
खाद की किल्लत: खाद विक्रेताओं का किसानों को टका सा जवाब- अभी खाद नहीं है
खाद की किल्लत: खाद विक्रेताओं का किसानों को टका सा जवाब- अभी खाद नहीं है
-किसान भटक रहा एक से दूसरी दुकान
- रबी की फसलों के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता- कृषि विभाग बता रहा उपलब्धता, दुकानों पर नहीं मिल रही खाद
#Fertilizer shortage news: dholpur. रबी फसल बुआई के चलते इन दिनों किसानों को खाद की आवश्यकता है लेकिन उसे बुआई के लिए जरूरी यूरिया नहीं मिल पा रही है। जबकि कृषि विभाग और आला अधिकारी कृषि विक्रेता समेत अन्य केन्द्रों पर यूरिया की उपलब्धता का दावा कर रहे हैं।
जबकि हकीकत इसके उलट है। किसान दुकानों के चक्कर काट रहा है और उसे खाद नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। खाद नहीं मिलने गेहूं की फसल में पानी दे चुके किसानों को फसल के खराब होने की आशंका सता है। उधर, कृषि विभाग के अधिकारी सोमवार तक इफको की करीब 13 हजार से अधिक कट्टों की रेक धौलपुर पहुंचने की बात कह रहे हैं। जो जिले के 22 खाद विक्रेता और जीएसएस व केवीएसएस पर पहुंचाई जाएगी।
मुनाफा कमाने में लगे विक्रेता, किसान परेशान
खाद की बात की जाए तो यह इस समय किसानों के लिए यह सबसे जरूरी काम हो गया है। किसान खाद की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर चक्कर काट रहा है। लेकिन उससे खाद नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, कुछ दिन पहले मिला था लेकिन इसके बाद भी किसान खाद मिलने वंचित रह गए। किसान खाद विक्रेताओं की दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, जिस पर उन्हें केवल एक ही जवाब मिलता है अभी रैक नहीं आई है। वहीं, किसानों का आरोप है कि विक्रेता रैक आने पर आधा खाद बांटने के बाद शेष को ब्लैक करता है। वहीं, जो खाद मिलती है उसे भी वह अधिक राशि वसूल कर बांट रहा है। जबकि सरकार ने एक यूरिया बैग की राशि करीब 270 रुपए तय कर रखी है जबकि विक्रेता उसके 350 से 400 रुपए वसूल कर रहे हैं।
वितरण के समय नहीं दिया जा रहा ध्यान
वहीं, खाद वितरण के समय कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं देने से खाद विक्रेता अपने हिसाब से वितरण कर रहे हंै। मॉनिटरिंग नहीं होने से विक्रेता तय मूल्य से अधिक राशि किसानों से वसूल रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है तो उसे खाद देने से मना कर देते हैं। वह दुकानों पर खाद्य की स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट सूचना नहीं लगाई जा रही है जिससे किसान को मालूम ही नहीं पड़ता है कि खाद कब मिलेगी। गत वर्ष खाद की किल्लत को देखते हुए जिला प्रशासन ने खाद को पुलिस की मदद से रिजर्व पुलिस लाइन से बंटवाई थी, जिससे किसानों को तय मूल्य पर खाद मिल पाई थी।
नैनो यूरिया लेने से कतरा रहे किसान
केन्द्र सरकार ने इफको के ठोस यूरिया के साथ तरल यूरिया (नैनो) को किसानों को एक बैग यूरिया के साथ लेना अनिवार्य किया है। नैनो 500 की बोतल में उपलब्ध है। लेकिन जिले में किसान नैनो यूरिया को लेने से बच रहा है। जबकि नैनो यूरिया को अन्य जिलों में किसान आसानी से ठोस यूरिया के साथ ले जा रहे हैं। नैनो यूरिया नहीं लेने की एक वजह यह भी है कि किसानों के साथ पास इसको इस्तमाल करने के लिए जरूरी संसाधनों की कमी है। नैनो यूरिया मैन्युअल स्प्रे मशीन, ट्रेक्टर स्प्रेयर्स के जरिए इस्तमाल होता है लेकिन यह कम किसानों के पास ही है।
50 किलो बैग के बराबर है नैनो यूरिया
केन्द्र सरकार की ओर से खेती में नैनो यूरिया को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी किसान अभी भी ठोस यूरिया पर अधिक विश्वास करते हैं। जिसकी वजह से बाजार में इसकी डिमाण्ड अधिक है। उधर, कृषि अधिकारियों का कहना है कि नैनो यूरिया की 500 एमएल की बोतल ठोस यूरिया के 50 किलो बैग के बराबर कार्य करती है। साथ ही इसका दाम ठोस यूरिया के मुकाबले कम है। नैनो यूरिया स्प्रे के जरिए पौधे को जल्दी फायदा पहुंचाता है लेकिन इसके बाद भी किसान इसके इस्तमाल से बच रहा है। जिले में यह खुदरा विक्रेता, क्रय विक्रय सहकारी समिति व ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर आसानी से उपलब्ध है।
- कृषि अधिकारियों को खाद विक्रेताओं की दुकानों की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दे रखे हैं। खाद उपलब्ध नहीं है तो दुकानदारों को डिस्प्ले करना होगा, जिससे किसान को मालूम हो सके। साथ ही अधिकारियों के नम्बर भी अंकित करने के निर्देश दिए हैं जिससे किसी किसान को कोई परेशानी आती है तो वह संपर्क कर सकता है।
- अनिल अग्रवाल, जिला कलक्टर धौलपुर
- किसानों को ठोस यूरिया के साथ नैनो (तरल) यूरिया का भी इस्तमाल कर सकते हैं। यह उससे बेहतर और किसानों का खर्चा भी कम आएगा। यह 500 एमएल नैनो एक 50 किलो के कट्टे के बराबर हैं लेकिन किसान उसे लेने से बच रहे हैं। जिले में खाद की ब्लैक होने जैसी स्थिति नहीं है। अलग-अलग कंपनियां की खाद लगातार पहुंच रही है। लगातार खाद्य वितरण पर निगाह रखी जा रही है।- विजय सिंह डागुर, उपनिदेशक कृषि विस्तार धौलपुर
-----क्या कहते हैं किसान
- यूरिया की जरुरत है, मनियां में खाद नहीं मिली तो धौलपुर कुछ विक्रेताओं पर लेेने पहुंचे लेकिन सभी खत्म होना बता रहे हैं। विक्रेताओं पर यूरिया मौजूद है लेकिन वह उसे महंगे दाम पर बेच कर पैसा कमाने में लगे हुए हैं। सरकारी रेट पर यूरिया मिलना मुश्किल हो गया है। प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
- बनवारी, किसान मनियां
- दो बीघा खेत में सरसों व गेहंू की बुआई कर रखी है। पानी दे चुके हैं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। कई खाद विक्रेताओं पर पता कर लिया, सब मना कर देते हैं। जबकि कई किसान ब्लैक में खाद लेकर जा रहे हैं। खाद नहीं मिलने से फसल खराब होने की आशंका बनी हुई है।- रामनाथ, किसान मौरोली
- खेत में सरसों की फसल की बुआई की थी। अब खाद डालने का समय आ गया लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। वह कई दिनों से लगातार खाद लेने आ रहे हैं लेकिन खाद विक्रेता मना कर देते हैं। खाद उपलब्ध होने पर दुकानदार तय मूल्य से अधिक राशि वसूल रहे हैं। मना करने पर खाद देने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में मजबूरन अधिक राशि देनी पड़ती है।
- वीरेन्द्र, किसान औडेला
Published on:
05 Dec 2022 07:16 pm
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