डिस्कॉम प्रशासन

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विद्युत उपभोक्ता 450, बकाया एक करोड़ 35 लाख, फिर भी सप्लाई जारी Electricity consumers 450, outstanding amount Rs 1 crore 35 lakh, still supply continues

- बकाया बिल वसूलने के प्रयास से निगम ने बनाई दूरी, विजीलेंस भी चुप

- ग्रामीण क्षेत्र में कार्रवाई से बचता डिस्कॉम प्रशासन

dholpur, राजाखेड़ा. एक ओर केंद्र और राज्य सरकार विद्युत तंत्र को सुधारने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च करने और वितरण तंत्र को नवीन कंपनियों में बांट कर जिम्मेदार बनाने का दावा कर रही हैं। लेकिन इसके बाद भी डिस्काम के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। जिसके चलते बड़ी स्तर पर बिजली सप्लाई छीजत में जा रही है और शेष का भुगतान ही नहीं मिल पाता है। फरवरी और मार्च महीने में वसूली अभियान के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से ट्रांसफार्मर उठा लिए जाते हैं जिसका खामियाजा इमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को भोगना पड़ता है। जबकि विद्युत चोर इधर-उधर से बिजली लेकर काम चला लेते हैं। ऐसे में लोग नए कनेक्शन भी नहीं लेते और जो उपभोक्ता है वे भी बिल भरने से कतराते हैं।

निगम खुद बढ़ा रहा घाटा

निगम की वसूली प्रक्रिया के हालात ये है कि शहरी क्षेत्र के गांव अम्बरपुर में ही मात्र 450 उपभोक्ताओं पर ही बकाया राशि एक करोड़ 35 लाख से अधिक का बिल बकाया है। लेकिन निगम न तो बकायादारों के कनेक्शन काटे और न ही इस गांव में कभी विजिलेंस टीम ही पहुंची। ये एक उदाहरण बतौर है। विद्युत निगम की कार्यशैली पर इससे सवाल खड़े होते हैं। बिल लगातार बढ़ रहा है लेकिन कभी वसूली के प्रयास नहीं हुए। इसका नतीजा डिस्कॉम को लगातार घाटा हो रहा है।

ट्रांसफार्मर जलता है तो खुद करवा लेते हैं मरम्मत

इस गांव में 5 केवी के 86 ट्रांसफॉर्मर, 10 के वी के 18, थ्री फेस 16 केवी के 8 ट्रांसफॉर्मर हैं। जबकि कृषि कंनेक्शनों के लिए 61 ट्रांसफॉर्मर 25 केवी थ्री फेस के स्थापित हैं। जिन पर कुल 450 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए हैं। इनमें से मात्र 377 घरेलू, एनडीएस के 5, कृषि के 68 कनेक्शन जारी किए हैं। जबकि इससे कई गुना परिवार बिना कनेक्शन के ही विद्युत उपभोग कर रहे है। लेकिन निगम प्रशासन ने अभी तक न तो बिलों की बकाया राशि को जमा करने के लिए ही कोई प्रयास किया और न ही विजिलेंस कभी चोरी पर लगाम लगाने का प्रयास किया। एक ग्रामीण ने बताया कि जब कोई ट्रांसफॉर्मर जल जाता है तो लोग उसे निगम को नहीं देते क्योंकि निगम बिल क्लियर करके ही बदल कर देता है। ऐसे में सभी लोग जो विद्युत लेते है वे चंदा करके अपने स्तर पर ही ट्रांसफॉर्मर की कॉइल्स को बदलवा कर वापस लगवा लेते हैं।

अनेक ईंट भट्टे पर कनेक्शन नहीं

गौरतलब रहे कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में ईंट भ_े भी संचालित हैं। लेकिन सभी कृषि विद्युत की लगभग मुफ्त मिल रही बिजली से ही भट्टे संचालित कर लाखों रुपए प्रतिमाह की बिजली चोरी कर सरकार को बड़ी चपत लगा रहे हैं। लेकिन आम आदमी को आंखे दिखाने वाले निगम अधिकारी इन पर लगाम लगाने में फेल साबित हुए हैं।

इलाका शहरी क्षेत्र में आता है लेकिन ग्रामीण फीडर पर है। संबंधित अधिकारी छुट्टी पर है। उनके आते ही जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी।

- प्रशांत यादव, कनिष्ठ अभियंता शहर राजाखेड़ा

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