
- अतिक्रमण के चलते दम तोड़ रहा पुरा महत्व का स्थल
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को अतिक्रमण चिह्नित करने के निर्देश
धौलपुर. जिले में पर्यटन की तमाम संभावनाएं हैं लेकिन इन सब के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से खास प्रयास नहीं दिखे। बता दें कि जिला पर्यटन विकास समिति जैसी बैठकों में जिम्मेदारों को आवश्यक निर्देश देकर पर्यटन विकास की कहानी दम तोड़ जाती है। हाल ये है कि न तो जिम्मेदार पर्यटन क्षेत्रों का भ्रमण करते हैं और न ही उसकी वास्तुस्थिति से वाकिफ हैं। धौलपुर शहर में मचकुण्ड के अलावा कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं लेकिन पर्यटन विभाग उनका प्रचार प्रसार तक नहीं करवा पा रहा है। हाल ये है कि वाटर वक्र्स चौराहे पर एक भी होर्डिंग्स या दिशा सूचक नहीं है जो बताए कि मचकुण्ड सरोवर इस तरफ है। ऐसा ही हाल अन्य पर्यटन स्थलों का बना हुआ है। बाबर का ऐतिहासिक लोटस गार्डन भी अनदेखी का शिकार बना हुआ है। कुछ ही लोगों को मामूल है कि झोर गांव में लोटस गार्डन है। इसकी वजह मुख्य सडक़ पर कहीं कोई संकेतिक चिह्न नहीं है। जिससे पर्यटक भी यहां नहीं पहुंच जाते हैं।
ग्वालियर जाते बाबर ने करवाया था निर्माण
बाड़ी रोड स्थित झोर गांव में ऐतिहासिक बाबर का लोटस गार्डन या फिर बाग-ए-नीलुफर मौजूद है। बताया जाता है कि ग्वालियर जाते समय बाबर ने 24 अगस्त 1528 को धौलपुर में डेरा डाला था। यहां झोर गांव के पास पहाडिय़ों की खूबसूरती से प्रभावित होकर उसने एक बाग बनवाने का आदेश दिया। पत्थर काटने वाले उस्ताद शाह मोहम्मद को आदेश दिया गया कि वह चट्टानों को समतल करे और एक पत्तेदार अष्टकोणीय टैंक (8 वाई 8 मीटर व्यास) और छोटे कमल के आकार के तालाब बनाए जो चट्टान के एक ही हिस्से से पानी के चैनलों से जुड़े हों। इसके अलावा हम्माम, एक खड़ा अष्टकोणीय कुआं जिसमें विकिरण करने वाली ढलानें हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को वास्तुस्थिति बताने के निर्देश
एडीएम ने ली बैठक में बाबर गार्डन के मूल एवं परिधि क्षेत्र में अतिक्रमण की वस्तुस्थिति एवं अब तक की गई कार्यवाही के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रिपोर्ट पेश के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015, वर्ष 2020 एवं वर्ष 2024 की सैटेलाइट इमेजिंग का उपयोग कर अतिक्रमण की स्थिति का आकलन किया जाए एवं विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सोने का गुर्जा एवं शेरगढ़ किले पर चल रहे विकास कार्यों की गहन मॉनिटरिंग करें एवं उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बाग-ए-नीलुफर की ऐसे हुई खोजबता दें कि धौलपुर के बाबर गार्डन की खोज 1978 ई. में उस समय भारत में अमेरिकी राजदूत की पत्नी एलिजाबेथ मोइनिहान ने की थी। बाबर की आत्मकथा को मार्गदर्शक के रूप में प्रयोग करते हुएए एलिजाबेथ ने उज्बेकिस्तान से धौलपुर तक के सुरागों का सावधानीपूर्वक पता लगाया। इस बाग का नाम बाबर ने बाग-ए-नीलुफर रखा था, जिसका अर्थ है कमल का बगीचा।
जिले के पर्यटन स्थलों का लगातार प्रचार-प्रसार किया जाता है। साथ ही यहां पर कार्यक्रम भी रखे जाते हैं जिससे लोग इन ऐतिहासिक स्थलों से परिचित हो सके। बैठक में बाबर गार्डन को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश दिए हैं।- संजय जौहरी, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग भरतपुर
Published on:
18 Jul 2024 06:00 pm
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