
-सत्र प्रारंभ हुए छह माह बीता स्कूलों को नहीं मिली कंपोजिट ग्रांट राशि
-जिले के347उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संचालन पर प्रभाव
-दिसंबर तक ग्रांट में से 70 प्रतिशत राशि करनी होती है खर्च
धौलपुर. शिक्षा सत्र समाप्त होने में केवल दो माह का ही समय शेष है, लेकिन अभी तक उच्च माध्यमिक विद्यालयों को कंपोजिट स्कूल ग्रांट की एक भी किस्त नहीं मिली है। जिस कारण जिले के 347 स्कूलों के संचालन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों को चॉक-डस्टर, झाड़ू-पोछा, साबुन, स्टेशनरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकार से कोई राशि नहीं मिली है।
कंपोजिट स्कूल ग्रांट राशि नहीं मिलने से मजबूरन संस्थाप्रधान और शिक्षक उधारी लेकर या शाला विकास कोष से राशि निकालकर काम चला रहे हैं, जबकि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के प्रावधानों के अनुसार सत्र की शुरुआत में मिलने वाली कंपोजिट स्कूल ग्रांट की 70 प्रतिशत राशि दिसंबर तक खर्च करना अनिवार्य है। इसके बावजूद धौलपुर जिले के ३४७ और प्रदेशभर के करीब 20 हजार के करीब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों को अब तक यह ग्रांट राशि जारी नहीं हुई है।ग्रांट नहीं मिलने से कई विद्यालयों में बिजली-पानी के बिल, समाचार पत्र, स्टेशनरी और अन्य दैनिक आवश्यकताओं का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। कई जगह नियमित कार्य या तो ठप पड़े हैं या फिर शिक्षक अपनी जेब से खर्च वहन कर रहे हैं। वहीं जिले में एक दर्जन पीएमश्री सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें जुलाई से लाखों रुपए का बजट दिया गया है कि इन स्कूलों के संस्था प्रधानों को बजट को कैसे खर्च किया जाए इसकी मशक्कत करनी पड़ रही है।
रंगाई पुताई और पौध रोपण पर खाली हुआ कोष
शिक्षा विभाग एक तरफ स्कूल खुलते ही नामांकन के हिसाब से पौधे खरीदने और दीपावली से पूर्व सभी स्कूलों की रंगाई पुताई के साथ छोटी-मोटी मरम्मत के कार्य शाला विकास कोष से करा कर स्कूलों का बजट खपा दिया। काफी स्कूलों में सीमित संसाधनों वाला यह कोष अब लगभग खाली हो चुका है, जिससे नियमित खर्चों के लिए भी स्कूलों के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बची है, जबकि स्कूलों को अभी परीक्षाएं भी करानी और स्कूलों का संचालन भी करना है।
प्राइमरी, मिडिल स्कूलों को 50 फीसदी राशि मिली
शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते इस बार जिले के 774 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों को भी पूरी ग्रांट नहीं मिलने से जरूरी कार्य अटक गए हैं, जबकि इन स्कूलों के पास आय का कोई अन्य स्रोत भी नहीं होता हैं, लेकिन राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से दो चरणों में केवल 50 फीसदी कंपोजिट ग्रांट की राशि ही मिली है। गौरतलब है कि कंपोजिट स्कूल ग्रांट विद्यालयों में नामांकन के आधार पर दी जाती है। इसमें 1 से 30 छात्र पर 10 हजार रुपए, 31 से 100 छात्र पर 25 हजार रुपए, 101 से 250 छात्र पर 50 हजार रुपए, 251 से 1000 छात्र पर 75 हजार रुपए और 1000 से अधिक छात्र पर 1 लाख रुपए मिलते हैं। इस राशि का उपयोग स्वच्छता, पेयजल, स्टेशनरी और शैक्षिक सामग्री की व्यवस्था के लिए किया जाता है।
कैसे हों खिलाड़ी तैयार खेल अनुदान भी अटका
कंपोजिट ग्रांट के साथ-साथ खेल अनुदान की राशि भी अब तक जारी नहीं हुई है। राप्रावि को 5 हजार, राउप्रावि को 10 हजार और राउमावि को 25 हजार रुपए देने का प्रावधान है। जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं समाप्त हो जाने के बावजूद राशि नहीं मिलने से खेल गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। अब जब स्कूलों में खेल अनुदान नहीं मिलने से जहां खेल गतिविधियां प्रभावित होती हैं वहीं बच्चों के शारीरिक क्षमता में भी कमी आती है।
प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को 50 फीसदी राशि जारी की जा चुकी है, हालांकि उच्च माध्यमिक स्कूलों को ग्रांट राशि नहीं मिल पाई है। यह राशि केन्द्र सरकार से आती है जिसके लिए राज्य सरकार ने केन्द्र मांग प्रपोजल तैयार कर भेजा है। जैसे ही राशि स्वीकृत होती है, स्कूलों को जारी कर दी जाएगी।
-जितेन्द्र जादौन, एडीपीसी धौलपुर
शिक्षा सत्र समाप्ति में महज ढाई माह बचे हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों को संचालन व जरूरतों के लिए स्कूल कंपोजिट ग्रांट खेल अनुदान सहित कोई भी अनुदान राशि नहीं मिली हैं। जिससे स्कूलों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रहीं हैं।
-राजेश शर्मा, पूर्व प्रदेश महामंत्री रापंरा.एवं मा.शिक्षक संघ
Published on:
20 Jan 2026 07:11 pm
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