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दावे में उलझी…50 हजार लोगों की उम्मीद, हाइकोर्ट करेगा फैसला

-नर्सरी क्षेत्र में बनने वाले पंप हाउस निर्माण में ट्विस्ट जमीन पर माफिया का दावा -मामला हाइकोर्ट में, नगर परिषद रख रही अपना पक्ष, स्टे की कोशिश -तीन बीघा जमीन पर 12.19 करोड़ की लागत से बनना था पंप हाउस धौलपुर. 50 हजार लोगों की उम्मीद यानी…नर्सरी क्षेत्र में बनने वाला पंप हाउस दावा और […]

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दावे में उलझी...50 हजार लोगों की उम्मीद, हाइकोर्ट करेगा फैसला Entangled in the claim...hope of 50 thousand people, High Court will decide

-नर्सरी क्षेत्र में बनने वाले पंप हाउस निर्माण में ट्विस्ट जमीन पर माफिया का दावा

-मामला हाइकोर्ट में, नगर परिषद रख रही अपना पक्ष, स्टे की कोशिश

-तीन बीघा जमीन पर 12.19 करोड़ की लागत से बनना था पंप हाउस

धौलपुर. 50 हजार लोगों की उम्मीद यानी...नर्सरी क्षेत्र में बनने वाला पंप हाउस दावा और विवाद में उलझ गया है। दरअसल जिस जमीन पर पंप हाउस का निर्माण होना था, उस जमीन पर किसी अन्य ने अपनी जमीन होना का दावा कोर्ट में किया है। रही सही कसर परिषद के अधिकारी पूरा कर रहे हैं जो कोर्ट में पैरवी के दौरान अपना पक्ष भी मजबूती से नहीं रख पा रहे, अब आने वाला समय ही बताएगा कि नर्सरी क्षेत्र की उस जमीन पर पंप हाउस बनेगा या नहीं?

शहर की लगभग 30 कॉलोनियों में होने वाले जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नगर परिषद ने नर्सरी क्षेत्र में 12.19 करोड़ की लागत से पंप हाउस का निर्माण कराने की योजना बनाई थी। जिसका प्रस्ताव पास होने के बाद टेंडर प्रक्रिया भी पूर्ण हो गई। पंप हाउस निर्माण का कार्य डीआर अग्रवाल जयपुर को दिया गया। परिषद ने पंप हाउस निर्माण के लिए नर्सरी शनि देव मंदिर के सामने तीन बीघा जमीन का भी चयन किया, लेकिन मामले में नया ट्विस्ट तब आया जब जमीन पर एक अन्य पार्टी ने अपना होने का दावा कोर्ट में कर दिया। अब जमीन पर विवाद की स्थिति निर्मित होने के कारण जहां पंप हाउस निर्माण का कार्य अधर पर लटक गया, तो वहीं परिषद हाइकोर्ट में मामले को लेकर पैरवी के दौरान अपना पक्ष रख रही है। हाइकोर्ट में मामले को लेकर अभी तक दो सुनवाई भी हो चुकी हैं और परिषद कोर्ट से स्टे लेने की अपील कर रहा है।

50 हजार लोगों की मुश्किलें होती दूर...

शहर में होते जलभराव की समस्या पिछले तीन वर्षों से अधिक सामने आई है। जिसको लेकन परिषद अपने स्तर से कार्य भी कर रहा है। इसी कड़ी में नर्सरी क्षेत्र में पंप हाउस निर्माण कराने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया। जिससे जहां शहर की 30 से ज्यादा कॉलोनियों में रहने वाले करीब 50 हजार लोगों को गंदे पानी के भराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से राहत मिलेगी। प्रोजेक्ट को मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया के भी तीन-चार माह भी हो चुके हैं, लेकिन जमीन विवाद के कारण मामला अधर में लटक गया है जिस कारण अभी तक वर्क आर्डर भी जारी नहीं हो पाए।

12.19 करोड़ रुपए से होना है निर्माण

नर्सरी क्षेत्र में बनने वाले पंप हाउस का निर्माण 12.19 करोड़ रुपए में कराया जाना है। निर्माण कार्य जयपुर की फर्म को दिया गया है, पंप हाउस का निर्माण कार्य एक साल में पूरा करने का कॉन्ट्रेक्ट है। पंप हाउस निर्माण के दौरान आधुनिकता का ध्यान रखा जाएगा, जिसको लेकर आधुनिक मशीनें और हाई कैपेसिटी मोटर लगाई जाएंगी। इनकी मदद से कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे पानी को पंप करके मुख्य सीवेज लाइन तक पहुंचाया जाएगा। इससे सीवर लाइनों पर दबाव कम होगा और पानी के ओवरफ्लो की समस्या नियंत्रित रहेगी।

इन 30 कॉलोनियों को मिलेगा फायदा

नगर परिषद के अनुसार पंप हाउस निर्माण से शहर की मित्तल कॉलोनी, सीताराम कॉलोनी, शिवनगर पोखरा, नारायन कॉलोनी, शंकर कॉलोनी, कुशवाह कॉलोनी, दारा सिंह नगर, हाउसिंग बोर्ड, मंगल विहार, महिंद्रा अपेक्स, हुंडावाल नगर, नारायन विहार, जगदंबा कॉलोनी, महमदपुर, अयोध्या कुंज, राम कुंज, मधुवन कॉलोनी, भोगीराम कॉलोनी, जगदीश कॉलोनी, कमला कॉलोनी, आनंद नगर, मानसरोवर कॉलोनी, उमा नगर कॉलोनी, पुष्पांजलि विहार कॉलोनी, गणेश नगर, , मनोहर विहार, आदर्श नगर, पुष्पांजलि विहार सैकंड, मोहन कॉलोनी, शारदे नगर सहित गोकुल चंदन विहार की करीब 50 हजार की आबादी को लाभ मिलेगा।

एसटीपी का कार्य भी अधर में...लोग परेशान

शहर में तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन का कार्य भी दो साल बाद अधर में लटका हुआ है। 70 करोड़ की लागत से बनने वाले एसटीपी प्लांट का अपग्रेडशन 10 से 18 एमएलडी क्षमता बढ़ाने का सिविल कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन मैकेनिकल उपकरण न लगने से काम रुका हुआ है, जिससे 66 कॉलोनियों में सीवर और गंदे पानी का भयंकर संकट पैदा हो गया है। परिषद अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी का सिविल कार्य पूर्ण है, वहीं प्लांट में लगने वाली मशीनें भी आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक मशीनों को लगाने का कार्य रुका हुआ है। यह कार्य बजट का अभाव और ठेकेदार को भुगतान न होने के कारण रुका पड़ा है। ज्ञात हो कि शहर के चेम्बरों में बहने वाले दूषित पानी को खेती योग्य बनाने के लिए तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला रखी गई थी, लेकिन कुछ खामियों के चलते एसटीपी प्लांट का अत्याधुनिक तरीके से पुन: निर्माण कराया जा रहा है, दो सालों से जनता इसके पूर्ण होने की राह देख रही है।

मजबूती से रख रहे पक्ष

नगर परिषद में कोर्ट के मामले देखने वाले जेएलओ नरेश रावत ने बताया कि नर्सरी क्षेत्र में बनने वाले पंप हाउस जमीन को लेकर हाइकोर्ट में मामला चल रहा है। परिषद मजबूती के साथ अपना पक्ष हाईकोर्ट के सामने रख रहा है, अभी तक दो सुनवाई हो चुकी हैं। परिषद मामले में स्टे लेने की कोशिश कर रहा है।