
-37दिनों में 40 किसानों ने ही कराया एमएसपी पंजीयन, गत वर्ष संख्या थी 500
-सरकारी खरीद से किसानों का होता मोहभंग, पंजीयन प्रक्रिया धीमी
- जिले में केवल एक ही खरीद केन्द्र वह भी बाड़ी में बनाया
धौलपुर. इस सीजन जिले भर में 60 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल लहलहा रही है। जिसकी सरकारी बिकवाली को लेकर 1 फरवरी से किसानों के रजिस्ट्रेशन भी प्रारंभ हो चुके हैं, लेकिन एक माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक जिले में केवल 40 किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। जिससे ऐसा लगता है कि किसानों का सरकारी खरीद से मोहभंग होता जा रहा है।
किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के उद्देश्य से सरकार सरसों, गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था करती है, लेकिन जिले के किसान सरकारी प्रक्रिया में अभी तक कम ही रुचि दिखा रहे हैं, जबकि शासन और प्रशासन किसानों को इस प्रक्रिया से जोडऩे के भरकस प्रयास भी कर रहा है, लेकिन उसके बावजूद भी किसान केन्द्रों तक नहीं पहुंच रहे। एमएसपी पर गेहूं खरीदी के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 1 फरवरी से प्रारंभ हो चुकी है, हालांकि यह 1 जून तक चलेगी, लेकिन एक माह से ज्यादा वक्त बीतने की अवधि में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बेहद धीमी है। इस अवधि में जिले के केवल 40 किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया है। जिले में गेहूं की खरीद राजफेड कर रहा है। जिसके लिए जिले में केवल एक मात्र सेंटर बाड़ी को बनाया गया है, हालांकि पिछले साल दो सेंटर बाड़ी और बसेड़ी बनाए गए थे। राजफेड के अनुसार खरीदी प्रक्रिया आज यानी 10 मार्च से प्रारंभ हो जाएगी।
गत सीजन 500 किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन
गत सीजन की बात करें तो पिछले वर्ष जिले भर के 500 से ज्यादा किसानों ने सरकारी खरीद को लेकर रजिस्ट्रेशन कराए थे। जिनमें से लगभग 400 किसानों ने एमएसपी पर गेहूं की बिकवाली की थी, जिनसे राजफेड ने 700 से 800 क्विंटल गेहूं खरीदा था, जिसका 8 करोड़ 80 लाख 64 हजार 972 रुपए का भुगतान भी किया गया था, मगर गत वर्ष गेहूं खरीद के लिए जिले में दो सेंटर बाड़ी और बसेड़ी बनाए गए थे, जिस कारण किसानों ने भी अपनी रुचि दिखाई थी, लेकिन इस सीजन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी है, हालांकि विभाग उम्मीद जता रहा है कि समय के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ेगी।
जिले में केवल एक ही खरीद सेंटर
किसानों का सरकारी खरीद से मोहभंग होने का एक नहीं कई कारण हैं। जिसमें सबसे बड़ा कारण खरीद केन्द्र का भी है। देखा जाए तो जिले भर में 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं फसल की बोवनी की गई है। जिसको लेकर केवल एक ही खरीद केन्द्र यानी बाड़ी में ही बनाया गया है। जिस कारण बाड़ी और आसपास के लोग तो केन्द्र पर अपना गेहंू समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं लेकिन बाड़ी से दूर दराज क्षेत्र के किसान बाड़ी सेंटर जाने की अपेक्षा बाजारों में ही अपने गेहूं को व्यापारियों को बेच देते हैं। जहां गेहूं के दाम भी बेहतर मिल जाते हैं और थोड़ समय में फसल की कीमत भी किसानों को प्राप्त हो जाती है।
2,585 एमएसपी, 150 प्रति क्विंटल बोनस
केन्द्र सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा भी, राज्य सरकार की ओर 150 प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा, जिससे किसानों को कुल 2,735 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। जानकारी के अनुसार जिले भर में सरकारी खरीद 10 मार्च से 30 जून 2026 तक चलेगी।
आज से खरीद प्रक्रिया प्रारंभ, फसल अभी खड़ी
एक फरवरी से जिले भर में रजिस्ट्रेशन की प्रकिया चल रही है, जो 1 जून तक चलेगी। तो वहीं केन्द्र पर गेहूं खरीद प्रक्रिया भी आज 10 मार्च से प्रारंभ हो जाएगी, हालांकि अभी गेहूं की फसल न ही पकी है और न कटाई हो पाई है। अब ऐसी स्थिति में केन्द्र पर गेहूं की फसल आने में लगभग 20 से 25 दिन का समय और लग सकता है, तब ही केन्द्र पर किसान बिकवाली को गेहूं की फसल लेकर आएंगे, लेकिन तब तक किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारंभ रहेगी।
किसानों की रुचि क्यों हुई कम
- जिले भर में केवल एक ही खरीद सेंटर बनाया गया है, गत वर्ष दो थे।- एमएसपी पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान में देरी, जबकि मंडी में तुरंत नगद भुगतान की व्यवस्था।
- पंजीयन से लेकर तौल तक कई स्तर पर दलाली और लंबी लाइन का सामना।- खरीदी केन्द्रों पर कई-कई दिन रुकना पड़ता है।
- गेहूं के समर्थन मूल्य और बाजार भाव में अधिक अंतर न होना भी एक कारण
किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारंभ है, अभी तक ४० किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यह प्रक्रिया १ जून तक चलेगी। गेहूं खरीदी के लिए बाड़ी में सेंटर बनाया गया है।
-भूरी ङ्क्षसह मीणा, निरीक्षक खरीद केन्द्र बाड़ी
Published on:
10 Mar 2026 06:21 pm
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